क्या वरुण ग्रोवर ने इंजीनियरिंग छोड़कर स्टैंड-अप कॉमेडी और लेखन में सफल होने का सफर तय किया?
Key Takeaways
- वरुण ग्रोवर ने अपने सपनों के लिए नौकरी छोड़ी।
- उन्होंने कॉमेडी में अपनी पहचान बनाई।
- वरुण ने लेखन और निर्देशन में भी सफलता पाई।
- उनकी कलम में रोमांस और भावनाएँ हैं।
- आज वे एक सफल आर्टिस्ट हैं।
मुंबई, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल को छूने वाले गीतों से लेकर गंभीर फिल्मों की कहानियों तक, वरुण ग्रोवर हर भूमिका में अपनी छाप छोड़ते हैं। उन्होंने स्टैंड-अप कॉमेडी के क्षेत्र में भी एक अनोखी पहचान बनाई है।
हंसाने वाले वरुण की कलम में रोमांस और अन्य भावनाओं को शब्दों में पिरोने की अद्भुत क्षमता है। अपने इस जुनून को पालने के लिए वरुण ने सिविल इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर मुंबई की ओर कदम बढ़ाए। वरुण ग्रोवर एक प्रसिद्ध स्टैंड-अप आर्टिस्ट हैं।
उनका जन्म २६ जनवरी १९८० को हुआ। सुंदरनगर में जन्मे वरुण के पिता सेना में इंजीनियर थे, इसलिए उनका बचपन देश के विभिन्न हिस्सों में बीता। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू) से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की और फिर एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम किया।
वरुण को लेखन का शौक पहले से था। स्कूल और कॉलेज के दिनों में कविता लिखने वाले वरुण कुछ नया करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़कर अपने सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई का रुख किया।
उन्होंने पुणे की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में भी काम किया, जहां उन्हें एहसास हुआ कि 20 साल बाद उनकी जिंदगी कैसी होगी। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, "मैं अपने भविष्य को महसूस कर रहा था कि 20 साल बाद मैं ऑफिस के सीनियर्स की तरह ही दिखने वाला हूं। सभी वरिष्ठों के पास एक जैसी कारें हैं, घर भी लगभग समान हैं, और बच्चे एक ही स्कूल में पढ़ते हैं। मैं ऐसी जिंदगी नहीं जीना चाहता था, और मेरे परिवार ने भी मेरा समर्थन किया।"
उन्होंने पहले लेखकों के सत्रों में भाग लेना शुरू किया और हंसाने के साथ-साथ भावुक लेखन पर ध्यान केंद्रित किया। अपनी कला को निखारते हुए, वरुण ने कॉमेडी के जरिये पहचान बनाई और फिर फिल्मों की ओर बढ़े। उन्हें 'मसान' और 'संदीप और पिंकी फरार' की कहानियाँ लिखने का मौका मिला। वे केवल लेखन तक सीमित नहीं रहे, बल्कि निर्देशन में भी अपनी किस्मत आजमाई।
उन्होंने फिल्म 'ऑल इंडिया रैंक' का निर्देशन किया। स्क्रीन पर अपनी बातों से दर्शकों को हंसाने वाले वरुण की कलम रोमांस को भी अच्छे से जानती है। उन्होंने 'मोह-मोह के धागे' गाना लिखा, जिसके लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला। उन्होंने 'शौक', 'ये एक जिंदगी', 'नजर तेरी तूफान', और 'जबरा फैन' जैसे गाने भी लिखे। आज वे एक सफल गीतकार, लेखक और स्टैंड-अप आर्टिस्ट के रूप में जाने जाते हैं।