क्या पांव के छाले भी रोक सकते हैं वसुंधरा राजे की राह?
सारांश
Key Takeaways
- जनता की दुआओं से बाधाओं को पार किया जा सकता है।
- पदयात्रा लोगों के विश्वास और विकास के लिए है।
- वसुंधरा राजे ने आशीर्वाद पदयात्रा का आयोजन किया।
- दुष्यंत सिंह का जनता से जुड़ाव महत्वपूर्ण है।
- भाजपा की मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
झालावाड़, 15 जनवरी (आईएएनए)। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने झालावाड़ जिले के उन्हेल नागेश्वर में अपने सांसद पुत्र दुष्यंत सिंह की तीन दिवसीय जनसंवाद पदयात्रा को झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जीवन में दृढ़ इच्छाशक्ति और जनता की दुआओं से कोई भी बाधा नहीं रोक सकती। राजे ने स्मरण किया कि जब वे सांसद थीं, तब पदयात्रा के दौरान उनके पांवों में छाले पड़ जाते थे, लेकिन वे पिन से उन्हें फोड़कर आगे बढ़ जाती थीं। उन्होंने काव्यात्मक अंदाज में कहा, "मैं चलती रही उम्रभर दुआओं के साथ, पांव के छाले कभी मेरी राहें नहीं रोक पाए।"
यह कार्यक्रम झालावाड़ के प्रसिद्ध जैन तीर्थ स्थल नागेश्वर से शुरू हुआ। वसुंधरा राजे ने पदयात्रा को 'आशीर्वाद पदयात्रा' का नाम दिया और कहा कि यह केवल एक राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि अपनों के लिए अपनों द्वारा की जाने वाली यात्रा है।
उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र की उन्नति, विकास और लोगों के विश्वास की यात्रा है। राजे ने कहा कि ज्यादातर नेता चुनाव के समय आते हैं और जीतने के बाद पांच साल तक एसी कमरों में रहते हैं, लेकिन वे और उनके पुत्र ऐसा नहीं करते। वे क्षेत्र को परिवार मानते हैं और लोगों को मतदाता नहीं, बल्कि भाग्य निर्माता मानते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि सांसद दुष्यंत सिंह हमेशा जनता के बीच रहते हैं और हर जगह पहुंचने की कोशिश करते हैं। यह यात्रा जन-जन से जुड़ने, उनकी आवाज सुनने और सपनों को पूरा करने का माध्यम है। इसका उद्देश्य हर नागरिक का सम्मान, उत्थान और हर जायज समस्या का समाधान करना है। उन्होंने कहा कि सांसद खेतों की मिट्टी, बच्चों की मुस्कान और लोगों की मेहनत को अपनाने आए हैं तथा उनकी तकलीफों को गले लगाने आए हैं।
कार्यक्रम में सांसद दुष्यंत सिंह के अलावा आरपीएससी चेयरमैन श्याम सुंदर शर्मा, स्थानीय विधायक और भाजपा के कई नेता मौजूद रहे। पदयात्रा गंगधार उपखंड से होते हुए तीन दिन तक चलेगी। यह कार्यक्रम झालावाड़ में भाजपा की मजबूत पकड़ और जनसंपर्क को दर्शाता है, जहां वसुंधरा राजे और उनके परिवार का लंबे समय से प्रभाव रहा है।