विजय को PM उम्मीदवार बनाने का टीवीके अभियान, कांग्रेस-गठबंधन में दरार के संकेत
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में प्रस्तुत करने वाले अभियान ने सत्तारूढ़ तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) और उसके गठबंधन सहयोगी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच तनाव की लकीरें खींच दी हैं। 30 अगस्त को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, पोस्टरों, वीडियो और सोशल मीडिया रील्स के ज़रिए चलाए जा रहे इस प्रचार अभियान से कांग्रेस नेतृत्व में बेचैनी बढ़ गई है।
अभियान की शुरुआत कैसे हुई
यह विवाद तब सतह पर आया जब टीवीके के विधायकों और मंत्रियों ने तमिलनाडु विधानसभा में बार-बार मुख्यमंत्री विजय की प्रशंसा की। धीरे-धीरे यह मामला सदन की चारदीवारी से बाहर निकला और सार्वजनिक स्थानों पर विजय को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में दर्शाने वाले पोस्टर लगने लगे। उत्तर भारत में भी इस आशय के प्रचार वीडियो (रील्स) प्रसारित होने की खबरें हैं — एक ऐसा क्षेत्र जहाँ कांग्रेस खुद को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रमुख विपक्षी शक्ति मानती है।
एक टीवी चैनल के सर्वे ने इस अभियान को व्यापक ध्यान दिलाया, जिसमें विजय को प्रधानमंत्री पद के संभावित उम्मीदवारों में 9 प्रतिशत समर्थन के साथ तीसरा स्थान मिला — कांग्रेस नेता राहुल गांधी से पीछे। रिपोर्टों के अनुसार इसी सर्वे के बाद कांग्रेस के भीतर असंतोष और गहरा हो गया।
कांग्रेस की आपत्तियाँ
पार्टी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि कांग्रेस नेता इस बात से नाखुश हैं कि तमिलनाडु में टीवीके-कांग्रेस गठबंधन के सत्ता में आने के कुछ ही महीनों बाद विजय को राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए आगे किया जा रहा है। उन्होंने तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) के अध्यक्ष मणिकम टैगोर की उस हालिया टिप्पणी का भी संदर्भ दिया, जिसमें उन्होंने मंत्रियों पर 'फैन वाली मानसिकता' दिखाने का आरोप लगाया था।
गौरतलब है कि यह स्थिति कांग्रेस के लिए विशेष रूप से नाज़ुक है, क्योंकि टीवीके से हाथ मिलाने से पहले उसने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) से अपना गठबंधन समाप्त किया था — वही डीएमके जिसने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में समर्थन दिया था।
नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद जोथिमानि ने सीएम विजय को आगे करने की कोशिश को एक चुनावी रणनीति बताया, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को चुनौती देने और उसे पराजित करने के मामले में राहुल गांधी का कोई विकल्प नहीं है।
वहीं, मदुरै में उठे इस विवाद पर राज्य मंत्री निर्मल कुमार ने कहा कि पूरे भारत में लोग विजय को लेकर उम्मीदें रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सीएम विजय राजनीतिक परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेंगे और अभी इस विषय पर चर्चा करना समयपूर्व है।
गठबंधन की रणनीति पर सवाल
रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस की मूल योजना यह थी कि राहुल गांधी को गठबंधन का राष्ट्रीय चेहरा बनाए रखा जाए और दक्षिण भारत में सीएम विजय की लोकप्रियता का लाभ उठाकर गठबंधन की संभावनाओं को मज़बूत किया जाए। हालाँकि, विजय को प्रधानमंत्री पद के लिए प्रमोट करने की इस होड़ ने उस रणनीति को जटिल बना दिया है और गठबंधन के भविष्य के संदेश, नेतृत्व की प्राथमिकताओं तथा राजनीतिक एकजुटता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी गठबंधन को BJP के खिलाफ एकजुट मोर्चा दिखाने की ज़रूरत है। आने वाले हफ्तों में दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर बातचीत और स्पष्टीकरण की उम्मीद की जा रही है।