विजया मेहता को श्रद्धांजलि: PM मोदी, गडकरी, फडणवीस ने 'बाई' को किया याद
सारांश
मुख्य बातें
मराठी रंगमंच और भारतीय सिनेमा की अग्रणी हस्ती विजया मेहता के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार सहित कई नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। 1 जुलाई को उनके जाने की खबर ने कला जगत को स्तब्ध कर दिया। 4 नवंबर 1934 को जन्मी विजया मेहता को उनके चाहने वाले प्यार से 'बाई' कहकर बुलाते थे।
PM मोदी की संवेदनाएँ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा कि विजया मेहता भारतीय संस्कृति और सिनेमा की सबसे महान हस्तियों में हमेशा याद की जाएंगी। उन्होंने आधुनिक मराठी रंगमंच की अग्रणी हस्ती के रूप में उनकी रचनात्मकता और कला के प्रति समर्पण को रेखांकित किया। मोदी ने कहा, 'उनके काम ने कई पीढ़ियों के कलाकारों, निर्देशकों और रंगमंच प्रेमियों को प्रेरित किया। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, प्रशंसकों और पूरे कला जगत के साथ हैं।'
गडकरी और फडणवीस का शोक
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि विजया मेहता ने अपने नाटकों और फिल्मों के माध्यम से मराठी रंगमंच और सिनेमा को अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने इस निधन को 'मराठी रंगमंच और फिल्म जगत के लिए अपूरणीय क्षति' बताया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी एक्स पर शोक जताते हुए कहा कि विजया मेहता के निधन के साथ 'एक पूरा कलात्मक दौर इतिहास के पर्दे के पीछे चला गया।' उन्होंने याद दिलाया कि विजया मेहता ने अभिनय से पहचान बनाई और बाद में कई यादगार नाटकों का निर्देशन भी किया।
सुनेत्रा पवार की श्रद्धांजलि
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने एक्स पर लिखा कि विजया मेहता ने निर्देशन और रंगमंच निर्माण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई और मराठी थिएटर को नई दिशा दी। पवार के अनुसार, उन्होंने उभरते कलाकारों को मंच देकर आगे बढ़ाया और फिल्मों में भी सशक्त अभिनय से अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने कहा कि 'विजया मेहता का काम हमेशा मराठी कला जगत के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।'
विजया मेहता: एक कलात्मक युग का अंत
विजया मेहता भारत की प्रसिद्ध थिएटर और फिल्म निर्देशक, अभिनेत्री तथा निर्माता थीं। उन्होंने आधुनिक भारतीय रंगमंच को नई पहचान देने में अहम भूमिका निभाई और प्रदर्शन कला की दिशा बदलने वाली अग्रणी हस्तियों में अपना नाम दर्ज कराया। उनके नाटकों ने मराठी थिएटर में नई ऊर्जा का संचार किया और अनेक महान कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया। उनका जाना न केवल मराठी, बल्कि समूचे भारतीय रंगमंच के लिए एक अपूरणीय रिक्तता छोड़ गया है।