क्या विट्ठलभाई पटेल ने विधाई परंपराओं की नींव डालकर भारत के लोकतंत्र को बनाया? : अमित शाह

सारांश
Key Takeaways
- विट्ठलभाई पटेल का स्पीकर बनना भारत के लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण क्षण है।
- अमित शाह ने उनके योगदान को याद करते हुए सुझाव दिया कि उनके विचारों को संग्रहीत किया जाए।
- भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कई महान नेताओं का योगदान रहा है।
- सदन की कार्यवाही की परंपराएं अलग-अलग हैं, जो लोकतंत्र की मजबूती में सहायक हैं।
- सदन में विचारों का आदान-प्रदान लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
नई दिल्ली, 24 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। महान स्वतंत्रता सेनानी विट्ठलभाई पटेल ने 100 वर्ष पहले इसी दिन केंद्रीय विधानसभा के स्पीकर की कुर्सी संभाली थी। इस ऐतिहासिक अवसर के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दिल्ली विधानसभा में एक विशेष आयोजन आयोजित किया गया, जिसमें केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भाग लिया।
अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा, "आज के दिन महान स्वतंत्रता सेनानी विट्ठलभाई पटेल के स्पीकर बनने की 100वीं वर्षगांठ है। यह दिन हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। विधानसभा में कई महान अध्यक्ष रहे हैं। मैं यह सुझाव देना चाहता हूं कि देश के सभी सदनों में उनके विचारों को लाइब्रेरी में संग्रहीत किया जाए। आज विट्ठलभाई पटेल पर जो प्रदर्शनी आयोजित की गई है, वह देश के सभी विधानसभा में होनी चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा, "भारत के आजादी के आंदोलन में कई प्रमुख नेताओं ने अपनी भूमिका निभाई है। गोपाल कृष्ण गोखले, लाला लाजपत राय, चितरंजन दास, मालवीय जी जैसे कई लोग इस सदन का हिस्सा रहे हैं। गुजरात ने हमें ऐसे दो भाई दिए हैं - एक सरदार पटेल जिन्होंने गांधी जी के साथ मिलकर स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान दिया और दूसरे भाई विट्ठलभाई पटेल जिन्होंने भारत की विधाई परंपराओं की नींव रखकर आज के लोकतंत्र का निर्माण किया।"
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन की कार्यवाही को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, "यह दो दिन का सत्र बहुत उपयोगी रहेगा। हमें उन महान व्यक्तियों के योगदान को समझना और उनकी सोच को आगे बढ़ाना चाहिए। आज सदन की कार्रवाई को ऑनलाइन देखने का अवसर मिलता है। कुछ सदन बहुत अच्छे से काम करते हैं, लेकिन यह कहना मुश्किल है कि सबसे अच्छा कौन सा है।"
उन्होंने यह भी कहा, "सदन की कार्यवाही किस प्रकार चलती है, इस पर सभी विधानसभाओं की अलग-अलग परंपराएं रही हैं। सभी विधानसभा नियमित रूप से अपनी परंपराओं को बनाए रखे हुए हैं। अगर संसद और विधानसभा सही से काम नहीं करेंगे तो लोकतंत्र पर प्रश्न उठेंगे। सदन में हंगामा होना स्वाभाविक है, क्योंकि यहां अलग-अलग विचारधाराएं आती हैं। विपक्ष का काम है सरकार की आलोचना करना, लेकिन सदन को भंग करना उचित नहीं है।