क्या मुंबई में प्रॉपर्टी पंजीकरण नवंबर में 12 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया?
सारांश
Key Takeaways
- मुंबई में प्रॉपर्टी पंजीकरण ने पिछले 12 वर्षों में उच्चतम स्तर पर पहुंचा है।
- स्टांप ड्यूटी संग्रह में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
- उच्च मूल्य वाले घरों की मांग में बढ़ोतरी देखी गई है।
मुंबई, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। आवासीय संपत्तियों की बढ़ती मांग के चलते देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में प्रॉपर्टी पंजीकरण नवंबर में पिछले 12 वर्षों या 2013 से अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच गया है। यह जानकारी रविवार को एक नई रिपोर्ट में उपलब्ध कराई गई।
नाइट फ्रैंक इंडिया के अनुसार, शहर में बीएमसी के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में नवंबर 2025 में 12,219 संपत्तियां पंजीकृत हुई हैं, जो पिछले वर्ष इसी महीने की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक है।
इस दौरान स्टांप ड्यूटी संग्रह सालाना आधार पर 12 प्रतिशत बढ़कर 1,038 करोड़ रुपए हो गया है, जो यह दर्शाता है कि लोग बड़ी संख्या में संपत्तियों में निवेश कर रहे हैं।
मासिक आधार पर पंजीकरण में 5 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, जबकि स्टांप ड्यूटी संग्रह स्थिर रहा है।
इस साल जनवरी से नवंबर अवधि तक मुंबई में 1,35,807 संपत्ति पंजीकरण दर्ज किए गए हैं, जिससे राज्य सरकार को 12,224 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है।
इस अवधि के दौरान, पंजीकरण में सालाना आधार पर 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई और राजस्व में 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो पूरे वर्ष शहर की मजबूत रियल एस्टेट गतिविधि को दर्शाता है।
नाइट फ्रैंक इंडिया के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने बताया कि मुंबई का आवासीय बाजार अपनी मजबूत गति बनाए रखे हुए है।
उन्होंने कहा कि पंजीकरण में 20 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि और राजस्व में 12 प्रतिशत की वृद्धि विभिन्न क्षेत्रों में स्थिर मांग और उच्च मूल्य वाले घरों की ओर स्पष्ट रुझान को दर्शाती है।
बैजल ने कहा कि 2025 के ग्यारह महीनों में 1.35 लाख से अधिक पंजीकरणों के साथ, बाजार अब लगातार मासिक गतिविधि के साथ संरचनात्मक रूप से उच्च स्तर पर चल रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि बिक्री की मात्रा और राजस्व दोनों में स्थिरता एक परिपक्व मांग चक्र और खरीदारों के निरंतर विश्वास का संकेत देती है।
नवंबर में अधिक कीमत वाले घरों की मांग में वृद्धि जारी रही। 5 करोड़ रुपए से अधिक की कीमत वाली संपत्तियों की कुल पंजीकरण में हिस्सेदारी 7 प्रतिशत रही, जबकि एक साल पहले यह 5 प्रतिशत थी।
हालांकि, इस दौरान 1 करोड़ रुपए से कम कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी में गिरावट आई है। 2-5 करोड़ रुपए के प्राइस बैंड वाली मध्यम-श्रेणी के सेगमेंट का प्रदर्शन स्थिर रहा, जबकि 1 करोड़ रुपए से 2 करोड़ रुपए के बीच की कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी 2024 में 31 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 33 प्रतिशत हो गई है।