वीके शशिकला ने तमिलनाडु में अपनी नई राजनीतिक पार्टी का नाम किया घोषित
सारांश
Key Takeaways
- वीके शशिकला ने नई पार्टी 'ऑल इंडिया पुराची थलाइवर मक्कल मुनेत्र कड़गम' की स्थापना की।
- पार्टी का चुनाव चिन्ह 'नारियल का बगीचा' है।
- शशिकला का उद्देश्य डीएमके से लोगों को बचाना है।
- शशिकला 20 से अधिक प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारने की योजना बना रही हैं।
- उन्होंने जयललिता की 78वीं जयंती पर पार्टी का झंडा जारी किया।
चेन्नई, 13 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता की करीबी सहयोगी और एआईएडीएमके (ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) की पूर्व कार्यवाहक महासचिव वीके शशिकला ने शुक्रवार को अपनी नई राजनीतिक पार्टी का नाम सार्वजनिक किया। उन्होंने 'ऑल इंडिया पुराची थलाइवर मक्कल मुनेत्र कड़गम' नाम से पार्टी की स्थापना की है, जिसका चुनाव चिन्ह 'नारियल का बगीचा' रखा गया है।
वीKE शशिकला ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "आज मेरे लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। मैंने यह पार्टी तमिलनाडु के लोगों को डीएमके से बचाने के उद्देश्य से शुरू की है। एआईएडीएमके का गठन गरीबों के कल्याण के लिए हुआ था, लेकिन जयललिता के निधन के बाद हालात बदल गए।"
एआईएडीएमके के संस्थापक एमजी रामचंद्रन को याद करते हुए वीके शशिकला ने कहा, "जिस प्रकार एमजीआर ने लोगों के लिए एक पार्टी बनाई थी, उसी तरह मुझे भी एक नई पार्टी की आवश्यकता महसूस हुई।"
उन्होंने आगे कहा, "इस पार्टी का गठन उन कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया है जो एमजीआर और जयललिता के दिखाए गए मार्ग पर चलने का संकल्प रखते हैं। इसका चुनाव चिन्ह 'नारियल का बगीचा' है। जब कई पेड़ एक साथ होते हैं, तभी वे एक बगीचा बनाते हैं। हम लोगों से मिलेंगे और उन्हें बताएंगे कि हम राज्य के लिए क्या कर सकते हैं और सरकार किन कामों में विफल रही है।"
इससे पहले, एआईएडीएमके की इस पूर्व नेता ने एक मार्च को घोषणा की थी कि वह एक नई द्रविड़ पार्टी की स्थापना करेंगी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता की 78वीं जयंती के अवसर पर पार्टी का झंडा भी जारी किया।
गौरतलब है कि एआईएडीएमके ने हाल ही में वीके शशिकला को पार्टी से निलंबित किया था। उन पर आय से अधिक संपत्ति का मामला चल रहा था, जिसके चलते उन्हें पार्टी से निकाला गया।
सूत्रों के अनुसार, शशिकला दक्षिणी जिलों में 20 से अधिक प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतार सकती हैं। मुक्कुलाथोर समुदाय, जिसमें थेवर, कल्लर और अगमदयार समूह शामिल हैं, उनका चुनावी प्रभाव काफी मजबूत है। माना जा रहा है कि उनकी रणनीति इस वोट बैंक को साधने पर केंद्रित है।