17 अक्टूबर 2026
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टीपू सुल्तान पर कांग्रेस नेता वडेट्टीवार का बड़ा बयान: 'इतिहास गलत तरीके से पेश किया गया'

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टीपू सुल्तान पर कांग्रेस नेता वडेट्टीवार का बड़ा बयान: 'इतिहास गलत तरीके से पेश किया गया'

सारांश

मालेगांव में 'टीपू वाली आजादी' के नारों ने सियासत गर्मा दी। कांग्रेस नेता वडेट्टीवार ने पलटवार करते हुए कहा — टीपू सुल्तान का इतिहास तोड़-मरोड़कर पेश किया गया, फोटो लगाना राष्ट्रद्रोह नहीं। साथ ही परिसीमन और दिल्ली में CJP पदाधिकारियों की हिरासत पर भी सरकार को घेरा।

मुख्य बातें

विजय वडेट्टीवार ने 17 अक्टूबर 2026 को नागपुर में कहा कि टीपू सुल्तान का इतिहास गलत तरीके से पेश किया गया।
मालेगांव विरोध प्रदर्शन में लगे 'टीपू वाली आजादी' के नारों पर उन्होंने कहा — किसी का फोटो लगाना अपने आप में राष्ट्रद्रोह नहीं।
दिल्ली में तिरंगा रैली से पहले अभिजीत दिपके समेत CJP पदाधिकारियों की हिरासत पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के परिसीमन पर PM मोदी को लिखे पत्र का वडेट्टीवार ने समर्थन करते हुए सर्वदलीय बैठक की माँग दोहराई।
वडेट्टीवार ने चेतावनी दी कि जितना आंदोलनकर्ताओं को दबाया जाएगा, उतना ही विरोध बढ़ेगा।

महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने 17 अक्टूबर 2026 को नागपुर में मीडिया से बात करते हुए मालेगांव के विरोध प्रदर्शन में लगे 'हमें चाहिए आजादी, टीपू वाली आजादी' जैसे नारों पर अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि टीपू सुल्तान के बारे में इतिहास को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है और किसी का फोटो लगाना अपने आप में राष्ट्रद्रोह नहीं है।

टीपू सुल्तान पर वडेट्टीवार का रुख

वडेट्टीवार ने सीधे सवाल उठाते हुए कहा, 'टीपू सुल्तान क्या देशद्रोही था? उसका इतिहास गलत तरीके से पेश किया गया।' उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई आंदोलन के दौरान किसी का फोटो लगाता है, तो उसे स्वतः राष्ट्रद्रोही या नक्सली नहीं करार दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, इतिहास को ठीक से पढ़ने पर सच्चाई स्वयं सामने आ जाती है।

यह ऐसे समय में आया है जब मालेगांव में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान लगे इन नारों पर सियासी विवाद तेज हो गया है। गौरतलब है कि टीपू सुल्तान की ऐतिहासिक भूमिका को लेकर भारतीय राजनीति में दशकों से बहस जारी है, जिसमें एक पक्ष उन्हें अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ने वाला योद्धा मानता है और दूसरा पक्ष उनकी नीतियों पर सवाल उठाता है।

लोकतंत्र और आजादी पर सवाल

कांग्रेस नेता ने मौजूदा राजनीतिक माहौल पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, 'आजादी-आजादी क्या होनी चाहिए? यह सबको अपने-अपने हिसाब से चाहिए, लेकिन इस समय देश में जिस तरह का माहौल है, उसे देखकर अगर कोई आजादी की माँग करता है तो सवाल यह आता है कि क्या आज हम लोग लोकतंत्र में हैं? क्या हम संविधान को मानते हैं?'

वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि आंदोलनकर्ताओं को दबाया और गिरफ्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'आंदोलन से सरकार क्यों डरती है? क्या यह डर है कि देश का युवा एक साथ रास्ते पर आएगा और सरकार की कुर्सी को धक्का देगा?' उन्होंने चेतावनी दी कि जितना दबाया जाएगा, उतना ही आंदोलन बढ़ेगा।

दिल्ली में तिरंगा रैली और हिरासत पर आपत्ति

दिल्ली में तिरंगा रैली से पहले अभिजीत दिपके और अन्य सीजेपी (CJP) पदाधिकारियों को हिरासत में लिए जाने पर वडेट्टीवार ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि पुलिस की लाठियों से युवा नहीं डरेंगे और सरकार को यह समझ लेना चाहिए।

परिसीमन और सर्वदलीय बैठक का मुद्दा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को परिसीमन के नए प्रस्तावों पर सर्वदलीय बैठक के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पत्र पर भी वडेट्टीवार ने बयान दिया। उन्होंने कहा, 'मोदी सरकार का मनमाना कार्यभार चल रहा है, लेकिन विरोधी भी कम नहीं हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था और दूसरी पार्टियों के समर्थन से सरकार बनी।'

उन्होंने आगे कहा कि खड़गे ने पत्र में SIR (Special Intensive Revision) की खामियों पर भी चर्चा की माँग की थी। कांग्रेस नेता का तर्क था कि विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों को मिलकर बातचीत के ज़रिये आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने दावा किया, 'सरकार डरती क्यों है, क्योंकि सरकार ने गलत किया है।'

आगे क्या

मालेगांव नारों पर उठे विवाद और दिल्ली में CJP पदाधिकारियों की हिरासत के मद्देनज़र यह मामला राजनीतिक रूप से और गरमाने की आशंका है। कांग्रेस के इस बयान के बाद भाजपा की प्रतिक्रिया अपेक्षित है। परिसीमन प्रक्रिया पर सर्वदलीय बैठक की माँग भी अब सियासी बहस के केंद्र में आ गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो विपक्षी एकता को कमज़ोर कर सकता है। आलोचकों का कहना है कि कांग्रेस सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को कम करने की बजाय नारों की व्याख्या में उलझकर असली मुद्दों — परिसीमन, लोकतांत्रिक अधिकार, नागरिक स्वतंत्रता — से ध्यान भटका रही है।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विजय वडेट्टीवार ने टीपू सुल्तान पर क्या कहा?
महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता विजय वडेट्टीवार ने 17 अक्टूबर 2026 को नागपुर में कहा कि टीपू सुल्तान देशद्रोही नहीं थे और उनके बारे में इतिहास को गलत तरीके से पेश किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी का फोटो लगाना अपने आप में राष्ट्रद्रोह का आधार नहीं बनता।
मालेगांव में 'टीपू वाली आजादी' का नारा किस संदर्भ में लगा?
मालेगांव में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान 'हमें चाहिए आजादी, टीपू वाली आजादी' जैसे नारे लगाए गए, जिन पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। वडेट्टीवार ने इन नारों का बचाव करते हुए कहा कि आंदोलन करना और फोटो लगाना नक्सलवाद या राष्ट्रद्रोह नहीं है।
दिल्ली में CJP पदाधिकारियों को हिरासत में क्यों लिया गया?
दिल्ली में तिरंगा रैली से पहले अभिजीत दिपके और अन्य CJP (Citizens for Justice and Peace) पदाधिकारियों को हिरासत में लिया गया। कांग्रेस नेता वडेट्टीवार ने इसे आंदोलनकर्ताओं को दबाने की कोशिश करार दिया और सरकार पर सवाल उठाए।
परिसीमन पर कांग्रेस की क्या माँग है?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने PM मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन के नए प्रस्तावों पर सर्वदलीय बैठक और SIR की खामियों पर चर्चा की माँग की है। वडेट्टीवार ने कहा कि सरकार को विपक्ष के साथ मिलकर बातचीत के ज़रिये आगे बढ़ना चाहिए।
टीपू सुल्तान की ऐतिहासिक भूमिका पर विवाद क्यों है?
टीपू सुल्तान की ऐतिहासिक भूमिका को लेकर भारत में लंबे समय से बहस चली आ रही है। एक वर्ग उन्हें अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ने वाला योद्धा मानता है, जबकि दूसरा वर्ग उनकी धार्मिक नीतियों को लेकर आपत्ति जताता है। यह विवाद समय-समय पर राजनीतिक बहस का केंद्र बनता रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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