टीपू सुल्तान विवाद: वडेट्टीवार के बयान पर BJP-शिवसेना का तीखा पलटवार, 'विलेन था, स्वतंत्रता सेनानी नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
मालेगांव में टीपू सुल्तान के समर्थन में लगाए गए कथित नारों को लेकर कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार की टिप्पणी ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई गर्मी पैदा कर दी है। 17 अक्टूबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना (शिंदे गुट) के नेताओं ने वडेट्टीवार पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि टीपू सुल्तान कोई स्वतंत्रता सेनानी नहीं, बल्कि एक ऐसा शासक था जिसने देश को नुकसान पहुँचाया।
विवाद की पृष्ठभूमि
मालेगांव में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर 'हमें चाहिए आजादी, टीपू वाली आजादी' जैसे नारे लगाए गए थे। यह मामला तब और उलझा, जब कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने टीपू सुल्तान के बचाव में बयान जारी किया।
वडेट्टीवार ने कहा, 'क्या टीपू सुल्तान देशद्रोही था? उसके इतिहास को गलत तरीके से पेश किया गया। छत्रपति शिवाजी महाराज सहित उस दौर के राजा देशद्रोही नहीं थे। लोकतंत्र और संविधान में विश्वास रखने वाले लोगों को आंदोलन करने या किसी का फोटो लगाने पर राष्ट्रद्रोही, आतंकी या नक्सली नहीं कहा जाना चाहिए।'
शिवसेना की प्रतिक्रिया
शिवसेना (शिंदे गुट) की नेता शाइना एनसी ने वडेट्टीवार के बयान को सीधे खारिज करते हुए कहा, 'टीपू सुल्तान कोई स्वतंत्रता सेनानी नहीं है। वह विलेन थे, जिन्होंने भारत को बर्बाद किया और महिलाओं का बलात्कार किया। कांग्रेस पार्टी उन्हें ऐसे प्रस्तुत कर रही है, जैसे वे औपनिवेशिक-विरोधी नेता और अत्यंत सक्षम प्रशासक थे। सच्चाई यह है कि जो धार्मिक उत्पीड़न करते हैं, वह जंग हो या पॉलिसी, वह लोगों के लिए नहीं, बल्कि स्वार्थ के लिए है।'
BJP का पलटवार
BJP नेता परिणय फुके ने मालेगांव के विरोध प्रदर्शन पर कहा कि यह SIR (विशेष सारांश संशोधन) के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए मुस्लिम रोहिंग्याओं का आंदोलन था और इसके पीछे देश में 'अराजकता फैलाने और देश को बदनाम करने' का उद्देश्य है।
वडेट्टीवार की टिप्पणी पर फुके ने कहा, 'विजय वडेट्टीवार को पहले इतिहास पढ़ लेना चाहिए। टीपू सुल्तान ने कितने हिंदुओं को मारा और कितने हिंदुओं का कत्लेआम किया, यह इतिहास में दर्ज है।' उन्होंने राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जिस तरह वे 'रिजीम चेंज' और अराजकता फैलाने की कोशिश करते हैं, उसी तरह उनके समर्थक भी करते हैं।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि टीपू सुल्तान का नाम भारतीय राजनीति में बार-बार विवाद का केंद्र बनता रहा है। कर्नाटक में कई बार उनकी जयंती को लेकर सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच टकराव हो चुका है। यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब महाराष्ट्र में राजनीतिक ध्रुवीकरण और चुनावी सरगर्मियाँ तेज़ हैं। आलोचकों का कहना है कि टीपू सुल्तान जैसे ऐतिहासिक विषय अक्सर चुनावी गणित के हिसाब से उठाए जाते हैं।
आगे क्या होगा
महाराष्ट्र में इस विवाद के और गहराने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी राजनीतिक ज़मीन मज़बूत करने में लगे हैं। ऐतिहासिक व्याख्याओं को लेकर यह बहस अदालत या शैक्षणिक मंचों की बजाय सड़क की राजनीति में ही तय होती दिखती है — जो लंबे समय से भारतीय राजनीति का एक स्थायी पैटर्न रहा है।