पश्चिम बंगाल के DGP सिद्धनाथ गुप्ता को दूसरा सेवा विस्तार, अप्रैल 2027 तक बढ़ा कार्यकाल
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 7 अक्टूबर 2026 को पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) सिद्धनाथ गुप्ता का कार्यकाल छह महीने के लिए और बढ़ा दिया है — यह उनका दूसरा सेवा विस्तार है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए उनका नया कार्यकाल 31 अक्टूबर 2026 के बाद से बढ़ाकर अप्रैल 2027 तक कर दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह विस्तार अखिल भारतीय सेवाएँ नियम, 1958 के नियम 16(1) में छूट देते हुए जनहित में किया गया है। इस नियम के तहत अखिल भारतीय सेवा के किसी भी अधिकारी को उस महीने के अंतिम दिन दोपहर बाद सेवानिवृत्त होना होता है, जिसमें वह 60 वर्ष की आयु पूरी करता है।
गौरतलब है कि गुप्ता को अप्रैल 2026 में भी पहली बार छह महीने का सेवा विस्तार दिया गया था। मूल रूप से वे 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले थे।
नियुक्ति की पृष्ठभूमि
1992 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी सिद्धनाथ गुप्ता को 16 मार्च को विधानसभा चुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल का DGP एवं पुलिस महानिरीक्षक (IGP) नियुक्त किया गया था। उन्होंने IPS अधिकारी पीयूष पांडेय की जगह यह पद संभाला था।
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर केंद्र और राज्य के बीच तनाव की पृष्ठभूमि बनी हुई है। वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी का इस पद पर बने रहना प्रशासनिक निरंतरता की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
सिद्धनाथ गुप्ता का परिचय
गुप्ता मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के बिंदकी नगर के रहने वाले हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा बिंदकी में हुई। उन्होंने 10वीं दयानंद इंटर कॉलेज, बिंदकी से और 12वीं दीनदयाल इंटर कॉलेज, कानपुर से पास की।
इसके बाद उन्होंने 1988 में IIT कानपुर से बीटेक और 1990 में एमटेक की डिग्री हासिल की। 1991 में उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पहली बार पास की और उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा (IRS) में हुआ। तत्पश्चात 1992 में दोबारा UPSC देकर उन्होंने IPS में स्थान पाया और उन्हें पश्चिम बंगाल कैडर आवंटित किया गया।
सेवाकाल की उपलब्धियाँ
गुप्ता पश्चिम बंगाल के कई जिलों में पुलिस अधीक्षक (SP) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के रूप में कार्य कर चुके हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण और पुलिस प्रशासन को सुदृढ़ करने में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। उनकी गिनती पश्चिम बंगाल के तेज़तर्रार और अनुभवी IPS अधिकारियों में होती है।
आगे क्या
अब गुप्ता का कार्यकाल अप्रैल 2027 तक सुनिश्चित है। यह अवधि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील मानी जा रही है। अगले कुछ महीनों में उनके नेतृत्व में राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली पर केंद्र और राज्य दोनों की नज़र रहेगी।