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पश्चिम बंगाल चुनाव: बीडीओ और पुलिस इंस्पेक्टरों के तबादले का दूसरा दौर संभव

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पश्चिम बंगाल चुनाव: बीडीओ और पुलिस इंस्पेक्टरों के तबादले का दूसरा दौर संभव

सारांश

पश्चिम बंगाल में भारतीय चुनाव आयोग द्वारा नौकरशाही और पुलिस प्रशासन में फेरबदल का दूसरा दौर इस सप्ताह शुरू हो सकता है। यह महत्वपूर्ण बदलाव मतदान प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

मुख्य बातें

चुनाव आयोग का दूसरा दौर की घोषणा की संभावना Bडीओ और पुलिस इंस्पेक्टरों के तबादले मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले फेरबदल राजनीतिक आरोपों के बीच चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पश्चिम बंगाल में मतदान की तारीखें

कोलकाता, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा पश्चिम बंगाल में नौकरशाही और पुलिस प्रशासन के सबसे निचले स्तरों में फेरबदल के दूसरे दौर की घोषणा इस सप्ताह की जा सकती है।

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के एक सूत्र ने बताया कि यह फेरबदल ब्लॉक विकास अधिकारियों (बीडीओ) के स्तर पर होगा, जो नौकरशाही पिरामिड के सबसे निचले स्तर पर स्थित हैं, और पुलिस निरीक्षकों के स्तर पर भी, जो राजपत्रित पुलिस प्रशासन में सबसे निचले स्तर पर होते हैं।

मतदान वाले राज्यों में बीडीओ, रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) के रूप में भी काम करते हैं। अधिकांश राज्यों में पुलिस इंस्पेक्टर की यह पदवी गैर-राजपत्रित होती है। लेकिन पश्चिम बंगाल उन सात राज्यों में से एक है, जिसने इस पद को राजपत्रित दर्जा दिया है।

रविवार को राज्य में नौकरशाही और प्रशासनिक ढांचे के सबसे निचले स्तरों में फेरबदल का पहला दौर चुनाव आयोग द्वारा शुरू किया गया था। इसमें पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस में 83 बीडीओ/आरओ और 184 इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों के तबादले का आदेश दिया गया था, जो पुलिस स्टेशन स्तर पर प्रभारी अधिकारी या प्रभारी निरीक्षक के रूप में कार्यरत थे।

15 मार्च को दो चरणों में होने वाले मतदान कार्यक्रम की घोषणा के बाद से चुनाव आयोग ने विभिन्न स्तरों के नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के तबादलों के आदेश जारी किए हैं।

तबादलों की प्रक्रिया की शुरुआत मुख्य सचिव और गृह सचिव जैसे शीर्ष स्तर के नौकरशाहों से हुई और पुलिस विभाग में महानिदेशकों और अतिरिक्त महानिदेशकों से।

दूसरे चरण में, जिला मजिस्ट्रेट जैसे मध्य-स्तरीय अधिकारियों और पुलिस प्रशासन में उप महानिरीक्षकों, अधीक्षकों और उपायुक्तों के तबादले किए गए हैं।

प्रशासनिक ढांचे में निचले स्तरों के अधिकारियों अर्थात सामान्य प्रशासन में बीडीओ और पुलिस प्रशासन में निरीक्षकों के तबादलों का तीसरा और अंतिम चरण अब प्रारंभ हो गया है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने पहले ही चुनाव आयोग पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इशारे पर इतने बड़े पैमाने पर तबादलों का आरोप लगाया है।

पिछले सप्ताह कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनाव आयोग द्वारा आदेशित तबादलों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई पूरी हो चुकी है, हालांकि इस पर फैसला सुरक्षित रखा गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चुनाव आयोग द्वारा तबादलों का उद्देश्य क्या है?
चुनाव आयोग का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है।
क्या बीडीओ चुनावी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं?
हां, बीडीओ रिटर्निंग ऑफिसर के रूप में कार्य करते हैं और चुनावी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
क्या तबादले राजनीतिक दबाव के कारण हो रहे हैं?
कुछ राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है कि ये तबादले राजनीतिक दबाव के तहत हो रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में चुनाव कब होने हैं?
पश्चिम बंगाल में 15 मार्च को दो चरणों में मतदान होगा।
क्या चुनाव आयोग के आदेश को अदालत में चुनौती दी गई है?
हां, पिछले सप्ताह कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनाव आयोग के आदेश को चुनौती दी गई थी।
राष्ट्र प्रेस
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