महिलाओं के लिए आरक्षण की प्रेरणा सरदार पटेल से: सांसद मंजू शर्मा
सारांश
Key Takeaways
- नारी शक्ति वंदन अधिनियम: महिलाओं के लिए 33%25 आरक्षण
- सरदार पटेल: महिलाओं के आरक्षण का विचार प्रारंभ करने वाले
- महिलाओं का सशक्तिकरण: कई सरकारी योजनाएं
- सामाजिक बदलाव: नीति-निर्माण में महिलाओं की भागीदारी
- महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार: लखपति दीदी योजना
जयपुर, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में बुधवार को 'नारी शक्ति वंदन महिला सम्मेलन' का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जयपुर की सांसद मंजू शर्मा ने बताया कि महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण का विचार सरदार वल्लभभाई पटेल के समय से शुरू हुआ था।
उन्होंने अहमदाबाद नगर पालिका के अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल में इस दिशा में कदम उठाए थे।
सांसद ने आगे कहा कि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' की भावना इसी विचार को दर्शाती है, जिसके तहत महिलाओं को संसद और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। यह कानून शासन-प्रशासन, नीति-निर्माण, शिक्षा और सुरक्षा से जुड़े निर्णयों में महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करेगा।
सांसद मंजू शर्मा ने कहा कि यह कानून महिलाओं को 'विकसित भारत' के सपने को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए सशक्त करेगा। उन्होंने महिलाओं से इस अभियान में भाग लेकर इस कानून के प्रति अपने समर्थन को प्रदर्शित करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का मानना है कि देश की सच्ची प्रगति तभी संभव है जब हर क्षेत्र में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी हो। महिलाएं हमेशा से समाज में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती रही हैं और अब वे हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए शुरू की गई कई कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी साझा की।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 2014 से अब तक महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए अद्वितीय प्रयास किए गए हैं।
उन्होंने 'प्रधानमंत्री जन धन योजना', 'नमो ड्रोन दीदी योजना' और 'लखपति दीदी' जैसे प्रमुख अभियानों का उल्लेख किया, जिन्होंने महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे अभियानों के जरिए लिंगानुपात में सुधार हुआ है, जबकि 'स्वच्छ भारत मिशन' के अंतर्गत घरों में शौचालय बनवाने से महिलाओं को सम्मान मिला है।
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि 'प्रधानमंत्री आवास योजना' के तहत घर महिलाओं के नाम पर पंजीकृत किए जाते हैं, और 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' के तहत उन्हें खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराया गया है।
राजस्थान में 20 लाख से अधिक महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे 16 लाख से अधिक महिलाएं 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं। इसके अलावा, लाडो प्रोत्साहन योजना से 650,000 से अधिक बच्चियों को लाभ मिला है। 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना' के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता को 5,000 रुपये से बढ़ाकर 6,500 रुपये कर दिया गया है, जिससे लगभग 400,000 महिलाओं को लाभ पहुंचा है।
उप-मुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कहा कि शासन का मूल महिलाओं का सशक्तिकरण है। उन्होंने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को एक ऐतिहासिक सुधार बताया, जो आजादी के बाद पहली बार संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करता है।
यह कानून एक बड़ा सामाजिक परिवर्तन लाएगा, क्योंकि यह नीति-निर्माण और शासन में महिलाओं के दृष्टिकोण को प्राथमिकता देगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री मंजू बाघमार, सांसद मंजू शर्मा और प्रधान सचिव पूनम सहाय के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिलाओं और छात्रों ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के समर्थन में एक हस्ताक्षर अभियान में भाग लिया।