महिला आरक्षण बिल और परिसीमन: पश्चिम बंगाल को बांटने की एक नई साजिश का खुलासा
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण बिल पर ममता बनर्जी के तीखे आरोप।
- पश्चिम बंगाल को बांटने की साजिश का खुलासा।
- केंद्रीय गृह मंत्री पर भी निशाना साधा गया।
- चुनाव के समय हिंसा का बढ़ना चिंता का विषय।
- भाजपा की राजनीति पर सवाल उठाए गए।
कोलकाता, १६ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण संशोधन बिल के साथ जोड़े गए परिसीमन के प्रावधान राज्य को फिर से विभाजित करने की एक साजिश हैं।
मुख्यमंत्री ने कूचबिहार जिले के माथाभांगा में एक चुनावी रैली में कहा, ''महिला आरक्षण संशोधन बिल के साथ परिसीमन के प्रावधान क्यों पेश किए गए हैं? यह पश्चिम बंगाल को फिर से बांटने का एक और प्रयास है। इसके तहत मतदाता सूची से नाम हटाने और राज्य में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर लागू करने की योजना भी है।''
बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, ''हाल ही में उनके बयान में अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें बाहर निकालने की बात की गई थी।''
उन्होंने कहा, ''किसी ने यह नहीं माना कि पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए गए थे। चुनाव के बाद जो लोग राज्य से लोगों को बाहर भेजने की बातें कर रहे हैं, उन्हें खुद डिटेंशन कैंप में भेजा जाएगा।''
बनर्जी ने चुनाव से पहले कूचबिहार जिले में हो रही हिंसा पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, ''हर चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में हिंसा बढ़ जाती है। मेरे पास अभी कानून-व्यवस्था का पूरा नियंत्रण नहीं है, लेकिन चुनाव के बाद मैं यह अधिकार पुनः प्राप्त कर लूंगी।''
मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा के पास न तो जनसमर्थन है और न ही मजबूत संगठन, इसलिए वे केंद्रीय एजेंसियों पर निर्भर हो रही हैं।
उन्होंने कहा, ''भाजपा के पास इतने कार्यकर्ता नहीं हैं कि हर मतदान केंद्र पर तैनात कर सकें, इसलिए वे एजेंसियों के लोगों को वहां तैनात करने की कोशिश कर रही हैं। वे बहुत सारा पैसा लेकर आई हैं।''