विश्व पशु दिवस 2026: CM धामी, CM भजनलाल समेत कई नेताओं ने पशु संरक्षण का संकल्प लिया
सारांश
मुख्य बातें
विश्व पशु दिवस के अवसर पर 4 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित कई वरिष्ठ राजनेताओं ने देशवासियों से पशुओं के संरक्षण, संवर्धन और उनके प्रति करुणाभाव बनाए रखने का आग्रह किया। नेताओं ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी-अपनी पोस्ट के ज़रिये यह संदेश दिया।
मुख्यमंत्री धामी का संदेश
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर लिखा कि 'विश्व पशु दिवस यह संदेश देता है कि मनुष्य और पशु का सह-अस्तित्व ही प्रकृति के संतुलन और मानवता के भविष्य की सुरक्षा का आधार है।' उन्होंने कहा कि पशुओं का संरक्षण करना, उनके प्रति करुणा दिखाना और उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान करना प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक दायित्व और मानवीय कर्तव्य है। धामी ने यह भी उल्लेख किया कि उनकी सरकार विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठा रही है।
राजस्थान और अन्य नेताओं की अपील
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपनी एक्स पोस्ट में कहा कि 'पशुओं के संरक्षण, संवर्धन और उनके प्रति करुणा भाव बनाए रखने का दृढ़ संकल्प लेकर एक संवेदनशील समाज के निर्माण में सहभागिता सुनिश्चित करें।' बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भी एक्स पर पशु क्रूरता की रोकथाम पर ज़ोर देते हुए संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की।
अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल दिनेश शर्मा ने एक्स पर जीव-जंतुओं के प्रति संवेदना एवं कल्याण की भावना रखने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। इसी क्रम में हरियाणा भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी एक्स पोस्ट में कहा कि 'करुणा ही मानवता की पहचान है' और प्रकृति का संतुलन तभी कायम रहेगा जब हर जीव के प्रति हमारा व्यवहार प्रेम और ज़िम्मेदारी से भरा हो।
विश्व पशु दिवस का इतिहास
गौरतलब है कि विश्व पशु दिवस की नींव कुत्ते विशेषज्ञ हेनरिक ज़िम्मरमैन ने रखी थी। उन्होंने 24 मार्च 1925 को जर्मनी के बर्लिन स्थित स्पोर्ट पैलेस में पहले विश्व पशु दिवस का आयोजन किया, जिसमें 5,000 से अधिक लोग शामिल हुए। यह आयोजन मूल रूप से 4 अक्टूबर को निर्धारित था, ताकि यह पशुओं के संरक्षक संत सेंट फ्रांसिस ऑफ असीसी के पर्व दिवस के साथ मेल खाए, लेकिन उस वर्ष आयोजन स्थल उपलब्ध न होने के कारण तिथि बदलनी पड़ी। 1929 में पहली बार इस आयोजन को 4 अक्टूबर को स्थानांतरित किया गया और तब से यही तारीख निश्चित है।
आम जनता पर असर और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में शहरीकरण और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में वृद्धि दर्ज की जा रही है। नेताओं के इन संदेशों को केवल औपचारिक शुभकामना नहीं, बल्कि नागरिकों को जागरूक करने के प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि पशु संरक्षण के प्रति सामाजिक संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए नीतिगत कदमों के साथ-साथ जन-भागीदारी भी उतनी ही ज़रूरी है।