क्या योगी सरकार की नीतिगत स्पष्टता से उत्तर प्रदेश पर वैश्विक कंपनियों का भरोसा बढ़ा है?
सारांश
Key Takeaways
- उत्तर प्रदेश में जीसीसी की स्थापना से रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।
- योगी सरकार की नीतियों ने निवेशकों का विश्वास जीता है।
- स्थायी औद्योगिक ढांचे को प्राथमिकता दी जा रही है।
- प्रदेश में स्थायी विकास को बढ़ावा मिल रहा है।
- कम विकसित क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
लखनऊ, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश की तेजी से विकसित अवसंरचना ने वैश्विक कंपनियों को दीर्घकालिक निवेश के लिए अपनी ओर आकर्षित करना शुरू कर दिया है। यह प्रदेश ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के लिए एक उभरता हुआ गंतव्य बन गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में, उत्तर प्रदेश पिछले नौ वर्षों में ज्ञान और सेवा आधारित अर्थव्यवस्था की ओर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश वैश्विक कंपनियों का एक प्रमुख केंद्र बन जाएगा। प्रदेश में 1000 से अधिक जीसीसी स्थापित करने का लक्ष्य है, जिससे पांच लाख से अधिक युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
योगी सरकार ने जीसीसी नीति 2024 के माध्यम से नीतिगत स्पष्टता और दीर्घकालिक दृष्टिकोण को अपनाया है, जिससे वैश्विक कंपनियों की चिंताओं का समाधान हुआ है। नियमों की अनिश्चितता और प्रक्रियाओं में देरी जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, प्रदेश सरकार ने एक स्पष्ट ढांचा तैयार किया है। इससे निवेशकों को नियम, शर्तें और दायित्व समझ में आ रहे हैं, जिससे भरोसे का वातावरण बना है और निर्णय लेने की गति तेज हुई है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में लगभग 90 जीसीसी कार्यरत हैं।
भूमि आधारित प्रोत्साहन ने निवेश की प्रारंभिक लागत को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार का मानना है कि जब निवेशक को शुरुआत में संरचनात्मक समर्थन मिलेगा, तो वह लंबे समय तक प्रदेश से जुड़े रहेंगे। इसीलिए अस्थायी ऑफिस या किराए की व्यवस्था के बजाय स्थायी औद्योगिक ढांचे को प्राथमिकता दी जा रही है।
यह मॉडल प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य को सुदृढ़ और स्थिर बनाने में सहायक सिद्ध हो रहा है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं है, बल्कि इसके समयबद्ध क्रियान्वयन पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए जवाबदेही सुनिश्चित की गई है, ताकि परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकें। अब निवेशकों के लिए उत्तर प्रदेश एक परिणाम देने वाला राज्य बन चुका है।
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के माध्यम से प्रदेश में हाई वैल्यू रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, डेटा और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव प्राप्त हो रहा है। इससे ना केवल प्रदेश की मानव संसाधन क्षमता मजबूत होगी, बल्कि प्रतिभा पलायन की प्रवृत्ति पर भी नियंत्रण संभव होगा। विशेष रूप से कम विकसित क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित कर सरकार क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने का प्रयास कर रही है। जब वैश्विक कंपनियां इन क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगी तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।