रामदास आठवले: युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने की आवश्यकता
सारांश
Key Takeaways
- युद्ध विराम को दो हफ्तों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।
- हिंसा का अंत होना चाहिए।
- भारत सरकार की भूमिका शांति की वकालत करने वाली है।
- आठवले ने राज्यपाल को बाबासाहेब आंबेडकर के समारोह के लिए आमंत्रित किया।
- दलितों और वंचितों के लिए 5-सूत्रीय मांग पत्र प्रस्तुत किया गया।
मुंबई, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे दो सप्ताह के संघर्ष-विराम को केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने एक सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह युद्ध विराम केवल दो हफ्तों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त किया जाना चाहिए।
मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री आठवले ने कहा कि मुझे विश्वास है कि भारत सरकार की भूमिका, विशेषकर प्रधानमंत्री मोदी की, हमेशा संघर्ष-विराम और शांति की वकालत करने वाली रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुद्दे पर कई देशों के साथ बातचीत की थी। ट्रंप द्वारा प्रस्तावित दो सप्ताह का युद्ध विराम केवल इसी अवधि तक सीमित नहीं रहना चाहिए। हिंसा का अंत होना चाहिए और युद्ध को समाप्त करना अति आवश्यक है।
केंद्रीय राज्य मंत्री आठवले ने बुधवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि राज्यपाल का त्रिपुरा से होना उनकी पुरानी जान-पहचान को दर्शाता है। यह उनके लिए गर्व की बात है कि उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। उन्हें राजनीतिक और सामाजिक मामलों की गहरी समझ है, साथ ही आदिवासी और दलित मुद्दों पर भी उनकी अच्छी जानकारी है। मैं आज यहां रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया की ओर से उन्हें राज्यपाल का पदभार संभालने पर बधाई देने आया था।
इस मुलाकात के दौरान, मैंने राज्यपाल को बोधिसत्व डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा स्थापित 'पीपल्स एजुकेशन सोसाइटी' के 80वें स्थापना दिवस और 'भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर पुरस्कार 2026' समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। साथ ही, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया की ओर से महाराष्ट्र के दलितों, वंचितों और शोषित वर्गों के हितों से जुड़े एक 5-सूत्रीय मांग पत्र को भी सौंपा। इसमें मुख्य रूप से झुग्गीवासियों को 500 वर्ग फीट का घर, धर्मांतरित बौद्धों को अनुसूचित जाति का दर्जा दिलाने, पदोन्नति में आरक्षण को फिर से बहाल करने, भूमिहीनों को जमीन का मालिकाना हक देने और सरकारी नौकरियों में रिक्त पदों के 'बैकलॉग' को तुरंत भरने जैसी मांगें शामिल हैं।