क्या इंडिया-जापान के बीच 2 वर्षों में 13 अरब डॉलर के 170 से अधिक एमओयू साइन हुए?

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क्या इंडिया-जापान के बीच 2 वर्षों में 13 अरब डॉलर के 170 से अधिक एमओयू साइन हुए?

सारांश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जापान दौरा दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है। 170 से अधिक एमओयू और 13 अरब डॉलर का निवेश दर्शाता है कि यह साझेदारी केवल आर्थिक संबंधों को नहीं, बल्कि औद्योगिक और मानव पूंजी को भी मजबूत करेगी। क्या यह भारत और जापान के बीच नई ऊंचाइयों का संकेत है?

Key Takeaways

  • भारत-जापान के बीच 170 से अधिक एमओयू साइन हुए हैं।
  • 13 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता।
  • प्रधानमंत्री मोदी का जापान दौरा महत्वपूर्ण है।
  • जापानी कंपनियां भारतीय एसएमई को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में शामिल कर रही हैं।
  • उद्योगों में निवेश का विस्तार भारत की आर्थिक क्षमता को बढ़ावा देगा।

नई दिल्ली, 28 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान के दौरे पर जाने वाले हैं। इससे दोनों देशों के व्यापारिक और आर्थिक संबंधों को एक महत्वपूर्ण बूस्ट मिलने की संभावना है।

भारत और जापान के द्विपक्षीय संबंध अत्यंत मजबूत हैं, और इन दो वर्षों में 170 से अधिक एमओयू साइन किए गए हैं, जिसमें 13 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है।

प्रधानमंत्री मोदी अपने जापानी समकक्ष शिगेरू इशिबा के निमंत्रण पर 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए 29-30 अगस्त तक जापान की यात्रा करेंगे।

भारत में स्टील प्लांट से लेकर ग्रामीण बायोगैस परियोजनाओं तक, भारत-जापान के बीच एमओयू सहयोग के एक नए युग के लिए सेतु का निर्माण कर रहे हैं।

'मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड' के विजन के साथ, यह साझेदारी न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र और वैश्विक स्तर पर औद्योगिक, कृषि और मानव पूंजी परिदृश्य को नया आकार देने के लिए तैयार है।

निप्पोन स्टील (एएम/एनएस इंडिया) गुजरात में 15 अरब रुपए के निवेश और आंध्र प्रदेश में 56 अरब रुपए के एकीकृत स्टील प्लांट के साथ अपने व्यवसाय का विस्तार कर रही है।

सुज़ुकी मोटर ने गुजरात में एक नए प्लांट के लिए 350 अरब रुपए और उत्पादन लाइनों के विस्तार के लिए 32 अरब रुपए के निवेश की घोषणा की है, जबकि टोयोटा किर्लोस्कर ने कर्नाटक में विस्तार के लिए 33 अरब रुपए और महाराष्ट्र में 200 अरब रुपए के निवेश के साथ एक नया प्लांट लगाने का निर्णय लिया है।

सुमितोमो रियल्टी ने रियल एस्टेट में 4.76 अरब डॉलर का निवेश किया है, जबकि जेएफई स्टील ने विद्युत इस्पात उत्पादन को मजबूत करने के लिए 445 अरब रुपए का निवेश किया है। एस्ट्रोस्केल इसरो के पीएसएलवी का उपयोग करके प्रक्षिप्त होने वाला पहला जापानी वाणिज्यिक उपग्रह है।

स्टील, ऑटोमोटिव, नवीकरणीय ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, रियल एस्टेट और एयरोस्पेस में निवेश का यह प्रसार भारत की दीर्घकालिक आर्थिक क्षमता में जापान के विश्वास को मजबूत करता है।

जापानी उद्योग साझेदारियां भारतीय लघु और मध्यम उद्यमों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में खींच रही हैं। टोक्यो इलेक्ट्रॉन, फूजीफिल्म और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स एक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण कर रहे हैं, जिसमें भारतीय एसएमई उच्च-मूल्य वाले घटकों के आपूर्तिकर्ता बनेंगे।

टोयोटा और सुजुकी की वैल्यू चेन सैकड़ों टियर 2 और 3 भारतीय एसएमई को एकीकृत करेंगी। फूजित्सु अपने वैश्विक क्षमताओं के केंद्रों में 9,000 भारतीय इंजीनियरों की भर्ती कर रहा है, जिससे आईटी से जुड़े एसएमई को बढ़ावा मिलेगा।

Point of View

दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा, जो अंततः भारतीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगा। इस प्रकार का सहयोग न केवल दो देशों के लिए, बल्कि समग्र क्षेत्र के लिए फायदेमंद है।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

भारत और जापान के बीच कितने एमओयू साइन हुए हैं?
भारत और जापान के बीच पिछले दो वर्षों में 170 से अधिक एमओयू साइन हुए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का जापान दौरा कब है?
प्रधानमंत्री मोदी का जापान दौरा 29-30 अगस्त को है।
भारत में जापान का निवेश किस क्षेत्रों में हो रहा है?
जापान का निवेश स्टील, ऑटोमोटिव, नवीकरणीय ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, और रियल एस्टेट में हो रहा है।