बिल्ली और इंसान के कैंसर में चौंकाने वाली समानताएं, नया शोध
सारांश
Key Takeaways
- बिल्लियों और इंसानों के कैंसर में समानताएं
- टीपी53 जीन की महत्वपूर्ण भूमिका
- वन हेल्थ की अवधारणा
- भविष्य में मानव कैंसर उपचार के लिए नए रास्ते
- प्रतिष्ठित जर्नल में प्रकाशन
नई दिल्ली, 21 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने यह स्पष्ट किया है कि बिल्लियों और इंसानों के बीच कैंसर से संबंधित महत्वपूर्ण समानताएं मौजूद हैं, जो कैंसर के इलाज में सहायक साबित हो सकती हैं। यह अध्ययन 19 फरवरी को प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल 'साइंस' में प्रकाशित हुआ। इसमें पालतू बिल्लियों और इंसानों के कैंसर में अद्भुत जेनेटिक समानताएं उजागर की गई हैं।
यह शोध कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ गुएल्फ के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया, जिसमें सैकड़ों बिल्लियों के विभिन्न प्रकार के ट्यूमर के डीएनए का विश्लेषण किया गया। इस अध्ययन का नेतृत्व कैंसर जीवविज्ञानी जेफ्री वुड ने किया।
अध्ययन में पाया गया कि कई महत्वपूर्ण जीन, जैसे कि टीपी53, जो इंसानों के कैंसर के नियंत्रण से जुड़े हैं, वही बिल्लियों में भी समान रूप से मौजूद हैं। यह समानता यह संकेत देती है कि कैंसर का जैविक व्यवहार कई स्तनधारी प्रजातियों में साझा किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पालतू बिल्लियां इंसानों के साथ एक समान वातावरण साझा करती हैं, जिससे उनके शरीर में विकसित होने वाले ट्यूमर मानव कैंसर को समझने का प्राकृतिक मॉडल बन सकते हैं। यही कारण है कि इस अध्ययन को वन हेल्थ या वन मेडिसिन के सिद्धांत से जोड़ा जा रहा है, जिसमें पशु और मानव स्वास्थ्य एक-दूसरे से गहराई से जुड़े होते हैं।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि बिल्लियों में पाए गए इन जेनेटिक पैटर्न के आधार पर नई दवाएं या लक्षित उपचार विकसित किए जाते हैं, तो उनका उपयोग भविष्य में मानव कैंसर के उपचार में भी किया जा सकता है। इससे दवाओं के परीक्षण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और सटीक हो सकती है।
अंतर्राष्ट्रीय मीडिया और वैज्ञानिक समुदाय ने इस अध्ययन को कैंसर शोध में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा है। साइंस जैसी प्रतिष्ठित पत्रिका में इसका प्रकाशन इस बात का संकेत है कि यह खोज वैश्विक स्तर पर गंभीर वैज्ञानिक महत्व रखती है।