अर्थ आवर: पृथ्वी की सुरक्षा के लिए एक घंटा, रात 8:30 से 9:30 बजे तक लाइट बंद करें
सारांश
Key Takeaways
- अर्थ आवर हर साल मार्च के अंतिम शनिवार को मनाया जाता है।
- यह एक घंटे के लिए बत्तियां बंद करने का आह्वान करता है।
- इसकी शुरुआत 2007 में हुई थी।
- यह अभियान वैश्विक स्तर पर फैल चुका है।
- समुदायों में सामूहिक कार्रवाई को बढ़ावा दिया जाता है।
नई दिल्ली, 28 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने वाला दुनिया का सबसे बड़ा जन आंदोलन है अर्थ आवर। इस अभियान का आयोजन हर साल मार्च के अंतिम शनिवार को किया जाता है। आज, दुनियाभर में रात 8:30 से 9:30 बजे तक इसे मनाया जाएगा।
अर्थ आवर सभी से अनुरोध करता है कि वे अपनी अनावश्यक बत्तियां बंद करें। यह मुहिम एक घंटे (60 मिनट) तक पृथ्वी के प्रति समर्पित करने का आह्वान करती है। इस दौरान, लोग सकारात्मक कदम उठाने की सलाह दी जाती है, जैसे कि बिजली बचाना, पेड़ लगाना, या पर्यावरण की सुरक्षा के लिए छोटे-छोटे कदम उठाना।
इस आंदोलन की शुरुआत 2007 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर से हुई थी। विश्व वन्यजीव कोष द्वारा प्रारंभ किया गया यह अभियान लोगों से रात में एक घंटे के लिए लाइट बंद करने का अनुरोध करता है। शुरूआत में यह केवल एक शहर तक सीमित था, जिसमें कुछ हजार लोग शामिल हुए थे, लेकिन पिछले 19 वर्षों में यह आंदोलन विश्वभर में फैल गया है। आज 190 से अधिक देशों और क्षेत्रों में लाखों लोग इस मुहिम में भाग लेते हैं।
इस आयोजन के लिए संगठन सलाह देते हैं कि रात 8:30 बजे से 9:30 बजे तक अपने घरों, दफ्तरों और सार्वजनिक स्थानों की अनावश्यक बत्तियां बंद रखें। इस वर्ष 2026 में अर्थ आवर अपनी 20वीं वर्षगांठ मना रहा है। दो दशकों से यह अभियान पृथ्वी की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास और जागरूकता का प्रतीक बन चुका है।
इस मुहिम का प्रमुख उद्देश्य केवल एक घंटे की बिजली बचाना नहीं है। इसका असली मकसद लोगों को यह समझाना है कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी ऊर्जा का सही और जिम्मेदाराना उपयोग किया जा सकता है। बिजली की बचत से कार्बन उत्सर्जन कम होता है, जो जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में सहायक होता है। एक घंटे की यह छोटी सी पहल बड़े स्तर पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है।
भारत में अर्थ आवर का प्रभाव हर साल बढ़ता जा रहा है। देश के प्रमुख शहरों में प्रसिद्ध स्मारक, सरकारी भवन, होटल, मॉल, और निजी संस्थान इस मुहिम में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। केवल लाइट बंद करने के अलावा, पर्यावरण के अनुकूल गतिविधियों, पेड़ लगाने, प्लास्टिक कम करने, और सस्टेनेबल जीवनशैली अपनाने जैसे संदेशों पर भी जोर दिया जा रहा है। सामुदायिक स्तर पर कहानी सुनाना और सामूहिक कार्रवाई को बढ़ावा दिया जा रहा है।