होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नया नियंत्रण तंत्र: PGSA बनाई, 'फ्रीडम प्रोजेक्ट' के जहाजों पर रोक
सारांश
मुख्य बातें
ईरान ने 18 मई 2025 को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना नया समुद्री नियंत्रण ढाँचा लागू करने की घोषणा की, जिसके तहत पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) नामक एक नया निकाय गठित किया गया है। यह संस्था जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले जहाजों की रियल-टाइम निगरानी करेगी और समुद्री संचालन से जुड़े अपडेट जारी करेगी। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से इसकी आधिकारिक जानकारी दी।
PGSA क्या है और इसकी भूमिका क्या होगी
पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) होर्मुज जलडमरूमध्य के समुद्री यातायात की निगरानी, संचालन-सूचनाएँ साझा करने और नए ट्रांजिट नियमों को लागू करने के लिए अधिकृत होगी। ईरान पहले ही जहाजों के लिए नई अनुमति प्रणाली के संकेत दे चुका था, और PGSA इसी ढाँचे की औपचारिक परिणति है। इस तंत्र के तहत विशिष्ट सेवाओं के लिए शुल्क भी वसूला जाएगा।
किन जहाजों पर लागू होगी यह व्यवस्था
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, ‘ईरान ने अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार सुरक्षा की गारंटी के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में यातायात प्रबंधन के लिए एक पेशेवर तंत्र तैयार किया है, जिसे जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा। इस प्रक्रिया में केवल वाणिज्यिक जहाज और ईरान के साथ सहयोग करने वाले पक्ष ही लाभान्वित होंगे।’ अजीजी के अनुसार, तथाकथित ‘फ्रीडम प्रोजेक्ट’ से जुड़े संचालनकर्ताओं के लिए यह मार्ग बंद रहेगा।
क्षेत्रीय तनाव की पृष्ठभूमि
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है। इजरायली मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी विमान बड़ी मात्रा में हथियार लेकर इजरायल पहुँचे हैं और इजरायली सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज विश्व के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है — वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुज़रता है।
वैश्विक व्यापार पर संभावित असर
होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन लाखों बैरल कच्चा तेल गुज़रता है, और नई अनुमति प्रणाली तथा शुल्क-आधारित व्यवस्था से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और तेल आयातक देशों की लागत पर असर पड़ सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार पहले से ही अस्थिर है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह नया तंत्र पूरी तरह लागू हुआ, तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
आगे क्या होगा
ईरान ने इस तंत्र का पूरा विवरण जल्द सार्वजनिक करने का वादा किया है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री समुदाय और प्रमुख तेल आयातक देशों की प्रतिक्रिया अभी आनी बाकी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अन्य देश इस नई व्यवस्था को मान्यता देते हैं या इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन मानते हैं।