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क्या जीएसटी रेट कट से सरकार पर कोई बड़ा राजकोषीय बोझ नहीं आएगा?

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क्या जीएसटी रेट कट से सरकार पर कोई बड़ा राजकोषीय बोझ नहीं आएगा?

सारांश

क्रिसिल की हालिया रिपोर्ट बताती है कि जीएसटी सुधारों से सरकार पर कोई महत्वपूर्ण वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। जानिए कैसे ये सुधार आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित करेंगे और उपभोक्ताओं के लिए क्या लाभकारी साबित हो सकते हैं।

मुख्य बातें

जीएसटी दरों में कटौती से कोई बड़ा राजकोषीय बोझ नहीं होगा।
कुल जीएसटी संग्रह 10.6 लाख करोड़ रुपए था।
18 प्रतिशत स्लैब से 70-75 प्रतिशत राजस्व आता है।
उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति में सुधार की संभावना।
कम मुद्रास्फीति और उधारी की लागत में कमी।

नई दिल्ली, 19 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। क्रिसिल की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि जीएसटी दरों को संविधान में सुधार करने से सरकार पर कोई महत्वपूर्ण राजकोषीय बोझ नहीं पड़ेगा।

सरकार ने जीएसटी के सुधारों के चलते अल्पावधि में राजस्व में 48,000 करोड़ रुपए का वार्षिक शुद्ध घाटा होने का अनुमान लगाया है।

क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में कुल जीएसटी संग्रह 10.6 लाख करोड़ रुपए था; इसलिए, यह घाटा इतना बड़ा नहीं लगता।

रिपोर्ट में इस बात पर विशेष बल

इसमें कहा गया है, "वित्त वर्ष 2024 तक, जीएसटी राजस्व का 70 से 75 प्रतिशत हिस्सा 18 प्रतिशत स्लैब से आया। केवल 5-6 प्रतिशत 12 प्रतिशत स्लैब से और 13-15 प्रतिशत 28 प्रतिशत स्लैब से आया।"

वस्तुओं के टैक्स दर को 12 प्रतिशत से कम करने से राजस्व में कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा।

इस बीच, मोबाइल टैरिफ शुल्क जैसी कई तेजी से बढ़ती सेवाओं पर कर की दरें अपरिवर्तित हैं।

ई-कॉमर्स डिलीवरी जैसी नई सेवाओं को भी जीएसटी के दायरे में लाया गया है और उन पर 18 प्रतिशत कर लगाया गया है और अन्य जन उपभोग की वस्तुओं पर लाभ के कारण प्रयोज्य आय में कुछ वृद्धि से उनकी मांग और कर संग्रह में वृद्धि हो सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है, "उच्च आय वर्ग से प्रीमियम मांग बरकरार रह सकती है, जिससे राजस्व को बढ़ावा मिल सकता है।"

इसके अलावा, जीएसटी सुधार से अधिक वस्तु और सेवाएं औपचारिक दायरे में आ सकती हैं, जिससे मध्यम अवधि में कर वृद्धि को बढ़ावा मिल सकता है।

हालांकि उपभोग पर इसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि जीएसटी में कटौती का असर उपभोक्ता कीमतों पर कितनी तेजी और किस हद तक पड़ता है, लेकिन आवश्यक वस्तुओं पर कर कटौती से क्रय शक्ति बढ़ सकती है, जिससे उपभोग को धीरे-धीरे व्यापक बढ़ावा मिल सकता है।

इस वित्त वर्ष में उपभोग के लिए अन्य वृहद सकारात्मक पहलू भी हैं, जैसे कम मुद्रास्फीति, उधारी की लागत में कमी, इस साल की शुरुआत में सरकार द्वारा घोषित आयकर राहत और बेहतर कृषि।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि जीएसटी सुधारों के माध्यम से सरकार की वित्तीय स्थिति पर बड़ा दबाव नहीं बनेगा। यह कदम न केवल अर्थव्यवस्था को स्थिर रखेगा बल्कि उपभोक्ताओं के लिए भी राहत का काम करेगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या जीएसटी दरों में कटौती से सरकार को नुकसान होगा?
क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी दरों में कटौती से सरकार को कोई बड़ा राजकोषीय बोझ नहीं पड़ेगा।
जीएसटी सुधारों के क्या लाभ हैं?
जीएसटी सुधारों से उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति बढ़ सकती है और अर्थव्यवस्था में सकारात्मक प्रभाव दिख सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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