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क्या 27 की उम्र में खत्म हो गया इस क्रिकेटर का करियर, आखिरी टेस्ट में लिए थे 10 विकेट?

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क्या 27 की उम्र में खत्म हो गया इस क्रिकेटर का करियर, आखिरी टेस्ट में लिए थे 10 विकेट?

सारांश

प्रज्ञान ओझा, एक प्रतिभाशाली बाएं हाथ के स्पिनर, ने 27 की उम्र में अपने करियर को समाप्त होते देखा। जानें कैसे उनके अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। उनके करियर की अनकही कहानी और अंतिम टेस्ट में लिए गए 10 विकेट के बारे में विस्तार से पढ़ें।

मुख्य बातें

प्रदर्शन सबसे महत्वपूर्ण मानक है भारतीय क्रिकेट में।
प्रज्ञान ओझा ने 10 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया।
उनका अंतिम टेस्ट सचिन तेंदुलकर के आखिरी टेस्ट के साथ हुआ।
ओझा ने अपनी प्रतिभा के बल पर विभिन्न फॉर्मेट में खेला।
बीसीसीआई में उनकी वापसी की संभावनाएँ हैं।

नई दिल्ली, 4 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय क्रिकेट टीम में स्थान बनाए रखने के लिए प्रदर्शन सबसे महत्वपूर्ण मानक है। निरंतरता बनाए रखते हुए खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बने रहते हैं, लेकिन कुछ क्रिकेटरों के साथ ऐसा नहीं होता। अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उन्हें अगले ही मैच में ड्रॉप कर दिया जाता है। बाएं हाथ के स्पिनर प्रज्ञान ओझा के साथ भी ऐसा ही हुआ।

प्रज्ञान ओझा का जन्म 5 सितंबर 1986 को भुवनेश्वर, ओडिशा में हुआ था। उन्होंने 10 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया और 2008 में बांग्लादेश के खिलाफ वनडे में अंतर्राष्ट्रीय पदार्पण किया। 2009 में उन्होंने टेस्ट और टी20 में डेब्यू किया। उस समय टीम में जगह बनाना और बनाए रखना काफी चुनौतीपूर्ण था। ओझा की प्रतिस्पर्धा अनुभवी खिलाड़ियों जैसे हरभजन सिंह और युवा खिलाड़ियों अश्विन और जडेजा से थी।

फिर भी, ओझा ने अपनी प्रतिभा के बल पर तीनों फॉर्मेट में खेलने का अवसर लगातार प्राप्त किया और शानदार प्रदर्शन किया। 2008 से 2013 के बीच उन्होंने 24 टेस्ट में 113 विकेट, 18 वनडे में 21 विकेट और 6 टी20 में 10 विकेट लिए।

2013 में, 14 से 18 नवंबर के बीच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत और वेस्टइंडीज के बीच दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला का अंतिम टेस्ट खेला गया। यह सचिन तेंदुलकर का आखिरी टेस्ट था, जिसमें भारत ने 126 रन से जीत हासिल की। इस मैच में प्रज्ञान ओझा ने दोनों पारियों में 5-5 विकेट लेकर कुल 10 विकेट लिए और प्लेयर ऑफ द मैच बने। इस मैच के बाद ओझा का करियर ऊंचाई पर जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 27 साल के प्रज्ञान ओझा के लिए यह भी अंतिम टेस्ट साबित हुआ।

2008 से 2015 के बीच उन्होंने 92 आईपीएल मैचों में 89 विकेट लिए। 21 फरवरी 2020 को उन्होंने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास ले लिया।

एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रज्ञान ओझा की बीसीसीआई में चयनकर्ता के रूप में वापसी होने वाली है। उन्हें दक्षिण क्षेत्र से भारतीय पुरुष टीम की चयन समिति का सदस्य बनाया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि भारतीय क्रिकेट में प्रदर्शन को ही सबसे अहम माना जाता है। प्रज्ञान ओझा की कहानी हमें यह सिखाती है कि कभी-कभी अच्छे प्रदर्शन के बावजूद भी क्रिकेटरों को अवसरों की कमी का सामना करना पड़ता है। यह भारतीय क्रिकेट की प्रतिस्पर्धात्मकता का एक और उदाहरण है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रज्ञान ओझा ने कब अपना करियर शुरू किया?
प्रज्ञान ओझा ने 10 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया था।
उनका अंतिम टेस्ट कब हुआ?
उनका अंतिम टेस्ट 14 से 18 नवंबर 2013 के बीच हुआ।
ओझा ने कितने विकेट लिए थे अपने अंतिम टेस्ट में?
उन्होंने अपने अंतिम टेस्ट में दोनों पारियों में 5-5 विकेट लेकर कुल 10 विकेट लिए।
क्या प्रज्ञान ओझा की वापसी हो रही है?
जी हाँ, रिपोर्ट्स के अनुसार उन्हें बीसीसीआई में चयनकर्ता के रूप में वापसी करने की संभावना है।
ओझा का आईपीएल में प्रदर्शन कैसा रहा?
2008 से 2015 के बीच उन्होंने 92 आईपीएल मैचों में 89 विकेट लिए।
राष्ट्र प्रेस
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