क्या इरफान पठान ने 4 जनवरी को लिया था क्रिकेट से संन्यास?
सारांश
Key Takeaways
- इरफान पठान का जन्म 27 अक्टूबर 1984 को बड़ौदा में हुआ।
- उन्होंने 4 जनवरी 2020 को क्रिकेट से संन्यास लिया।
- उनका करियर चोटों और फॉर्म में गिरावट से प्रभावित रहा।
- उन्होंने 29 टेस्ट मैचों में 100 विकेट लिए।
- टी20 विश्व कप 2007 में भारतीय टीम का हिस्सा रहे।
नई दिल्ली, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय क्रिकेट टीम के लिए इरफान पठान को एक ऐसे खिलाड़ी के रूप में याद किया जाता है जिनका करियर उनकी असली क्षमता के अनुरूप नहीं था। कपिल देव के बाद, इरफान को भारतीय टीम का सबसे प्रभावशाली तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर माना जाता है। संन्यास के बाद वह क्रिकेट कमेंटेटर और विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं।
इरफान पठान का जन्म 27 अक्टूबर 1984 को बड़ौदा में हुआ था। उनके बड़े भाई युसूफ पठान भी क्रिकेटर हैं, जिससे क्रिकेट का जादू इरफान पर बचपन से ही छाया रहा। बाएं हाथ से स्विंग गेंदबाजी करने वाले और बाएं हाथ के सक्षम बल्लेबाज इरफान ने 2003 में केवल 19 साल की उम्र में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ डेब्यू किया।
डॉक्यूमेंटेशन के बाद, इरफान को सभी तीन प्रारूपों में लगातार खेलने का अवसर मिला। गेंदबाजी के साथ-साथ, कोच ग्रेग चैपल ने उन्हें बल्लेबाज के रूप में भी चांस दिए। इरफान 2007 में टी20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे। 2008 के बाद, चोटों और फॉर्म में गिरावट के कारण उन्हें टीम से बाहर रहना पड़ा। उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच अक्टूबर 2012 में हुआ, जो एक टी20 था। इसके बाद उन्हें फिर से भारतीय टीम में शामिल होने का मौका नहीं मिला।
अपने करियर के प्रारंभिक दिनों में वसीम अकरम जैसे दिग्गजों को अपनी स्विंग गेंदबाजी से प्रभावित करने वाले इरफान पठान ने 4 जनवरी 2020 को क्रिकेट से संन्यास लिया।
2003 से 2012 के बीच, इरफान ने 29 टेस्ट में 100 विकेट और 1 शतक, 6 अर्धशतक सहित 1,105 रन बनाए। उन्होंने 120 वनडे में 5 अर्धशतक के साथ 1,544 रन बनाए और 173 विकेट लिए। वहीं, 24 टी20 मैचों में उन्होंने 172 रन बनाते हुए 28 विकेट भी लिए।
इरफान पठान का उदय एक बड़े पॉस्टर बॉय के रूप में हुआ था। फैंस, विज्ञापन, और स्टारडम सब कुछ जल्दी ही उनके पास आ गया, लेकिन उनके करियर का अंत एक साधारण क्रिकेटर के तौर पर हुआ। फिर भी, एक गेंदबाज के रूप में उनके प्रारंभिक दिनों में दिखाई गई क्षमता के लिए उनका नाम भारतीय क्रिकेट में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है।