क्या अटल और मालवीय का जीवन देश सेवा को समर्पित था? : वीरेंद्र सचदेवा
सारांश
Key Takeaways
- अटल बिहारी वाजपेयी और मदन मोहन मालवीय का जीवन देश सेवा को समर्पित था।
- इनकी शिक्षाएं आज भी हमें प्रेरित करती हैं।
- राजनाथ सिंह ने उनके आदर्शों पर प्रकाश डाला।
- यह आयोजन भारतीय लोकतंत्र की गरिमा को दर्शाता है।
- भविष्य की पीढ़ियों को प्रेरणा मिलेगी।
नई दिल्ली, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली में शनिवार को एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक अवसर देखने को मिला, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिल्ली विधानसभा परिसर में भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी और भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय के चित्रों का अनावरण किया। इस कार्यक्रम में इन दोनों महान विभूतियों के राष्ट्र के प्रति योगदान, उनके आदर्शों और लोकतांत्रिक मूल्यों को याद किया गया। इस अवसर पर भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि अटल और मालवीय का जीवन देश सेवा को समर्पित था।
वीरेंद्र सचदेवा ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया कि दिल्ली विधानसभा परिसर में आज का दिन बेहद ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ऐसी महान हस्तियां थीं, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन देश की सेवा में समर्पित कर दिया।
सचदेवा ने बताया कि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में दोनों नेताओं के आदर्शों, मूल्यों, राजनीतिक शिष्टाचार और गरिमा पर विस्तार से प्रकाश डाला, जिसे उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में बनाए रखा। उन्होंने इस आयोजन के लिए दिल्ली सरकार और दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को बधाई दी।
भाजपा नेता रमेश बिधूड़ी ने भी इस अवसर को भारतीय लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि मदन मोहन मालवीय और अटल बिहारी वाजपेयी दोनों को भारत रत्न से सम्मानित किया गया था और दोनों ने भारत की राजनीतिक यात्रा में अमूल्य योगदान दिया।
रमेश बिधूड़ी ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से ही नहीं, बल्कि उससे पहले भी पंडित मदन मोहन मालवीय ने नि:स्वार्थ भाव से अपना पूरा जीवन लोकतंत्र, शिक्षा और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में अटल बिहारी वाजपेयी और मदान मोहन मालवीय के जीवन से जुड़े कई प्रेरक उदाहरण साझा किए।
रमेश बिधूड़ी ने विशेष रूप से पंडित मदन मोहन मालवीय के शिक्षा क्षेत्र में योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा को एक नई दिशा दी और यह स्पष्ट किया कि शिक्षा के माध्यम से ही देश प्रगति कर सकता है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी महान विभूतियों के चित्र और स्मृतियां लोकतंत्र के मंदिरों में स्थापित की जाएंगी, तो आने वाली पीढ़ियों को उनसे प्रेरणा मिलेगी। केवल अतीत को स्मरण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके जीवन मूल्यों को अपनाकर आगे बढ़ना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी, और इसके लिए उनका सम्मान किया जाना बेहद आवश्यक है।