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क्या भारतीय सेना ने श्रीलंका में सड़क संपर्क बहाल किया?

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क्या भारतीय सेना ने श्रीलंका में सड़क संपर्क बहाल किया?

सारांश

भारतीय सेना ने श्रीलंका में चक्रवात के कारण प्रभावित सड़क संपर्क को पुनर्स्थापित कर दिया है, जिससे यात्रा का समय आधा हो गया है। यह पहल 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत की गई है। जानें इस महत्वपूर्ण कार्य के बारे में और किस प्रकार सेना ने प्रभावित क्षेत्रों में सहायता प्रदान की।

मुख्य बातें

भारतीय सेना ने श्रीलंका में सड़क संपर्क को बहाल किया।
यात्रा का समय आधा हो गया है।
चक्रवात के बाद राहत कार्य में तेजी आई है।
सेना ने कुशल इंजीनियर्स की मदद से पुल निर्माण किया।
भारत और श्रीलंका के बीच सहयोग मजबूत हुआ है।

नई दिल्ली, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय सेना ने श्रीलंका में कई जर्जर सड़क मार्गों को एक बार फिर से वाहनों की आवाजाही के लिए सुधारा है। यह पहल ‘नेबरहुड फर्स्ट’ की नीति और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना के अनुरूप है। हाल ही में श्रीलंका में आए भयंकर चक्रवात के कारण भारी आपदा आई थी, जिसने जाफना सहित कई क्षेत्रों में आवागमन और सड़क संपर्क को बुरी तरह प्रभावित किया था। भारतीय सेना ने इन क्षेत्रों में सड़क संपर्क पुनर्स्थापित करने का कार्य किया है।

भारतीय सेना के इंजीनियर्स, ऑपरेशन सागर बंधु के तहत श्रीलंका को लगातार मानवीय सहायता प्रदान कर रहे हैं। इस अभियान में भारतीय सेना, श्रीलंकाई सेना और रोड डेवलपमेंट अथॉरिटी (आरडीए) के साथ समन्वय में बाधित संचार मार्गों को पुनर्स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

भारतीय सेना ने जाफना क्षेत्र में ए-35 राजमार्ग पर 120 फीट लंबे दोहरी कैरिजवे बेली ब्रिज का सफल निर्माण किया है। इसके बाद, बी-492 राजमार्ग पर 100 फीट लंबा बेली ब्रिज भी बनाया गया है, जिससे कैंडी और बदुल्ला के बीच महत्वपूर्ण सड़क संपर्क पुनः स्थापित हो गया है।

चक्रवात जनित भूस्खलनों और मौजूदा पुलों के ध्वस्त हो जाने के कारण यह मार्ग गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था, जिससे यात्रियों को चार घंटे तक का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा था। भारतीय सेना के 24 कुशल ब्रिजिंग विशेषज्ञों की एक टीम ने रविवार को पुल निर्माण कार्य प्रारंभ किया और प्रतिकूल मौसम के बावजूद मात्र 1 दिन में इसे सफलतापूर्वक पूरा किया।

सेना ने बताया कि इस पुल के बन जाने से अंतर-प्रांतीय यातायात सुचारू हो गया है। अब कैंडी से बदुल्ला की यात्रा का समय चार घंटे से घटकर दो घंटे रह गया है, जिससे महत्वपूर्ण समय की बचत हुई है। राहत सामग्री, मशीनरी, और आवश्यक सेवाओं की त्वरित आवाजाही सुनिश्चित हो गई है, जिससे प्रभावित समुदायों के लिए सामान्य स्थिति की बहाली में भी मदद मिली है।

सेना ने कहा कि पुल बनाने से पहले पुल के दोनों किनारों की भार-वहन क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक सुदृढ़ीकरण कार्य किए गए। इंजीनियर टास्क फोर्स द्वारा सटीक स्थल आकलन और सतत निगरानी के लिए स्वदेशी रूप से विकसित ड्रोन, लेजर रेंज फाइंडर (एलआरएफ), और उन्नत टोही उपकरणों का प्रभावी उपयोग किया गया, जिससे निर्माण की सटीकता और कार्यकुशलता में वृद्धि हुई।

श्रीलंका की सहायता के लिए शुरू किया गया ऑपरेशन सागर बंधु भारत की मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में भूमिका का सशक्त प्रमाण है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह न केवल प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत प्रदान करती है, बल्कि देशों के बीच आपसी सहयोग को भी मजबूत करती है। भारतीय सेना का यह कदम न केवल श्रीलंका के साथ भारत के संबंधों को और मजबूत करता है, बल्कि प्रभावित लोगों के जीवन में भी सुधार लाता है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय सेना ने श्रीलंका में क्या कार्य किया?
भारतीय सेना ने श्रीलंका में चक्रवात के कारण प्रभावित सड़क संपर्क को बहाल किया है, जिससे यात्रा का समय आधा हो गया है।
इस पहल का उद्देश्य क्या है?
इस पहल का उद्देश्य 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत मानवीय सहायता प्रदान करना और प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य करना है।
भारतीय सेना ने कितने पुल बनाए हैं?
भारतीय सेना ने जाफना क्षेत्र में 120 फीट और 100 फीट लंबे दो बेली ब्रिज का निर्माण किया है।
इससे यात्रा का समय कैसे प्रभावित हुआ?
कैंडी से बदुल्ला की यात्रा का समय चार घंटे से घटकर दो घंटे रह गया है।
ऑपरेशन सागर बंधु क्या है?
ऑपरेशन सागर बंधु भारत द्वारा श्रीलंका में मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है।
राष्ट्र प्रेस
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