क्या गांव में सीखे कुश्ती के दांव-पेंच आज पीकेएल के 'स्टार' कप्तान आशु मलिक हैं?

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क्या गांव में सीखे कुश्ती के दांव-पेंच आज पीकेएल के 'स्टार' कप्तान आशु मलिक हैं?

सारांश

भारत के प्रमुख कबड्डी खिलाड़ी आशु मलिक ने प्रो कबड्डी लीग के जरिए अपनी खास पहचान बनाई है। जानें कैसे उन्होंने अपने गांव से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सफलता की सीढ़ियां चढ़ी हैं।

मुख्य बातें

आशु मलिक ने गांव से शुरू कर प्रो कबड्डी लीग तक का सफर तय किया।
उनकी रेडिंग क्षमता और फिटनेस अद्वितीय हैं।
आशु का मानना है कि अनुशासन और मेंटल हेल्थ महत्वपूर्ण हैं।
वे युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करते हैं और उन्हें सपोर्ट करते हैं।
आशु चाहते हैं कि कबड्डी और लोकप्रिय बने।

नई दिल्ली, 30 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। भारत के प्रमुख कबड्डी खिलाड़ी आशु मलिक ने प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) के माध्यम से अपनी एक विशेष पहचान बनाई है। अपनी शानदार रेडिंग क्षमता और तेजी के लिए जाने जाने वाले आशु पीकेएल सीजन 12 में दबंग दिल्ली केसी की कप्तानी कर रहे हैं।

प्रो कबड्डी लीग के इस स्टार खिलाड़ी ने कम उम्र में ही बेहतरीन प्रदर्शन करके अपनी टीम को कई बार जीत दिलाई है। यही कारण है कि 23 वर्षीय आशु को लगातार दूसरी बार टीम की कमान सौंपी गई है।

9 जनवरी 2002 को सोनीपत जिले के खानपुर कला गांव में जन्मे आशु मलिक को कबड्डी खेलने की प्रेरणा अपने गांव से मिली, जहाँ इस खेल को बड़े शौक से खेला जाता है।

खानपुर कला गांव की कबड्डी टीम आस-पास के क्षेत्रों में बहुत प्रसिद्ध थी। आशु मलिक ने राष्ट्र प्रेस को बताया कि वह बचपन में गांव की टीम का मुकाबला देखने जाते थे। धीरे-धीरे उनकी रुचि इस खेल में बढ़ने लगी। लगभग 12 वर्ष की आयु में, आशु ने कबड्डी खेलना शुरू किया।

साल 2014 में प्रो कबड्डी लीग की शुरुआत हुई। आशु ने ठान लिया था कि उन्हें भी इसमें खेलना है। वे एक बेहतरीन रेडर थे। अपनी कौशल को निखारते हुए उन्होंने नेशनल गेम्स, फेडरेशन कप और नेशनल चैंपियनशिप जैसी कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया।

साल 2021 में आशु मलिक ने प्रोफेशनल कबड्डी में कदम रखा। इसी वर्ष उन्हें पहली बार प्रो कबड्डी लीग में खेलने का मौका मिला। सीजन 8 में आशु ने दबंग दिल्ली केसी के लिए खेलते हुए टीम को अपना पहला खिताब दिलाया। वे उस सीजन के उभरते हुए खिलाड़ियों में माने गए।

पीकेएल का 10वां सीजन आशु मलिक के लिए विशेष था। चोटिल नवीन कुमार की अनुपस्थिति में उन्होंने दबंग दिल्ली केसी के मुख्य रेडर की भूमिका निभाई। 23 मुकाबलों में 276 रेड प्वाइंट्स के साथ आशु उस सीजन के सर्वश्रेष्ठ रेडर रहे। रेडिंग में उतने ही अंक जयपुर पिंक पैंथर्स के खिलाड़ी अर्जुन देशवाल के भी थे।

आशु मलिक ने पीकेएल सीजन 10 का समापन 15 'सुपर 10' और 14 'सुपर रेड्स' के साथ किया। इसके साथ ही चार टैकल प्वाइंट्स भी प्राप्त किए, जिससे दबंग दिल्ली प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई करने में सफल रही, लेकिन खिताब नहीं जीत सकी।

साल 2024 में सीनियर नेशनल कबड्डी में गोल्ड मेडल जीत चुके आशु मलिक को लगातार दूसरे सीजन दबंग दिल्ली की कमान सौंपी गई है। सीजन 11 में उन्होंने टीम को सेमीफाइनल तक पहुँचाया था। उन्हें विश्वास है कि इस बार दबंग दिल्ली खिताब अपने नाम करेगी।

एक खिलाड़ी के रूप में, आशु मलिक अपनी फिटनेस और डाइट का खास ध्यान रखते हैं। सुबह प्रैक्टिस के बाद वे बादाम का सेवन करते हैं। उनकी डाइट में हाई कैलोरी और हाई प्रोटीन शामिल होता है। वे खानपान को लेकर अपने ट्रेनर से सलाह लेते हैं।

आशु का मानना है कि कबड्डी के खेल में अनुशासन बहुत जरूरी है। इसके साथ ही खिलाड़ी की मेंटल हेल्थ मजबूत होनी चाहिए। खिलाड़ी को अपनी फिटनेस लेवल और डाइट पर ध्यान देना चाहिए।

राकेश कुमार को अपना आदर्श मानने वाले आशु मलिक आज खुद युवा खिलाड़ियों के लिए आइडल हैं। जूनियर्स को पूरा सपोर्ट करने वाले आशु उन्हें प्रेरित करते हैं।

आशु चाहते हैं कि कबड्डी और अधिक लोकप्रिय खेल बने और गांव से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक खिलाड़ियों को अच्छा प्लेटफॉर्म मिले।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भी बताती है कि कैसे भारतीय कबड्डी का भविष्य गांवों से उभरते खिलाड़ियों के हाथों में है। उनका अनुशासन और प्रेरणा युवा खिलाड़ियों को एक नई दिशा दे रहा है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आशु मलिक ने कब कबड्डी खेलना शुरू किया?
आशु मलिक ने लगभग 12 वर्ष की आयु में कबड्डी खेलना शुरू किया।
आशु मलिक का जन्म कहाँ हुआ?
आशु मलिक का जन्म सोनीपत जिले के खानपुर कला गांव में हुआ।
आशु मलिक ने कब प्रो कबड्डी में कदम रखा?
आशु मलिक ने 2021 में प्रोफेशनल कबड्डी में कदम रखा।
आशु मलिक की डाइट में क्या शामिल होता है?
आशु की डाइट में हाई कैलोरी और हाई प्रोटीन शामिल होता है।
आशु मलिक का आदर्श कौन है?
आशु मलिक का आदर्श राकेश कुमार हैं।
राष्ट्र प्रेस
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