तेहरान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने कहा: युद्ध को रोकना आवश्यक है
सारांश
Key Takeaways
- मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ रहा है।
- ईरान की स्थिति गंभीर है, नागरिक मारे जा रहे हैं।
- युद्ध को रोकना आवश्यक है।
- भारत और ईरान के बीच अच्छे संबंध हैं।
- मोसाद की मौजूदगी पर चिंता जताई गई है।
तेहरान, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का प्रभाव अब सम्पूर्ण विश्व पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। पहले अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर एयर स्ट्राइक, फिर जवाबी कार्रवाई, इसके बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ती तनाव की स्थिति, और खार्ग पर अमेरिका के हमले के बाद अब मामला ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों तक पहुँच गया है। दोनों पक्ष यह दावा कर रहे हैं कि वे लंबे संघर्ष के लिए तैयार हैं। इस बीच, ईरान की स्थिति को लेकर राष्ट्र प्रेस ने तेहरान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर फुआद इजादी से विशेष बातचीत की।
फुआद इजादी ने कहा, "हम इस संघर्ष में बहुत कुछ खो चुके हैं। हालात ठीक नहीं हैं। हमारे 1400 नागरिक मारे गए हैं। हर घंटे हमले हो रहे हैं। अस्पताल, स्टेडियम, स्कूल, टीवी स्टेशन, और रिहाइशी क्षेत्र—कुछ भी सुरक्षित नहीं है। तेल प्रतिष्ठानों पर हमले के कारण एसिड रेन हुई थी। पूरा तेहरान केमिकल अटैक का शिकार हुआ है। हमारे पास खुद को बचाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।"
इजादी के अनुसार, ईरान कूटनीतिक उपायों की तलाश में था और इसके लिए वह तैयार भी था। ओमानी विदेश मंत्री ने सीबीएस न्यूज से बातचीत में कहा था कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है। लेकिन फिर 24 घंटे के अंदर ही हमले शुरू हो गए। यह अमेरिका का नहीं, बल्कि इजरायल का हमला था, जो इजरायल के उकसावे पर हुआ और इसके लिए ट्रंप और नेतन्याहू दोनों जिम्मेदार हैं।
राष्ट्र प्रेस के सवाल पर कि आपको क्या लगता है अमेरिका को कितना नुकसान हुआ है?, इजादी बोले, "ईरान हमले कर रहा है और अमेरिका को नुकसान हो रहा है। ईरान की कार्रवाईें सभी जवाबी कार्रवाइयाँ थीं। हमने रिहायशी इलाकों या स्कूलों को नहीं छेड़ा, लेकिन अमेरिकी सम्पत्तियों को निशाना बनाया। जब उन्होंने बेस से सैनिकों को हटा कर होटल में रुकवाया तो हमने उस पर हमला किया। कुछ नुकसान खाड़ी देशों को हुआ, लेकिन वह अनजाने में। मिसाइल के मलबे से क्षति हुई।"
जो केंट के इस्तीफे पर पूछे गए सवाल पर प्रोफेसर ने कहा, "वे काउंटर टेररिज्म विभाग के प्रमुख थे। यहां तक कि खुफिया विभाग की निदेशक ने भी सीनेट में कहा था कि जून में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को समाप्त कर दिया था और वह इसे फिर से नहीं बना रहा। इसका मतलब है कि ट्रंप प्रशासन में ऐसे लोग हैं जो मानते हैं कि यह सही नहीं हो रहा है। ट्रंप ने 'अमेरिका फर्स्ट' का वादा किया था लेकिन वे 'इजरायल फर्स्ट' कर रहे हैं। अमेरिकी सैनिक मारे जा रहे हैं, ईरानी पीड़ित हैं, और फारस की खाड़ी के लोग भी प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा संतुष्ट नेतन्याहू ही हैं।"
इस विषम स्थिति से ईरान आखिर कैसे बाहर निकलेगा? इस सवाल का जवाब देते हुए फुआद इजादी ने कहा, "इस अवैध युद्ध को रोकने की सबसे पहले आवश्यकता है। दूसरा कदम यह होना चाहिए कि ईरानी अधिकारी सुनिश्चित करें कि यह आखिरी बार है जब ईरान पर हमला किया गया। दो परमाणु सम्पन्न देशों के बीच इस तरह का संघर्ष नहीं होना चाहिए। मौजूदा हालात में ईरान अपनी सुरक्षा और जवाबी रणनीति को और मजबूत करने पर जोर दे रहा है। सभी नुकसान की भरपाई होनी चाहिए।"
एयर डिफेंस सिस्टम के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, "ये हमेशा प्रभावी नहीं होते। सबसे जरूरी है कि इस युद्ध को रोका जाए। ईरान का 20 हजार डॉलर का मिसाइल 4 मिलियन के ड्रोन को मार गिरा रहा है।"
भारत की भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि हमारे रिश्ते ऐतिहासिक हैं। दशकों से हमारे संबंध अच्छे रहे हैं। राष्ट्रपति को पीएम मोदी ने एक कॉल किया और इसके परिणामस्वरूप भारत के जहाज पार कर गए। हमारे सांस्कृतिक संबंध मजबूत हैं। आर्थिक संबंध भी अच्छे हैं। हम सभी एक ही पृष्ठ पर हैं। ये रिश्ते बने रहें और भारत जैसे देश ऐसी गतिविधियों को रोकने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
मोसाद की मौजूदगी को लेकर पूछे गए प्रश्न पर फुआद इजादी ने कहा, "बिल्कुल हमारे यहां मोसाद के एजेंट हैं। मौजूदा युद्ध का उद्देश्य ईरान की सरकार को बदलना है। वे इस बार भी असफल होंगे। इन लोगों ने जनवरी आंदोलन में लोगों को मारा और ईरानी प्रशासन को इसका जिम्मेदार बताया है।"