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क्या अन्नू रानी की क्रिकेट मैच में पहचानी गई क्षमता ने उन्हें जैवलिन थ्रो की ऊंचाइयों तक पहुँचाया?

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क्या अन्नू रानी की क्रिकेट मैच में पहचानी गई क्षमता ने उन्हें जैवलिन थ्रो की ऊंचाइयों तक पहुँचाया?

सारांश

अन्नू रानी की कहानी प्रेरणादायक है, जो एक क्रिकेट मैच में उनकी क्षमता को पहचानने से शुरू होती है। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और संघर्ष के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया है। क्या आप जानते हैं कि वह पहली भारतीय महिला हैं, जिन्होंने वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में फाइनल तक स्थान बनाया?

मुख्य बातें

अन्नू रानी ने जैवलिन थ्रो में कई रिकॉर्ड तोड़े हैं।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है।
भाई उपेंद्र का योगदान उनके करियर में महत्वपूर्ण रहा है।
उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें सफलता दिलाई।
अन्नू रानी एक प्रेरणा स्रोत हैं युवा खिलाड़ियों के लिए।

नई दिल्ली, 27 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। अन्नू रानी भारत की एक प्रमुख जैवलिन थ्रोअर हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतियोगिताओं में देश का गौरव बढ़ाया है। अन्नू रानी पहली भारतीय महिला हैं, जिन्होंने वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में फाइनल में स्थान बनाया।

28 अगस्त 1992 को मेरठ के बहादुरपुर में एक किसान परिवार में जन्मी अन्नू के भाई उपेंद्र ने एक क्रिकेट मैच के दौरान उनकी असाधारण थ्रोइंग क्षमता को पहचाना। जब वह फील्डिंग कर रही थीं, तब उन्होंने गेंद को दूर फेंकने की अपनी क्षमता से भाई को प्रभावित किया।

उपेंद्र, जो स्वयं एक मैराथन धावक थे, अन्नू के पहले कोच बने। उन्होंने अपने पिता की नापसंदगी के बावजूद उन्हें खेत में गन्ने की छड़ियों के साथ प्रशिक्षण देना शुरू किया। अन्नू को खेल जारी रखने के लिए अपने पिता से विनती करनी पड़ी, और कई बार वह रोईं।

2010 में, अन्नू ने पेशेवर जैवलिन थ्रो की ट्रेनिंग लेनी शुरू की। 2013 में उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स के पदक विजेता काशीनाथ नाइक द्वारा आयोजित ट्रेनिंग कैंप में भाग लिया। काशीनाथ ने उन्हें खेलों से जुड़ी फिल्में देखने की सलाह दी।

2014 में, राष्ट्रीय अंतर-राज्यीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में अन्नू ने 58.83 मीटर थ्रो के साथ 14 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। उसी वर्ष, कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने 56.37 मीटर थ्रो के साथ आठवां स्थान प्राप्त किया।

2016 में, वह 60 मीटर का आंकड़ा पार करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं, लेकिन 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स में पदक जीतने से चूक गईं।

2019 में, अन्नू ने एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता और वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2019 के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।

उन्होंने 2020 टोक्यो ओलंपिक में भाग लिया और गुरमीत के बाद ओलंपिक में भाग लेने वाली दूसरी भारतीय महिला बनीं।

2023 एशियन गेम्स में अन्नू रानी ने 62.92 मीटर के थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीता। वह नीरज चोपड़ा के बाद गोल्ड जीतने वाली दूसरी भारतीय बनीं।

2024 पेरिस ओलंपिक में उन्होंने जगह बनाई, लेकिन एक बार फिर ओलंपिक पदक से चूक गईं।

साल 2024 में उन्हें जैवलिन थ्रो में उत्कृष्टता के लिए अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह हमारे देश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। उनकी मेहनत और संघर्ष ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई है। हमें गर्व है कि उन्होंने भारतीय खेलों में एक नई मिसाल कायम की है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अन्नू रानी ने कब जैवलिन थ्रो में प्रशिक्षण शुरू किया?
अन्नू रानी ने 2010 में पेशेवर जैवलिन थ्रो की प्रशिक्षण शुरू की थी।
क्या अन्नू रानी ने ओलंपिक में भाग लिया है?
हाँ, अन्नू रानी ने 2020 टोक्यो ओलंपिक में भाग लिया है।
अन्नू रानी ने कब गोल्ड मेडल जीता?
अन्नू रानी ने 2023 एशियन गेम्स में 62.92 मीटर के थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीता।
अन्नू रानी को किस पुरस्कार से सम्मानित किया गया?
उन्हें 2024 में जैवलिन थ्रो में उत्कृष्टता के लिए अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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