अरशद नदीम का एशियन गेम्स पर फोकस, पोटचेफस्ट्रूम में 2 सप्ताह की कड़ी ट्रेनिंग करेंगे
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के स्टार जैवलिन थ्रोअर अरशद नदीम ने 21 अगस्त को होने वाली लॉजेन डायमंड लीग से अपना नाम वापस ले लिया है और अब उनका पूरा ध्यान एशियन गेम्स पर केंद्रित है। पेरिस ओलंपिक 2024 में जैवलिन स्वर्ण पदक विजेता नदीम ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 77.41 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ नौवें स्थान पर रहे थे — एक ऐसा प्रदर्शन जिसने उनके प्रशंसकों और खेल विशेषज्ञों को समान रूप से निराश किया।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्टों के अनुसार, नदीम फिलहाल लाहौर के पंजाब स्टेडियम में गहन अभ्यास में जुटे हैं। इसके बाद वह दक्षिण अफ्रीका के पोटचेफस्ट्रूम जाएंगे, जहाँ वह दो सप्ताह का कड़ा प्रशिक्षण शिविर लेंगे। गौरतलब है कि नदीम इससे पहले भी दो बार पोटचेफस्ट्रूम में ट्रेनिंग कर चुके हैं, जो उनके लिए परिचित और भरोसेमंद केंद्र साबित हुआ है।
लॉजेन डायमंड लीग से नाम वापसी का असर
नदीम के इस फैसले का सीधा असर भारत-पाकिस्तान के खेल प्रेमियों पर पड़ा है। 21 अगस्त को लॉजेन में होने वाली डायमंड लीग में नीरज चोपड़ा और अरशद नदीम के बीच प्रतिस्पर्धा देखने की उम्मीद लगाए बैठे दर्शकों को निराशा हाथ लगी। यह मुकाबला दोनों देशों के खेलप्रेमियों के लिए बेहद रोमांचक होता।
कॉमनवेल्थ गेम्स में निराशाजनक प्रदर्शन
ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में डिफेंडिंग चैंपियन के रूप में उतरे नदीम पुरुष जैवलिन थ्रो फाइनल के पहले तीन राउंड के बाद शीर्ष आठ में जगह बनाने में नाकाम रहे और नौवें स्थान पर रहे। पेरिस ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता से इस स्तर के प्रदर्शन की किसी को उम्मीद नहीं थी, और इस नतीजे ने आलोचनाओं का सिलसिला शुरू कर दिया।
आगे का कार्यक्रम
दक्षिण अफ्रीका में प्रशिक्षण के बाद, नदीम के 6 से 14 सितंबर तक बुडापेस्ट में होने वाली वर्ल्ड एथलेटिक्स अल्टीमेट चैंपियनशिप में भाग लेने की उम्मीद है। इसके बाद वह एशियन गेम्स में उतरेंगे, जहाँ वह अपनी खोई हुई लय और प्रतिष्ठा दोनों वापस पाने के इरादे से मैदान में आएंगे।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
खेल विश्लेषकों के अनुसार, पोटचेफस्ट्रूम में नदीम का प्रशिक्षण चुनाव रणनीतिक है — यह उच्च ऊँचाई और अनुकूल मौसम वाला केंद्र एथलीटों को गहन तकनीकी सुधार का अवसर देता है। यह ऐसे समय में आया है जब नदीम पर अपने ओलंपिक स्तर की वापसी साबित करने का दबाव है। एशियन गेम्स उनके लिए पुनरागमन का सबसे बड़ा मंच होगा।