2 अगस्त 2026
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: अरशद नदीम के मेंटर्स का बड़ा आरोप — ट्रेनिंग छोड़ व्यापार में लगे थे ओलंपिक चैंपियन

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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: अरशद नदीम के मेंटर्स का बड़ा आरोप — ट्रेनिंग छोड़ व्यापार में लगे थे ओलंपिक चैंपियन

सारांश

पेरिस ओलंपिक के 92.97 मीटर के रिकॉर्ड थ्रोअर अरशद नदीम ग्लासगो में 77.41 मीटर के साथ नौवें स्थान पर रहे। मेंटर्स का आरोप है कि हज के बाद ट्रेनिंग छूटी, दक्षिण अफ्रीकी कोच से दूरी बनी और मियां चन्नू में व्यापारिक गतिविधियों ने ध्यान भटकाया — यह गिरावट महीनों से तय थी।

मुख्य बातें

अरशद नदीम ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के भालाफेंक फाइनल में 77.41 मीटर के थ्रो के साथ नौवें स्थान पर रहे।
स्वर्ण पदक श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरगे ने 89.75 मीटर से जीता; नीरज चोपड़ा को रजत और यश वीर सिंह को कांस्य मिला।
पूर्व मेंटर अकरम साही ने आरोप लगाया कि पेरिस ओलंपिक के बाद एक गुट ने नदीम को 'हाईजैक' कर लिया।
एक अन्य मेंटर के अनुसार नदीम ने हज के बाद ठीक से ट्रेनिंग नहीं की और दक्षिण अफ्रीकी कोच टेरसियस लिबेनबर्ग से संपर्क टूटा।
कथित तौर पर नदीम अपने गृहनगर मियां चन्नू में विवाह भवन और रेस्टोरेंट बनवा रहे हैं, जिससे उनका ध्यान खेल से भटका।
मौजूदा कोच सलमान बट की भालाफेंक विशेषज्ञता पर भी मेंटर्स ने सवाल उठाए।

पाकिस्तान के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता भालाफेंक खिलाड़ी अरशद नदीम के दो पूर्व मेंटर्स ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में उनके निराशाजनक प्रदर्शन के लिए ट्रेनिंग में कमी और व्यक्तिगत व्यावसायिक गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया है। नदीम 12 खिलाड़ियों के फाइनल में मात्र नौवें स्थान पर रहे, जो पेरिस ओलंपिक 2024 में उनके 92.97 मीटर के रिकॉर्ड थ्रो से बेहद दूर था।

मुख्य घटनाक्रम

ग्लासगो में अरशद नदीम का अभियान शुरू से ही लड़खड़ाता दिखा। क्वालिफिकेशन राउंड में उनका थ्रो 78.63 मीटर रहा, जिससे वह किसी तरह फाइनल में पहुँचे। फाइनल में उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो 77.41 मीटर रहा, जो पदक के लिए नाकाफी साबित हुआ। स्वर्ण पदक श्रीलंका के उभरते सितारे रुमेश थरंगा पथिरगे ने 89.75 मीटर के थ्रो से जीता। भारत के नीरज चोपड़ा ने रजत और यश वीर सिंह ने कांस्य पदक हासिल किया।

मेंटर्स के गंभीर आरोप

पाकिस्तान एथलेटिक्स फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष और दक्षिण एशिया एथलेटिक्स फेडरेशन के चेयरमैन अकरम साही — जिन्होंने 2018 में नदीम को आगे बढ़ने में अहम भूमिका निभाई थी — ने आरोप लगाया कि पेरिस ओलंपिक के बाद एक गुट ने नदीम को 'हाईजैक' कर लिया। उन्होंने कहा, 'नदीम के ओलंपिक स्वर्ण पदक के बाद से एक ग्रुप ने उन्हें हाईजैक कर लिया और कभी मेरे पास नहीं आने दिया।' साही ने यह भी कहा कि 'ग्लासगो में यह नतीजा किसी ऐसे व्यक्ति के लिए बहुत निराशाजनक है जो नई ऊँचाइयों पर पहुँचा है, लेकिन पिछले कई महीनों से इसके संकेत मिलने लगे थे क्योंकि लापरवाही और ट्रेनिंग की कमी थी।'

अपना नाम न बताने की शर्त पर एक अन्य मेंटर ने भी इन आरोपों की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि नदीम ने इस साल हज में व्यस्त रहने के बाद ठीक से ट्रेनिंग नहीं की। उनके अनुसार, नदीम ने अपने दक्षिण अफ्रीकी कोच टेरसियस लिबेनबर्ग और नॉर्थवेस्ट यूनिवर्सिटी पोटचेफस्ट्रूम में मिली विशेष ट्रेनिंग की बदौलत ओलंपिक गोल्ड जीता था, लेकिन इस बार वे सरकार और फेडरेशन का इंतजार करते रहे कि उन्हें दक्षिण अफ्रीका भेजा जाए।

व्यापारिक गतिविधियों पर उठे सवाल

उसी मेंटर ने बताया कि पेरिस ओलंपिक के बाद मिले पुरस्कार राशि के बाद नदीम का ध्यान व्यापार की ओर खिंच गया। कथित तौर पर वे अपने गृहनगर मियां चन्नू में एक विवाह भवन और रेस्टोरेंट का निर्माण करा रहे हैं। मेंटर ने कहा, 'एक एथलीट को ऐसे डायवर्जन की जरूरत नहीं होती।' उन्होंने यह भी कहा कि पेरिस में मिले पुरस्कार के बाद नदीम को किसी और का इंतजार करने के बजाय खुद पर निवेश करना चाहिए था।

मौजूदा कोच पर भी सवाल

मेंटर ने नदीम के मौजूदा कोच सलमान बट पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, सलमान बट मूलतः एक डिस्कस थ्रो एथलीट थे और भालाफेंक में उनकी कोई विशेषज्ञता नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब नदीम जैसे विश्वस्तरीय खिलाड़ी के लिए विशेषज्ञ कोचिंग की जरूरत और भी अधिक मानी जाती है।

आगे क्या होगा

साही ने स्वर्ण विजेता पथिरगे और यश वीर सिंह के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि यह अच्छी बात है कि पदक दक्षिण एशिया में ही रहे। दोनों मेंटर्स ने नदीम से कड़ी मेहनत और पेशेवर ट्रेनिंग पर वापस लौटने की अपील की है। गौरतलब है कि आने वाले वर्षों में विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप और लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 जैसी बड़ी प्रतियोगिताएँ नदीम की परीक्षा लेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि उन्हें खुद पर छोड़ दे।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में अरशद नदीम का प्रदर्शन कैसा रहा?
अरशद नदीम ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के भालाफेंक फाइनल में 77.41 मीटर के थ्रो के साथ 12 खिलाड़ियों में नौवें स्थान पर रहे। यह पेरिस ओलंपिक 2024 में उनके 92.97 मीटर के रिकॉर्ड थ्रो से काफी पीछे था।
अरशद नदीम के मेंटर्स ने उनके खराब प्रदर्शन के लिए क्या जिम्मेदार ठहराया?
मेंटर्स ने ट्रेनिंग में कमी, हज के बाद अभ्यास न करना, दक्षिण अफ्रीकी कोच टेरसियस लिबेनबर्ग से दूरी और मियां चन्नू में व्यापारिक गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया। पूर्व मेंटर अकरम साही ने यह भी आरोप लगाया कि पेरिस के बाद एक गुट ने नदीम को 'हाईजैक' कर लिया।
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भालाफेंक का स्वर्ण पदक किसने जीता?
श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरगे ने 89.75 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता। भारत के नीरज चोपड़ा ने रजत और यश वीर सिंह ने कांस्य पदक हासिल किया।
अरशद नदीम के मौजूदा कोच सलमान बट पर क्या सवाल उठे हैं?
एक मेंटर के अनुसार सलमान बट मूलतः एक डिस्कस थ्रो एथलीट हैं और भालाफेंक में उनकी कोई विशेष विशेषज्ञता नहीं है। मेंटर का कहना है कि इससे नदीम के प्रदर्शन पर नकारात्मक असर पड़ा है।
अरशद नदीम की पेरिस ओलंपिक जीत में किस कोच और ट्रेनिंग का योगदान था?
पेरिस ओलंपिक 2024 में अरशद नदीम की जीत में दक्षिण अफ्रीकी कोच टेरसियस लिबेनबर्ग और नॉर्थवेस्ट यूनिवर्सिटी पोटचेफस्ट्रूम में मिली विशेष ट्रेनिंग का अहम योगदान बताया जाता है। मेंटर्स का कहना है कि इस बार उस ट्रेनिंग व्यवस्था को दोहराया नहीं गया।
राष्ट्र प्रेस
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