आर्यवीर दीवान बने एशियन जूनियर स्क्वैश चैंपियन, अंडर-19 खिताब जीतने वाले चौथे भारतीय पुरुष
सारांश
मुख्य बातें
आर्यवीर दीवान ने चीन के पान्झिहुआ में आयोजित 33वीं एशियन जूनियर इंडिविजुअल स्क्वैश चैंपियनशिप में रविवार, 24 मई को लड़कों का अंडर-19 खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। दिल्ली के इस युवा खिलाड़ी ने यह उपलब्धि हासिल करने वाले चौथे भारतीय पुरुष बनने का गौरव प्राप्त किया।
फाइनल में दमदार प्रदर्शन
टूर्नामेंट में 3/4 सीड होने के बावजूद आर्यवीर ने फाइनल मुकाबले में साउथ कोरिया के जोंगह्योक ली को 11-2, 11-7, 11-9 के स्कोर से पराजित किया। यह रोमांचक मुकाबला एक घंटे से भी कम समय में निर्णायक रूप से समाप्त हो गया, जो आर्यवीर के वर्चस्व को दर्शाता है।
लगातार दो खिताब — दुर्लभ उपलब्धि
गौरतलब है कि आर्यवीर ने पिछले वर्ष इसी चैंपियनशिप में लड़कों का अंडर-17 खिताब जीता था। इस प्रकार उन्होंने लगातार दो वर्षों में अलग-अलग आयु वर्गों में एशियाई खिताब अपने नाम किए — जो जूनियर स्क्वैश सर्किट में एक विरल उपलब्धि मानी जाती है।
फेडरेशन की प्रतिक्रिया
स्क्वैश रैकेट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव साइरस पोंचा ने कहा, 'आर्यवीर का लगातार दो खिताब जीतना एक बेहद शानदार उपलब्धि है। इसमें कोई शक नहीं कि इससे उन्हें बहुत ज़्यादा आत्मविश्वास मिलेगा, क्योंकि कुछ ही महीनों में हम वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाले हैं।'
भारत का समग्र प्रदर्शन
इस चैंपियनशिप में भारत ने कुल 8 पदक — 1 स्वर्ण, 3 रजत और 4 कांस्य — जीतकर शानदार अभियान का समापन किया।
शिवेन अग्रवाल ने लड़कों के अंडर-17 फाइनल में रजत पदक हासिल किया, जहाँ उन्हें पाकिस्तान के नौमान खान से 10-12, 7-11, 2-11, 5-11 से हार का सामना करना पड़ा। लड़कियों के अंडर-17 वर्ग में अनिका दुबे को मलेशिया की हार्लीन टैन ने 9-11, 11-4, 12-10, 11-4 से हराकर स्वर्ण पदक से वंचित किया। लड़कों के अंडर-13 फाइनल में अमर्या बजाज को हांगकांग के लियुंग न्गो सान के खिलाफ 11-5, 11-8, 9-11, 10-12, 6-11 के कड़े मुकाबले में हार मिली।
कांस्य पदक विजेताओं में लड़कों के अंडर-17 वर्ग में लोकेश सुब्रमणि, लड़कों के अंडर-13 वर्ग में अभ्युदय अरोड़ा, तथा लड़कियों के अंडर-13 वर्ग में शनाया पारसरामपुरिया और दिव्यांशी जैन शामिल रहे।
आगे की राह
साइरस पोंचा के अनुसार, भारतीय दल अब वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप की तैयारी में जुट जाएगा। आर्यवीर की इस जीत से पूरे दल का मनोबल ऊँचा है और भारतीय स्क्वैश के लिए यह एक उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।