एशियन गेम्स 2026: क्विमसी डिसूजा टेकबॉल सेमीफाइनल में, पदक से बस एक जीत दूर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय टेकबॉल खिलाड़ी क्विमसी जोआकिम डिसूजा ने 18 सितंबर 2026 को नागोया सिटी हिगाशी स्पोर्ट्स सेंटर में विमेंस सिंगल्स ग्रुप ए मुकाबले में कंबोडिया की कोएम्यान डीवाई को 2-0 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया। अपने पहले एशियन गेम्स में खेल रहीं क्विमसी अब पदक से मात्र एक जीत दूर हैं — यह भारतीय टेकबॉल के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है।
ग्रुप ए में जीत का सफर
क्विमसी ने ग्रुप ए के अपने पहले मैच में जापान की युइना सकामोटो को 10-11, 12-11, 13-11 के रोमांचक स्कोरलाइन से मात दी। इसके बाद उन्होंने कोएम्यान को 12-7, 12-9 से पराजित करते हुए ग्रुप ए में अपनी स्थिति मज़बूत की और सीधे सेमीफाइनल का टिकट हासिल किया। यह प्रदर्शन किसी भी डेब्यूटेंट खिलाड़ी के लिए असाधारण माना जा सकता है।
सेमीफाइनल में इंडोनेशिया की चुनौती
अब क्विमसी का सामना सेमीफाइनल में इंडोनेशिया की इमा सुमाया से होगा। इस मुकाबले में जीत उन्हें एशियन गेम्स के पदक की गारंटी देगी — चाहे रंग कोई भी हो। गौरतलब है कि आइची-नागोया 2026 में टेकबॉल अपना एशियन गेम्स डेब्यू कर रहा है, जिससे क्विमसी की यह उपलब्धि और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
मिक्स्ड डबल्स में भी भारत का जलवा
क्विमसी ने मोहम्मद अनस इमरान बेग के साथ मिक्स्ड डबल्स में भी शानदार आगाज़ किया, ग्रुप ए के पहले मैच में फिलीपींस की जोआना अबुलेंसिया और प्रिंस अगस्टिन की जोड़ी को पराजित किया। यह भारतीय जोड़ी आगे कंबोडिया, थाईलैंड और कुवैत की जोड़ियों से भिड़ेगी।
पुरुष डबल्स जोड़ी का निराशाजनक प्रदर्शन
इसके विपरीत, डेक्लान मार्शल गोंसाल्वेस और मोहम्मद अनस इमरान बेग की पुरुष डबल्स जोड़ी — जो वियतनाम में 2024 वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक विजेता रही हैं — अपने दोनों ग्रुप मैच हार गईं। वे वियतनाम के ट्रुओंग गियांग बा और एन खोआ ले से 2-0 और रिपब्लिक ऑफ कोरिया के जुनसुक ली और ताएबीन ली से भी मात खा गए।
टेकबॉल क्या है और इसका एशियन गेम्स डेब्यू
टेकबॉल हंगरी में विकसित एक खेल है जो फुटबॉल के तत्वों को एक कर्व्ड टेबल पर टेबल टेनिस-शैली में मिलाता है। इसे फ्रीस्टाइल फुटबॉल और सेपक टकराव के मिश्रण के रूप में समझा जा सकता है। आइची-नागोया 2026 एशियन गेम्स में इस खेल के पाँच पदक स्पर्धाएं हैं — पुरुष एकल, महिला एकल, पुरुष डबल्स, महिला डबल्स और मिक्स्ड डबल्स। क्विमसी की यह यात्रा इस खेल को भारत में पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।