बैबेट डी लीडे: 'विश्व कप में पहुँच चुके हैं, अब टॉप-8 का लक्ष्य' — नीदरलैंड की कप्तान का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
नीदरलैंड महिला क्रिकेट टीम की कप्तान और विकेटकीपर बल्लेबाज बैबेट डी लीडे ने कहा है कि टी20 विश्व कप 2026 में पहुँचना सिर्फ शुरुआत है — असली लक्ष्य टॉप-8 में जगह बनाकर 2028 विश्व कप के लिए सीधा क्वालिफिकेशन हासिल करना है। ग्लोबल क्वालीफायर में सभी पाँच ग्रुप मैच जीतकर और डकवर्थ-लुईस-स्टर्न (DLS) नियम के तहत अमेरिका को हराकर नीदरलैंड ने पहली बार टी20 विश्व कप में प्रवेश किया है।
ऐतिहासिक क्वालिफिकेशन का वो भावुक पल
नेपाल के कीर्तिपुर में खेले गए निर्णायक मैच में नीदरलैंड 12 ओवर में 90/2 के स्कोर पर थी, जब बारिश ने खेल रोक दिया। DLS नियम के तहत नीदरलैंड को विजेता घोषित किया गया और टीम ने इतिहास रच दिया। बैबेट ने उस क्षण को याद करते हुए कहा, 'वो अनुभव अविश्वसनीय और भावनात्मक था। यह जीत वर्षों की मेहनत का परिणाम थी, जिसमें टीम ने लगातार सुधार किया और हर चुनौती का सामना किया।'
जश्न का दृश्य भी अनोखा था — खिलाड़ी बारिश में भीगते हुए रेन कवर पर फिसलकर खुशी मनाती दिखीं। बैबेट के अनुसार, 'यह सिर्फ एक जीत नहीं थी, बल्कि वर्षों के संघर्ष का परिणाम था।'
संघर्ष से सफलता तक: नीदरलैंड महिला क्रिकेट की कहानी
नीदरलैंड में महिला क्रिकेट को वह पहचान नहीं मिली थी जो फुटबॉल या अन्य खेलों को मिलती है। बैबेट के अनुसार, कई लोग क्रिकेट को किसी अन्य खेल से जोड़ देते थे। 2020 में टीम को पहला फुल-टाइम कोच मिला, जिसने खेल की दिशा बदल दी। इससे पहले खिलाड़ी पढ़ाई, नौकरी और क्रिकेट के बीच संतुलन बनाकर खेलती थीं।
2024 के ग्लोबल क्वालीफायर में टीम छठे स्थान पर रही और सीधे वर्ल्ड कप में जगह नहीं बना पाई। लेकिन उसी दौरान ICC ने विश्व कप में टीमों की संख्या 10 से बढ़ाकर 12 कर दी, जिससे नीदरलैंड के लिए नए द्वार खुले।
डेटा और रणनीति: इकोनॉमेट्रिक्स की छात्रा का मैदानी जादू
बैबेट डी लीडे ने 16 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा। वे इकोनॉमेट्रिक्स की छात्रा हैं और उनका विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण मैदान पर उनकी कप्तानी में साफ झलकता है। विरोधी बल्लेबाजों के स्ट्राइक जोन, गेंदबाजों के पैटर्न और मैच की परिस्थितियों का गहन अध्ययन उनकी तैयारी का अभिन्न हिस्सा है।
टीम की एक और खासियत यह है कि अधिकतर खिलाड़ी पूर्णकालिक पेशेवर नहीं हैं। कोई डॉक्टर है, कोई शोधकर्ता, कोई क्रिमिनोलॉजी की पढ़ाई कर रही है और कोई तकनीकी क्षेत्र में काम करती है। बैबेट ने कहा, 'यह संतुलन उन्हें और भी विशेष बनाता है।'
ग्रुप ए में कड़ी चुनौती, पर जज्बा अटूट
नीदरलैंड ग्रुप ए में है, जिसमें भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसी दिग्गज टीमें शामिल हैं। बैबेट का मानना है कि अनजान परिस्थितियाँ कभी-कभी फायदा भी देती हैं, क्योंकि विरोधी टीम उनके खेल को पूरी तरह नहीं समझती।
उन्होंने कहा, 'इंग्लैंड की परिस्थितियों को देखते हुए टीम खुद को तैयार मानती है, क्योंकि नीदरलैंड्स का मौसम भी काफी अनिश्चित और चुनौतीपूर्ण होता है। बारिश, हवा और सीम मूवमेंट जैसी स्थितियाँ उन्हें परिचित लगती हैं।'
प्रेरणा और भविष्य की राह
बैबेट डी लीडे ने पूर्व इंग्लिश क्रिकेटर सारा टेलर को अपनी प्रेरणा बताया और उनसे मिलकर अनुभव साझा करने की इच्छा जताई। नीदरलैंड में महिला क्रिकेट की लोकप्रियता अब धीरे-धीरे बढ़ रही है — युवा लड़कियाँ इस खेल की ओर आकर्षित हो रही हैं और खिलाड़ियों को पहले से कहीं अधिक पहचान मिल रही है।
बैबेट का संदेश स्पष्ट है: 'हम विश्व कप में पहुँच चुके हैं, लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है। आगे का रास्ता ऊपर की ओर है।' कम से कम दो मैच जीतकर टॉप-8 में जगह बनाना और 2028 विश्व कप के लिए सीधा क्वालिफिकेशन — यही उनका और उनकी टीम का अगला बड़ा सपना है।