ब्रिक्स ट्रेडिशनल गेम्स 2026: भारत के योगासन और मल्लखंब ने चीन-दक्षिण अफ्रीका को किया मंत्रमुग्ध
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद के वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 13 अक्टूबर 2026 को आयोजित पहले ब्रिक्स ट्रेडिशनल और इंडिजिनस डेमोंस्ट्रेशन गेम्स 2026 में भारत के योगासन, मल्लखंब और कलारीपयट्टू प्रदर्शनों ने चीन और दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों के प्रतिनिधिमंडलों को गहराई से प्रभावित किया। एक दिवसीय इस आयोजन में 10 देशों के करीब 160 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जहाँ मेजबान भारत की टीम में सर्वाधिक 50 प्रतिभागी शामिल थे।
आयोजन का स्वरूप और भागीदारी
यह एकल-दिवसीय उत्सव विभिन्न देशों की पारंपरिक और स्वदेशी खेल विधाओं को एक साझे मंच पर लाने का अवसर बना। प्रतिभागी देशों ने अपनी अपनी विरासत के खेल पेश किए — बेलारूस ने गोरोडकी, बोलीविया ने लुचा डे चोलिटास और टिंकू, ब्राजील ने ब्राजीलियन जिउ-जित्सु और कैपोइरा, चीन ने लायन डांस, वुशु और हेल्थ किगोंग, ईरान ने जूरखानेह, कजाकिस्तान ने तोगिजकुमालक, रूस ने सैम्बो, दक्षिण अफ्रीका ने कगाती और इंटोंगा, तथा यूएई ने अल्ताब्बाह का प्रदर्शन किया। भागीदारी के लिहाज़ से चीन ने 30, ईरान ने 22 और दक्षिण अफ्रीका ने 14 प्रतिभागी भेजे।
भारत के प्रदर्शन का प्रभाव
स्टेडियम में जमा 3,000 दर्शकों की भीड़ उस समय जोश से भर उठी जब भारत के युवा दल ने उच्च-ऊर्जा मल्लखंब प्रदर्शन किया। इसके पश्चात सुव्यवस्थित ढंग से कोरियोग्राफ किया गया रिदमिक योगासन अनुक्रम प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों दोनों को मोहित किया। गौरतलब है कि भारत ने इसी वर्ष जून 2026 में अहमदाबाद में आयोजित वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप में 102 स्वर्ण सहित कुल 114 पदक जीते थे, जिसमें 79 देशों के 522 एथलीट शामिल हुए थे।
विदेशी प्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया
दक्षिण अफ्रीका के शेफ-डी-मिशन फिलासांडे मैकविली ने कहा, 'योग दक्षिण अफ्रीका की उन गतिविधियों में से एक है, जिसका इस्तेमाल लोग डिटॉक्स करने, तनाव कम करने और शरीर के लचीलेपन को बेहतर बनाने के लिए करते हैं। हमें यह बहुत पसंद है।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि 'इसमें आपके शरीर से बहुत कुछ चाहिए होता है, फिर भी जो दक्षिण अफ्रीकी इसे पसंद करते हैं, वे हर दिन इसका अभ्यास करते हैं।'
चीन के शेफ-डी-मिशन यी लियू ने कहा, 'आज हमने योग के बारे में बहुत कुछ देखा और सीखा। प्रैक्टिस के दौरान, हमने छोटे बच्चों को अद्भुत मूवमेंट्स का अभ्यास करते देखा। हम इसके बारे में और भी बहुत कुछ सीखना चाहते हैं।' एक उल्लेखनीय दृश्य में, एक चीनी वुशु एथलीट को नारायणपुरा स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के खिलाड़ियों को वुशु की बारीकियाँ सिखाते देखा गया — यह उस सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रत्यक्ष प्रमाण था जिसकी इस आयोजन से उम्मीद थी।
भारतीय आतिथ्य की सराहना
रूस की प्रतिनिधिमंडल प्रमुख ज्लाटा याकोवलेवा ने आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा, 'यह अविश्वसनीय था। भारत की मेहमाननवाजी शानदार है। मुझे लगता है कि मेरे लिए सबसे बड़ी और सबसे पसंदीदा बात ब्रिक्स देशों के बीच दोस्ती है।' चीन के यी लियू ने भी भारतीय आतिथ्य का विशेष उल्लेख किया और बताया कि आधी रात को एयरपोर्ट पर डांस ग्रुप द्वारा स्वागत, तथा स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्वाद वाले भोजन — जिसमें डोसा भी शामिल था — ने प्रतिनिधिमंडल पर अमिट छाप छोड़ी।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब योगासन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रतिस्पर्धी खेल विधा के रूप में तेज़ी से अपनी पहचान बना रहा है। इस आयोजन ने न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच मिला, बल्कि ब्रिक्स देशों के बीच खेल कूटनीति को भी नई ऊर्जा दी। आने वाले वर्षों में ऐसे आयोजनों की नियमितता पारंपरिक खेलों के वैश्विक प्रसार में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।