12 अक्टूबर 2026
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ब्रिक्स पारंपरिक खेल 2026: अहमदाबाद में 10 देशों की खेल विरासत एक मंच पर

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ब्रिक्स पारंपरिक खेल 2026: अहमदाबाद में 10 देशों की खेल विरासत एक मंच पर

सारांश

अहमदाबाद के वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 10 ब्रिक्स देशों ने अपनी पारंपरिक खेल विरासत एक मंच पर प्रस्तुत की। भारत ने ₹3.76 बिलियन की खेलो इंडिया पहल और ब्रिक्स खेल रिपॉजिटरी के तीन-सूत्री प्रस्ताव के साथ खेल-संस्कृति कूटनीति में नई दिशा दिखाई।

मुख्य बातें

ब्रिक्स पारंपरिक और स्वदेशी प्रदर्शन खेल 2026 का आयोजन 12 अक्टूबर 2026 को वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, अहमदाबाद में हुआ।
उद्घाटन केंद्रीय खेल मंत्री डॉ.
मनसुख मांडविया और गुजरात उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी की उपस्थिति में हुआ।
भारत ने 'खेलो इंडिया' पहल के तहत 3.76 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश का उल्लेख किया।
'संडे ऑन साइकिल' अभियान में हर रविवार 3 लाख से अधिक स्थानों पर 50 लाख से ज़्यादा लोग शामिल; 94 आयोजन पूर्ण।
भारत ने ब्रिक्स देशों के लिए पारंपरिक खेलों की साझा डिजिटल रिपॉजिटरी , खिलाड़ी-कोच आदान-प्रदान और भविष्य के आयोजनों में नियमित प्रदर्शन का तीन-सूत्री प्रस्ताव रखा।
10 ब्रिक्स देशों — बेलारूस, बोलीविया, ब्राज़ील, चीन, भारत, ईरान, कज़ाकिस्तान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और UAE — ने अपनी पारंपरिक खेल परंपराओं का प्रदर्शन किया।

ब्रिक्स पारंपरिक और स्वदेशी प्रदर्शन खेल 2026 का आयोजन 12 अक्टूबर 2026 को अहमदाबाद के वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, नारणपुरा में हुआ, जिसमें 10 ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधिमंडलों, खिलाड़ियों, खेल विशेषज्ञों और तकनीकी अधिकारियों ने भाग लिया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स राष्ट्रों की खेल विरासत, सांस्कृतिक विविधता और आपसी सौहार्द का उत्सव मनाना था।

उद्घाटन और मुख्य वक्तव्य

कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी की उपस्थिति में किया। 10 ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए डॉ. मांडविया ने कहा, 'भारत खेल को राष्ट्र-निर्माण के केंद्र में रख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत खेल के मैदान से लेकर पोडियम तक अवसर पैदा करके अपने खेल इकोसिस्टम को बदल रहा है।'

खेलो इंडिया और निवेश का खाका

डॉ. मांडविया ने भारत के व्यापक खेल दृष्टिकोण की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा, 'जमीनी स्तर पर भागीदारी, प्रतिभा की पहचान, कोचिंग, खेल विज्ञान, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, खिलाड़ियों के कल्याण और अंतरराष्ट्रीय अनुभव जैसे व्यापक 360-डिग्री दृष्टिकोण के साथ, भारत भविष्य के लिए एक टिकाऊ खेल इकोसिस्टम बना रहा है।' उन्होंने बताया कि 'खेलो इंडिया' पहल के तहत लगभग 3.76 बिलियन अमेरिकी डॉलर आवंटित किए गए हैं।

भारत का तीन-सूत्री सहयोग प्रस्ताव

डॉ. मांडविया ने पारंपरिक और स्थानीय खेलों को संरक्षित करने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग के तीन व्यावहारिक प्रस्ताव रखे। पहला — पारंपरिक खेलों का एक स्वैच्छिक ब्रिक्स रिपॉजिटरी तैयार करना, जिसमें इतिहास, सांस्कृतिक महत्व, नियम, उपकरण और मैदान की आवश्यकताओं का दस्तावेज़ीकरण हो। दूसरा — ब्रिक्स देशों के खिलाड़ियों, कोचों, शोधकर्ताओं, शिक्षण संस्थानों और सांस्कृतिक विशेषज्ञों के बीच आपसी आदान-प्रदान को बढ़ावा देना। तीसरा — भविष्य के ब्रिक्स खेल आयोजनों में पारंपरिक खेलों के नियमित प्रदर्शन की संभावनाएँ तलाशना।

फिट इंडिया और साइकिलिंग अभियान

डॉ. मांडविया ने 'फिट इंडिया मूवमेंट' की उपलब्धियाँ भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि 'संडे ऑन साइकिल' अभियान को देशभर में जबरदस्त सफलता मिली है — हर रविवार 3 लाख से अधिक स्थानों पर 50 लाख से ज़्यादा लोग साइकिलिंग में भाग लेते हैं। अब तक 94 आयोजन संपन्न हो चुके हैं। यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब भारत वैश्विक खेल महाशक्ति बनने की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।

10 देशों की पारंपरिक खेल विरासत का प्रदर्शन

वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 10 ब्रिक्स देशों ने अपनी-अपनी खेल परंपराओं का जीवंत प्रदर्शन किया। इनमें बेलारूस का गोरोडकी, बोलीविया के लुचा डे चोलिटास, टिंकू, रायुएला, ट्रोम्पो, कैचिनास और कैरेरा डे सैकोस, ब्राज़ील के जाराबाटाना, कोरिडा डे टोरस, ब्राज़ीलियाई पैरा-जू-जित्सु और कैपोरिया, चीन के वुशु, लायन डांस और हेल्थ चीगोंग, भारत के मल्लखंब, योगासन और कलारीपयट्टू, ईरान के जूरखानेह, हफ्त संग और घानियेह, कज़ाकिस्तान के असिक अतु, तोगिजकुमालाक और कजाक कुरेसी, रूस के गोरोडकी और साम्बो, दक्षिण अफ्रीका के कगाती और ईनतोंगा, तथा संयुक्त अरब अमीरात का अल तब्बा शामिल रहे।

प्रदर्शनों के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम और दर्शकों की भागीदारी वाली गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं। समापन पर भाग लेने वाली सभी टीमों को सम्मानित किया गया। गौरतलब है कि इस आयोजन ने पारंपरिक खेलों के संरक्षण, समावेशी भागीदारी और ब्रिक्स परिवार के बीच सांस्कृतिक कूटनीति को और मज़बूत आधार दिया। आने वाले समय में इस पहल का विस्तार और ब्रिक्स रिपॉजिटरी का निर्माण इस दिशा में अगला बड़ा कदम होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहाँ संदेश रणनीतिक है। लेकिन असली परीक्षा डॉ. मांडविया के तीन-सूत्री प्रस्ताव की व्यावहारिक परिणति में होगी — ब्रिक्स रिपॉजिटरी और खिलाड़ी आदान-प्रदान कार्यक्रम कागज़ पर आकर्षक लगते हैं, पर इनके क्रियान्वयन की समयसीमा और जवाबदेही तंत्र अभी अस्पष्ट है। ₹3.76 बिलियन की खेलो इंडिया प्रतिबद्धता प्रभावशाली है, किंतु मुख्यधारा की कवरेज यह सवाल नहीं उठाती कि इस राशि में से पारंपरिक और स्वदेशी खेलों के लिए अलग से क्या आवंटन है।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स पारंपरिक और स्वदेशी प्रदर्शन खेल 2026 क्या है?
यह 12 अक्टूबर 2026 को अहमदाबाद के वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित ब्रिक्स देशों का खेल-सांस्कृतिक आयोजन है, जिसमें 10 सदस्य देशों ने अपने पारंपरिक और स्वदेशी खेलों का प्रदर्शन किया। इसका उद्देश्य ब्रिक्स राष्ट्रों की खेल विरासत, सांस्कृतिक विविधता और आपसी संबंधों को मज़बूत करना था।
भारत ने ब्रिक्स देशों के सामने क्या प्रस्ताव रखा?
भारत ने तीन प्रस्ताव रखे — पहला, पारंपरिक खेलों की एक स्वैच्छिक ब्रिक्स डिजिटल रिपॉजिटरी बनाना; दूसरा, खिलाड़ियों, कोचों और सांस्कृतिक विशेषज्ञों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देना; तीसरा, भविष्य के ब्रिक्स आयोजनों में पारंपरिक खेलों का नियमित प्रदर्शन सुनिश्चित करना।
खेलो इंडिया पहल में कितनी राशि आवंटित की गई है?
केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के अनुसार, 'खेलो इंडिया' पहल के तहत लगभग 3.76 बिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि आवंटित की गई है। इस पहल का उद्देश्य जमीनी स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक एक टिकाऊ खेल इकोसिस्टम तैयार करना है।
'संडे ऑन साइकिल' अभियान कितना सफल रहा है?
डॉ. मांडविया के अनुसार, 'संडे ऑन साइकिल' अभियान में हर रविवार 3 लाख से अधिक स्थानों पर 50 लाख से ज़्यादा लोग साइकिलिंग में भाग लेते हैं, और अब तक देशभर में इसके 94 आयोजन संपन्न हो चुके हैं।
इस आयोजन में किन देशों ने भाग लिया और किन खेलों का प्रदर्शन हुआ?
10 ब्रिक्स देशों — बेलारूस, बोलीविया, ब्राज़ील, चीन, भारत, ईरान, कज़ाकिस्तान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और UAE — ने भाग लिया। भारत ने मल्लखंब, योगासन और कलारीपयट्टू का प्रदर्शन किया, जबकि अन्य देशों ने वुशु, कैपोरिया, साम्बो और अल तब्बा जैसी अपनी विशिष्ट परंपराएँ प्रस्तुत कीं।
राष्ट्र प्रेस
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