कॉमनवेल्थ गेम्स 2030: मांडविया ने ग्लासगो में सेक्रेटरी-जनरल बोचवे से की द्विपक्षीय वार्ता, अहमदाबाद की तैयारियों पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने 23 जुलाई 2026 को ग्लासगो में कॉमनवेल्थ खेल मंत्रियों की बैठक के दौरान कॉमनवेल्थ की नवनिर्वाचित सेक्रेटरी-जनरल शर्ली अयोरकोर बोचवे के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेज़बानी के लिए अहमदाबाद की तैयारियों और भारत के खेल सुधारों पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में क्या हुआ
मांडविया ने बोचवे के समक्ष भारत की दो प्रमुख खेल पहलों — 'खेलो भारत नीति' और 'अस्मिता लीग' — का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि ये कार्यक्रम जमीनी स्तर पर खेलों में भागीदारी बढ़ाने, लैंगिक समावेशिता को प्रोत्साहित करने और देशभर में खेल प्रतिभाओं को निखारने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
मांडविया ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'ग्लासगो में कॉमनवेल्थ खेल मंत्रियों की बैठक के दौरान कॉमनवेल्थ की चुनी हुई सेक्रेटरी-जनरल, शर्ली अयोरकोर बोचवे के साथ एक सार्थक बैठक की।' उन्होंने आगे लिखा, 'भारत के क्रांतिकारी खेल सुधार जमीनी स्तर पर खेलों को मजबूत कर रहे हैं, लैंगिक समावेशिता को बढ़ावा दे रहे हैं और देश भर में खेल उत्कृष्टता के लिए रास्ते बना रहे हैं।'
कॉमनवेल्थ साझेदारी पर चर्चा
दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय खेल साझेदारियों को और गहरा करने तथा 'कॉमनवेल्थ एडवांटेज' का लाभ उठाते हुए व्यापार व निवेश के नए अवसर तलाशने पर विचार-विमर्श किया। गौरतलब है कि भारत 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेज़बानी के लिए आधिकारिक रूप से तैयार है और अहमदाबाद को विश्व-स्तरीय खेल आयोजन के लिए तैयार किया जा रहा है।
ग्लासगो में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की भूमिका
मांडविया इस समय भारतीय प्रतिनिधिमंडल के नेता के रूप में ग्लासगो में उपस्थित हैं, जो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेज़बानी कर रहा है। बुधवार को हुई खेल मंत्रियों की बैठक में उन्होंने खेलों में भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा को रेखांकित किया और 2030 शताब्दी कॉमनवेल्थ गेम्स को ऐतिहासिक, टिकाऊ और यादगार बनाने की देश की प्रतिबद्धता दोहराई।
2036 ओलंपिक दावेदारी को भी मिलेगी गति
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अहमदाबाद में 2036 ओलंपिक की मेज़बानी की दावेदारी को भी सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहा है। मांडविया ग्लासगो प्रवास के दौरान विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों से मुलाकात कर इस दावेदारी के लिए समर्थन जुटाने का प्रयास करेंगे। यह भारत की बहु-आयामी खेल कूटनीति का हिस्सा है, जिसमें एक साथ घरेलू सुधार और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी दोनों पर ध्यान दिया जा रहा है।