दिलीप वेंगसरकर: लॉर्ड्स के बादशाह और कर्नल नाम की कहानी
सारांश
Key Takeaways
- दिलीप वेंगसरकर का जन्म महाराष्ट्र के राजापुर में हुआ।
- लॉर्ड्स पर उन्होंने लगातार तीन शतक बनाए।
- उन्हें कर्नल नाम लाला अमरनाथ ने दिया।
- उन्होंने 116 टेस्ट मैचों में 6,868 रन बनाए।
- 1983 में वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे।
नई दिल्ली, 5 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दिलीप वेंगसरकर भारत के उन कुछ बल्लेबाजों में से हैं जिन्हें विदेशी पिचों पर खेलना हमेशा पसंद आया। वेंगसरकर ने लॉर्ड्स जैसे ऐतिहासिक क्रिकेट मैदान पर लगातार तीन शतक लगाने वाले पहले विदेशी बल्लेबाज का खिताब अपने नाम किया। उनके करियर ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों को अपने अंदर समेटा है।
दिलीप वेंगसरकर का जन्म 6 अप्रैल 1956 को महाराष्ट्र के राजापुर में हुआ। क्रिकेट के प्रति दिलीप की गहरी रुचि थी, और उन्होंने जल्दी ही इस खेल को अपने करियर के रूप में चुन लिया। अपनी कम उम्र में ही उन्होंने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं। जब दिलीप 19 वर्ष के थे, उन्होंने ईरानी ट्रॉफी में रेस्ट ऑफ इंडिया के लिए खेलते हुए, लाला अमरनाथ को अपनी बल्लेबाजी से प्रभावित किया। अमरनाथ ने रेडियो कमेंट्री में कहा था कि दिलीप कर्नल सीके नायडू की तरह खेल रहे हैं, जिससे उन्हें 'कर्नल' उपनाम मिला। इस मैच में दिलीप ने मदन लाल, बिशन सिंह बेदी और इरापल्ली जैसे गेंदबाजों का सामना किया और शानदार शॉट्स लगाए।
ईरानी कप में उनके शानदार प्रदर्शन ने दिलीप की किस्मत को बदल दिया और एक वर्ष के अंदर उन्हें भारतीय टीम में जगह मिल गई। 24 जनवरी को, न्यूजीलैंड की ज़मीन पर, दिलीप ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला टेस्ट मैच खेला। इसके पश्चात, उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपनी अद्भुत बल्लेबाजी के कारण, वह भारतीय टीम के प्रमुख बल्लेबाजों में शामिल हो गए। दिलीप को विदेशी पिचों पर खेलना पसंद था, विशेष रूप से लॉर्ड्स के मैदान पर उनके रिकॉर्ड को सभी ने सराहा।
लॉर्ड्स में खेले गए चार टेस्ट मैचों में, दिलीप ने 72 की औसत से 508 रन बनाए। केवल इंग्लैंड ही नहीं, बल्कि वेस्टइंडीज जैसे मजबूत गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ भी उन्होंने शतक जमाए। उनके टेस्ट करियर में कुल 116 टेस्ट मैच खेले गए, जिसमें उन्होंने 185 पारियों में 42 की औसत से 6,868 रन बनाए। दिलीप ने 17 शतक और 35 अर्धशतक बनाए। उनका वनडे डेब्यू 1976 में न्यूजीलैंड के खिलाफ हुआ। 50 ओवर के फॉर्मेट में उन्होंने कुल 129 मैच खेले और 34 की औसत से 3,508 रन बनाए।
दिलीप वेंगसरकर 1983 में वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे, हालांकि उन्होंने सभी मैच नहीं खेले। वेस्टइंडीज के खिलाफ खेलते समय दिलीप को मैल्कम मार्शल की बाउंसर पर गंभीर चोट आई, जिससे उनका जबड़ा टूट गया। 1987 में, दिलीप को कपिल देव के बाद भारतीय टीम की कप्तानी सौंपी गई, लेकिन उनके कप्तान के रूप में प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। उन्होंने 18 वनडे और 10 टेस्ट मैचों में कप्तानी की। दिलीप को 1981 में अर्जुन अवॉर्ड और 1987 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने उन्हें कर्नल नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से भी नवाजा।