क्या इंग्लैंड के पूर्व स्पिनर नॉर्मन गिफोर्ड का 85 साल की उम्र में निधन हो गया?
सारांश
Key Takeaways
- नॉर्मन गिफोर्ड का निधन क्रिकेट जगत में एक बड़ा नुकसान है।
- उन्होंने इंग्लैंड के लिए 15 टेस्ट और 2 वनडे खेले।
- गिफोर्ड ने वॉस्टरशायर को महत्वपूर्ण खिताब दिलाए।
- उन्हें नॉर्मन गिफोर्ड ट्रॉफी के माध्यम से सम्मानित किया गया।
- उनकी क्रिकेट यात्रा युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है।
लंदन, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। इंग्लैंड और वॉस्टरशायर के पूर्व लेफ्ट-आर्म स्पिनर नॉर्मन गिफोर्ड का लंबी बीमारी के बाद 85 साल की उम्र में निधन हो गया। इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने बुधवार को इस घटना की पुष्टि की है।
गिफोर्ड ने साल 1964 और 1965 में टीम को काउंटी चैंपियनशिप जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने वॉस्टरशायर में कप्तान के रूप में टीम का नेतृत्व किया। इसके अलावा, उन्होंने 1974 में वॉस्टरशायर को काउंटी चैंपियनशिप का खिताब और 1971 में संडे लीग का खिताब दिलवाया।
गिफोर्ड ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 1964 से 1973 के बीच इंग्लैंड के लिए 15 टेस्ट और 2 वनडे मुकाबले खेले। 1980 में शारजाह में हुए रॉथमैन फोर-नेशंस कप में, वह इंग्लैंड के सबसे उम्रदराज कप्तान बने। अपने टेस्ट करियर में, इस स्लो लेफ्ट-आर्मर ने 33 विकेट
कई सीनियर खिलाड़ियों की अनुपस्थिति के कारण गिफोर्ड ने कप्तानी का कार्यभार संभाला, लेकिन इंग्लैंड को ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। फिर भी, अनुभवी स्पिनर ने पाकिस्तान के खिलाफ 23 रन4 विकेट
वॉस्टरशायर के बाद, गिफोर्ड ने वारविकशायर में शामिल होकर 1988 में 48 साल की उम्र में प्रोफेशनल क्रिकेट से रिटायर होने से पहले 5 सीज़न तक टीम का नेतृत्व किया। उनके योगदान को नॉर्मन गिफोर्ड ट्रॉफी के माध्यम से मान्यता दी गई है, जिसे वॉस्टरशायर और वारविकशायर अपनी वाइटैलिटी ब्लास्ट मैचों के दौरान प्रतिस्पर्धा करते हैं।
गिफोर्ड ने वॉस्टरशायर के क्लब प्रेसिडेंट के रूप में भी कार्य किया। इस सेवा के लिए उन्हें मानद वाइस प्रेसिडेंसी से सम्मानित किया गया।
अपने कौशल के बावजूद, टोनी लॉक और युवा डेरेक अंडरवुड जैसे खिलाड़ियों की कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण गिफोर्ड का इंग्लैंड करियर सीमित रह गया। हालांकि, 1972–73 में उपमहाद्वीप दौरे पर गिफोर्ड और अंडरवुड ने कुछ समय के लिए एक साथ खेला।