फीफा वर्ल्ड कप 2026 क्वार्टर फाइनल: नॉर्वे का ऐतिहासिक सफर, इंग्लैंड की नज़रें दूसरे खिताब पर
सारांश
मुख्य बातें
फीफा वर्ल्ड कप 2026 के क्वार्टर फाइनल में रविवार, 13 जुलाई को भारतीय समयानुसार रात 2:30 बजे मियामी स्टेडियम में इंग्लैंड और नॉर्वे के बीच निर्णायक भिड़ंत होने वाली है। इस मैच का विजेता 'अर्जेंटीना बनाम स्विट्जरलैंड' क्वार्टर फाइनल के विजेता के साथ सेमीफाइनल में खेलेगा।
नॉर्वे का ऐतिहासिक क्वार्टर फाइनल सफर
नॉर्वे ने फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में पहली बार क्वार्टर फाइनल में जगह बनाकर इस टूर्नामेंट की सबसे चर्चित कहानियों में से एक लिख दी है। कोच स्टेल सोलबक्केन की अगुआई में नॉर्डिक टीम ग्रुप-आई में फ्रांस के बाद दूसरे स्थान पर रही और इसके बाद नॉकआउट दौर में लगातार दो बड़ी जीत दर्ज कीं।
राउंड ऑफ 32 में कोटे डी आइवर के खिलाफ एर्लिंग हालैंड ने अंतिम क्षणों में विनिंग गोल दागकर टीम को बाहर होने से बचाया। इसके बाद राउंड ऑफ 16 में 5 बार की विश्व चैंपियन ब्राजील को हालैंड के दो गोलों की बदौलत पराजित कर नॉर्वे ने पूरी दुनिया को चौंका दिया। यह ऐसे समय में आया है जब नॉर्वे पहले कभी वर्ल्ड कप के नॉकआउट दौर में नहीं पहुँची थी।
इंग्लैंड की चुनौतीपूर्ण राह
1966 वर्ल्ड कप चैंपियन इंग्लैंड ने ग्रुप-एल में क्रोएशिया, घाना और पनामा को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया। हालाँकि नॉकआउट दौर में 'थ्री लायंस' को कड़ी परीक्षाओं का सामना करना पड़ा।
राउंड ऑफ 32 में डीआर कांगो के खिलाफ एक गोल से पिछड़ने के बाद इंग्लैंड ने शानदार वापसी की। हैरी केन के देर से किए गए दो गोलों ने मैच 2-1 से इंग्लैंड के पक्ष में पलट दिया। राउंड ऑफ 16 में सह-मेजबान मैक्सिको के खिलाफ जूड बेलिंगहम ने दो गोल दागे और 3-2 की जीत में अहम भूमिका निभाई — उल्लेखनीय रूप से दूसरे हाफ का अधिकतर समय इंग्लैंड ने 10 खिलाड़ियों के साथ खेला।
दोनों टीमों का आमना-सामना का इतिहास
गौरतलब है कि वर्ल्ड कप के मंच पर इंग्लैंड और नॉर्वे पहले कभी नहीं भिड़े हैं। हालाँकि दोनों देश अब तक 12 बार अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में आमने-सामने आ चुके हैं, जिनमें 1982 और 1994 वर्ल्ड कप के क्वालीफाइंग मैच भी शामिल हैं। दोनों के बीच सबसे हालिया मुकाबला 2014 में वेम्बली में एक अंतरराष्ट्रीय फ्रेंडली था, जिसमें वेन रूनी की पेनाल्टी से इंग्लैंड ने 1-0 से जीत दर्ज की थी।
इंग्लैंड की टीम
गोलकीपर: जॉर्डन पिकफोर्ड, डीन हेंडरसन, जेम्स ट्रैफर्ड।
डिफेंडर: एजरी कोन्सा, निको ओ'रेली, जॉन स्टोन्स, मार्क गुएही, टीनो लिवरामेंटो, डैन बर्न, रीस जेम्स, जेड स्पेंस, जेरेल क्वांसाह।
मिडफील्डर: डेक्लान राइस, इलियट एंडरसन, जूड बेलिंगहैम, जॉर्डन हेंडरसन, कोबी मैनू, मॉर्गन रोजर्स, एबेरेची एजे।
फॉरवर्ड: बुकायो साका, हैरी केन, मार्कस रैशफोर्ड, एंथोनी गॉर्डन, ओली वॉटकिंस, नोनी मडुके, इवान टोनी।
नॉर्वे की टीम
गोलकीपर: ऑर्जन हास्कजॉल्ड नाइलैंड, एगिल सेल्विक, सैंडर टैंगविक।
डिफेंडर: क्रिस्टोफर वास्बक्क अजेर, फ्रेड्रिक ब्योर्कन, हेनरिक फालचेनर, सोंड्रे लैंगस, टोरबॉर्न हेग्गेम, मार्कस होल्मग्रेन पेडर्सन, जूलियन रायर्सन, डेविड मोलर वोल्फ, लियो ओस्टिगार्ड।
मिडफील्डर: थेलोनियस असगार्ड, फ्रेड्रिक ऑर्स्नेस, पैट्रिक बर्ग, सैंडर बर्ज, ऑस्कर बॉब, जेन्स पेटर हाउज, एंटोनियो नुसा, एंड्रियास शेजेल्डरुप, मोर्टन थोरस्बी, क्रिस्टियन थोरस्टवेट, मार्टिन ओडेगार्ड।
फॉरवर्ड: एर्लिंग हालैंड, जोर्गेन स्ट्रैंड लार्सन, अलेक्जेंडर सोरलोथ।
यह मुकाबला न केवल एक सेमीफाइनल की जगह के लिए है, बल्कि यह तय करेगा कि क्या नॉर्वे की परीकथा जारी रहती है या इंग्लैंड अपने 60 साल के इंतजार को खत्म करने की राह पर आगे बढ़ता है।