तीसरे टी20 से पहले गौतम गंभीर और सितांशु कोटक ने महाकालेश्वर मंदिर में लिया बाबा का आशीर्वाद
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर और बैटिंग कोच सितांशु कोटक ने 11 अक्टूबर 2026 को उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर पहुँचकर भगवान शिव के दर्शन किए। दोनों कोच यह आस्था-यात्रा इंदौर के होल्कर स्टेडियम में वेस्टइंडीज के विरुद्ध होने वाले पाँच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज के तीसरे मुकाबले से ठीक पहले पूरी की।
सीरीज का मौजूदा समीकरण
यह सीरीज इस समय 1-1 की बराबरी पर है। रांची में खेले गए दूसरे टी20 मैच में वेस्टइंडीज ने रोमांचक अंदाज़ में भारत के दिए 250 रन के लक्ष्य को 9 गेंदें शेष रहते हासिल कर लिया था। इस अप्रत्याशित हार के बाद इंदौर में होने वाला तीसरा मुकाबला सीरीज में निर्णायक मोड़ ला सकता है।
गंभीर ने क्या कहा
मंदिर में दर्शन के बाद मीडिया से बात करते हुए गौतम गंभीर ने कहा, 'मुझे यहाँ दर्शन के लिए बुलाया गया था और बाबा का आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ रहा है। देश पर भी उनका आशीर्वाद बना रहे। मुझे भरोसा है कि हम अच्छा प्रदर्शन करेंगे और बाबा का आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ रहेगा।' उनके इस कथन से टीम के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संकेत मिलता है।
पहले भी हो चुका है यह दौरा
गौरतलब है कि जनवरी 2026 में भी दोनों कोच होल्कर स्टेडियम में भारत बनाम न्यूजीलैंड के निर्णायक तीसरे वनडे से पहले महाकालेश्वर मंदिर आए थे। उस यात्रा के दौरान वे भस्म आरती में भी शामिल हुए थे — नंदी हॉल में लगभग दो घंटे बैठे, टीम की सफलता के लिए प्रार्थना की, और परंपरागत रीति-रिवाज के तहत नंदी को जल अर्पित किया। गंभीर उस जनवरी यात्रा से लगभग पाँच महीने पहले अपने परिवार के साथ भी इस मंदिर में दर्शन कर चुके हैं। यह उनकी कई 'भस्म आरती दर्शन' यात्राओं में से एक रही। यह पैटर्न संकेत देता है कि बड़े मैचों से पहले महाकालेश्वर के दर्शन अब कोचिंग टीम की एक स्थापित परंपरा बन चुकी है।
होल्कर स्टेडियम और मैच की चुनौतियाँ
होल्कर स्टेडियम अपनी बैटिंग-अनुकूल पिच और छोटी बाउंड्री के लिए जाना जाता है, जो इसे उच्च-स्कोरिंग मुकाबलों का पसंदीदा केंद्र बनाता है। रांची में 250 रन लुटाने के बाद भारतीय गेंदबाज़ी आक्रमण की प्रभावशीलता पर सवाल उठे हैं। दूसरी ओर, वेस्टइंडीज अपनी रिकॉर्ड-तोड़ जीत के मनोबल को बनाए रखते हुए सीरीज में 2-1 की बढ़त लेना चाहेगा।
आगे क्या
इंदौर का यह मुकाबला पाँच मैचों की सीरीज में पहला सीरीज-डिफाइनिंग क्षण साबित हो सकता है। भारत के लिए यह ज़रूरी है कि वह अपनी गेंदबाज़ी की कमज़ोरियों को तत्काल सुधारे, जबकि वेस्टइंडीज की नज़र मौमेंटम बनाए रखने पर होगी। बाबा महाकाल का आशीर्वाद लेने के बाद अब मैदान पर प्रदर्शन ही असली परीक्षा होगी।