कुलदीप यादव को गंभीर की सलाह: विकेट नहीं, अच्छे स्पेल पर रखें नज़र — कोलंबो टेस्ट से पहले बड़ा बयान
सारांश
मुख्य बातें
भारत के हेड कोच गौतम गंभीर ने 22 अगस्त को कोलंबो में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्पष्ट किया कि बाएं हाथ के रिस्ट स्पिनर कुलदीप यादव के साथ उनकी बातचीत का केंद्र विकेट लेने की होड़ नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण स्पेल डालना रहा है। यह बयान भारत-श्रीलंका सीरीज़ के दूसरे और अंतिम टेस्ट से ठीक पहले आया है, जो सिंहली क्रिकेट क्लब स्टेडियम में रविवार से शुरू होना है।
मुख्य घटनाक्रम
गाले में खेले गए पहले टेस्ट में भारत ने 165 रन से जीत दर्ज की, लेकिन कुलदीप पूरे मैच में केवल एक विकेट ही हासिल कर सके। इसके बाद दूसरे टेस्ट की प्लेइंग इलेवन में उनकी जगह को लेकर अटकलें तेज़ हो गई हैं। टीम के पास अनकैप्ड ऑफ-स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन का विकल्प भी मौजूद है।
गंभीर की रणनीति: 20 विकेट ही असली लक्ष्य
गंभीर ने टेस्ट क्रिकेट की मूल फ़िलॉसफ़ी को रेखांकित करते हुए कहा, "हम सबसे अच्छा गेंदबाज़ी अटैक चुनने की कोशिश करेंगे जो हमें 20 विकेट दिला सके। आप टेस्ट क्रिकेट में 1,000 रन बना सकते हैं, लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि आप टेस्ट मैच जीतेंगे ही। हालांकि, अगर आप 20 विकेट लेते हैं, तो आपके पास टेस्ट मैच जीतने की पूरी संभावना होती है।"
उन्होंने आगे जोड़ा कि चाहे लाइनअप में तीन बाएं हाथ के स्पिनर हों, ऑफ-स्पिनर हों या तीन तेज़ गेंदबाज़ — सभी विकल्प खुले हैं। कप्तान की भूमिका पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अंतिम फ़ैसला अक्सर इस बात पर निर्भर करता है कि कौन-सा गेंदबाज़ मौजूदा परिस्थितियों में सबसे खतरनाक साबित हो सकता है।
कुलदीप को खास सलाह
कुलदीप के बारे में सीधे पूछे जाने पर गंभीर ने कहा, "मेरे हिसाब से, कुलदीप के साथ मेरी जो बातचीत हुई है, उसमें मैंने यही कहा है कि विकेट लेने की बहुत ज़्यादा कोशिश करने के बजाय बस अपना अच्छा स्पेल डालने पर ध्यान दें, क्योंकि कभी-कभी, एक रिस्ट स्पिनर के तौर पर, जब आप विकेट लेने के लिए बहुत अधिक बेताब होते हैं, तो आपका कंट्रोल भी बिगड़ सकता है।"
गंभीर ने यह भी स्पष्ट किया कि कुलदीप टीम के लिए अहम बने हुए हैं और किसी भी हालात में खतरनाक साबित होने की क्षमता रखते हैं।
पाँच गेंदबाज़ों की रणनीति पर ज़ोर
गंभीर ने सपाट पिचों पर पाँच मुख्य गेंदबाज़ों के साथ उतरने की अपनी सोच को दोहराया। उनके अनुसार, "अगर पिच बहुत सपाट है, तो गेंदबाज़ों को कड़ी मेहनत करनी होगी। अगर आप पहले बैटिंग करते हैं और 700 रन बनाते हैं, लेकिन 20 विकेट नहीं ले पाते, तो आखिर में मैच ड्रॉ ही होता है।"
उन्होंने तर्क दिया कि पाँच मुख्य गेंदबाज़ होने से रोटेशन बेहतर होता है और तेज़ गेंदबाज़ों को तब वापस लाया जा सकता है जब वे वाकई असरदार हों — न कि महज़ बचाव के विकल्प के रूप में। गौरतलब है कि पहले टेस्ट में भी कुलदीप की कम गेंदबाज़ी के बावजूद पाँचवें गेंदबाज़ की उपस्थिति ने टीम को लचीलापन दिया था।
आगे क्या
दोनों टीमें कोलंबो में अंतिम टेस्ट के लिए तैयार हैं और भारत सीरीज़ में 1-0 की बढ़त के साथ मैदान में उतरेगा। प्लेइंग इलेवन का अंतिम फ़ैसला टॉस के दिन पिच की स्थिति देखकर किया जाएगा।