भारतीय हॉकी नेशनल टीम में सिलेक्शन कैसे होता है? जानें घरेलू टूर्नामेंट का पूरा रोडमैप
सारांश
मुख्य बातें
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम दोनों ने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा — 28 वर्षों में यह पहला मौका था जब दोनों टीमों ने एक साथ शीर्ष पदक हासिल किया। इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे है एक सुव्यवस्थित घरेलू चयन प्रणाली, जो जिला स्तर से शुरू होकर राष्ट्रीय कैंप तक जाती है। जानिए, कौन-से टूर्नामेंट किसी खिलाड़ी को भारतीय हॉकी टीम का टिकट दिलाते हैं।
जिला से राज्य तक: चयन का पहला पड़ाव
हॉकी में करियर बनाने का सपना देखने वाले खिलाड़ियों को सबसे पहले जिला स्तरीय टीम में अपनी जगह पक्की करनी होती है। हॉकी इंडिया घरेलू प्रतिभाओं की पहचान के लिए ज़िला और राज्य, दोनों स्तरों पर विभिन्न टूर्नामेंटों का आयोजन करता है। जिला स्तर पर लगातार अच्छा खेल दिखाने वाले खिलाड़ियों को राज्य की टीम में जगह मिलती है, जहाँ से राष्ट्रीय चयन की दौड़ असल मायनों में शुरू होती है।
सीनियर नेशनल हॉकी चैंपियनशिप: सबसे अहम घरेलू टूर्नामेंट
राष्ट्रीय टीम में प्रवेश का सबसे महत्वपूर्ण द्वार है सीनियर नेशनल हॉकी चैंपियनशिप। इसे हॉकी इंडिया का सर्वोच्च घरेलू टूर्नामेंट माना जाता है। यह प्रतियोगिता पहली बार 1928 में आयोजित हुई थी और पहले इसे रंगास्वामी कप के नाम से जाना जाता था। 2011 में इसका नाम बदलकर वर्तमान रूप दिया गया।
इस चैंपियनशिप में देश के हर राज्य, केंद्र शासित प्रदेश और विभिन्न सरकारी विभाग — जैसे रेलवे, पेट्रोलियम और सेना — की टीमें हिस्सा लेती हैं। इस मंच पर दमदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी सिलेक्टर्स की नज़र में आते हैं और इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय कैंप ट्रायल के लिए बुलाया जाता है।
टूर्नामेंट का ढाँचा: तीन डिवीजन में बँटी 29 टीमें
सीनियर नेशनल हॉकी चैंपियनशिप में कुल 29 टीमें प्रतिस्पर्धा करती हैं, जिन्हें पिछले साल के प्रदर्शन के आधार पर तीन डिवीजन में बाँटा जाता है।
डिवीजन ए में 12 टीमें होती हैं, जिन्हें तीन-तीन के चार पूल में विभाजित किया जाता है। हर पूल से दो टीमें क्वार्टरफाइनल में पहुँचती हैं, फिर सेमीफाइनल और अंत में फाइनल होता है। डिवीजन बी में 10 टीमें दो पूल में खेलती हैं और उनका मुख्य लक्ष्य अगले वर्ष डिवीजन ए में प्रमोशन पाना होता है। डिवीजन सी में 7 टीमें दो पूल में खेलती हैं और यहाँ भी प्रमोशन की दौड़ रहती है।
हॉकी इंडिया लीग और राष्ट्रीय कैंप की भूमिका
सीनियर नेशनल चैंपियनशिप के अलावा, हॉकी इंडिया लीग (HIL) भी खिलाड़ियों के लिए राष्ट्रीय टीम में अपना दावा पेश करने का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुकी है। इन दोनों टूर्नामेंटों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को हॉकी इंडिया के राष्ट्रीय कैंप में बुलाया जाता है।
कैंप में खिलाड़ियों की तकनीक, फिटनेस, रणनीतिक समझ और टीम के साथ तालमेल का गहन परीक्षण होता है। इस समग्र मूल्यांकन के आधार पर ही अंतिम भारतीय हॉकी टीम का चयन किया जाता है।
स्कूल स्तर पर प्रतिभा खोज: भविष्य की नींव
केंद्र सरकार ने अब स्कूल स्तर पर हॉकी प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें प्रोत्साहन देने की एक नई पहल शुरू की है। इस कदम से आने वाले वर्षों में हॉकी खिलाड़ियों की नई पीढ़ी तैयार होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब एशियन गेम्स 2026 की दोहरी स्वर्णिम सफलता ने देश में हॉकी के प्रति नए उत्साह को जन्म दिया है। गौरतलब है कि इस पाइपलाइन को और मज़बूत करना ही भारतीय हॉकी को ओलंपिक पोडियम पर स्थायी स्थान दिला सकता है।