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एशियन गेम्स 2026: हरमनप्रीत की टीम गोल्ड बचाने उतरेगी, सलीमा की महिला टीम की नज़र ओलंपिक टिकट पर

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एशियन गेम्स 2026: हरमनप्रीत की टीम गोल्ड बचाने उतरेगी, सलीमा की महिला टीम की नज़र ओलंपिक टिकट पर

सारांश

एशियन गेम्स 2026 में भारतीय हॉकी के लिए दाँव दोहरा है — गोल्ड और ओलंपिक 2028 का टिकट। हरमनप्रीत की पुरुष टीम वर्ल्ड कप की निराशा पीछे छोड़ने उतरेगी, जबकि सलीमा टेटे की महिला टीम 52 वर्षों के सर्वश्रेष्ठ वर्ल्ड कप प्रदर्शन की रफ्तार को बरकरार रखना चाहेगी।

मुख्य बातें

भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमें रविवार, 21 सितंबर 2026 से एशियन गेम्स 2026 (काकामिगाहारा) में उतरेंगी।
गोल्ड मेडल जीतने वाली दोनों टीमों को लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 का सीधा टिकट मिलेगा।
पुरुष टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह ; टीम 1966, 1998, 2014 और 2022 में एशियन गेम्स गोल्ड जीत चुकी है।
महिला टीम की कप्तान सलीमा टेटे ; टीम वर्ल्ड कप 2026 में 52 वर्षों के सर्वश्रेष्ठ पाँचवें स्थान पर रही थी।
पुरुष टीम पूल ए में इंडोनेशिया, साउथ कोरिया, जापान, बांग्लादेश और श्रीलंका के साथ; महिला टीम पूल बी में उज्बेकिस्तान, इंडोनेशिया, थाईलैंड, जापान और सिंगापुर के साथ।
महिला टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती चीन — चार बार की गोल्ड मेडलिस्ट और मौजूदा एशियन गेम्स चैंपियन।

भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमें रविवार, 21 सितंबर 2026 से एशियन गेम्स 2026 में अपने अभियान की शुरुआत करेंगी — और दोनों के सामने दाँव सिर्फ पदक का नहीं, बल्कि लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के टिकट का भी है। मुकाबले काकामिगाहारा के गिफू प्रीफेक्चुरल ग्रीन स्टेडियम में खेले जाएंगे। इस महाद्वीपीय स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतने वाली दोनों टीमों को ओलंपिक 2028 में सीधा प्रवेश मिलेगा — जो इस बार की प्रतियोगिता को पहले से कहीं अधिक अहम बनाता है।

पुरुष टीम: गोल्ड बचाने की चुनौती

हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में भारतीय पुरुष टीम पूल ए में अपने पहले मैच में इंडोनेशिया से भिड़ेगी। टीम ने एशियन गेम्स में अब तक चार बार — 1966, 1998, 2014 और 2022 में — गोल्ड मेडल जीता है और वह इस खिताब का बचाव करने के इरादे से मैदान में उतरेगी।

हालाँकि, हाल ही में हुए वर्ल्ड कप 2026 में टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था — पुरुष टीम सेमीफाइनल तक नहीं पहुँच पाई और आठवें स्थान पर रहकर टूर्नामेंट समाप्त किया। कोच क्रेग फुल्टन ने उस प्रदर्शन को 'सीखने का मौका' बताते हुए कहा, 'ये सबक हैं, और इन्हें सीख के तौर पर लेने का एकमात्र तरीका है कि उस सीख को असल काम में बदला जाए। अब हमें यही करना है। हमने हर चीज पर चर्चा की है, हर पहलू को देखा है और उन क्षेत्रों की पहचान की है जिनमें सुधार की जरूरत है। इसके साथ ही, अब काम करने का समय है।'

पूल ए में भारत को इंडोनेशिया, साउथ कोरिया, जापान, बांग्लादेश और श्रीलंका से मुकाबला करना होगा। चार बार के गोल्ड मेडलिस्ट साउथ कोरिया और 2018 के चैंपियन जापान टीम की राह में सबसे बड़ी रुकावट साबित हो सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत लगातार दो बार के ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडल की सफलता के बाद और आगे बढ़ना चाहता है।

महिला टीम: इतिहास दोहराने का सुनहरा मौका

सलीमा टेटे की कप्तानी में भारतीय महिला टीम पूल बी के अपने पहले मैच में उज्बेकिस्तान से भिड़ेगी। टीम हाल ही में हुए वर्ल्ड कप 2026 में 52 वर्षों में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ पाँचवें स्थान पर रही थी — हालाँकि वह सेमीफाइनल में नहीं पहुँच सकी।

कोच मारिज्ने ने वर्ल्ड कप की उपलब्धि को 'ऐतिहासिक' बताते हुए कहा, 'हमने कुछ कमाल का और ऐतिहासिक किया, लेकिन हमें अगले टूर्नामेंट की ओर बढ़ना होगा। अगले अध्याय पर जाने से पहले पिछला अध्याय बंद करना पड़ता है।' उनका पूरा ध्यान अब एशियन गेम्स पर केंद्रित है।

महिला टीम ने 1982 के एशियन गेम्स में अपना एकमात्र गोल्ड मेडल जीता था और पिछले एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया था। गौरतलब है कि टीम टोक्यो ओलंपिक 2020 में ऐतिहासिक चौथे स्थान पर रही थी, लेकिन पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई थी — यही वजह है कि इस बार गोल्ड और ओलंपिक टिकट दोनों टीम की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।

सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी: चीन की चुनौती

भारतीय महिला टीम के सामने सबसे कठिन परीक्षा चीन के रूप में होगी, जो चार बार की गोल्ड मेडलिस्ट, मौजूदा एशियन गेम्स चैंपियन और ओलंपिक सिल्वर मेडलिस्ट है। पूल बी में भारत को उज्बेकिस्तान, इंडोनेशिया, थाईलैंड, जापान और सिंगापुर से भी मुकाबला करना होगा।

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय हॉकी — चाहे पुरुष वर्ग हो या महिला — एक निर्णायक पड़ाव पर खड़ी है। वर्ल्ड कप की सीख और एशियन गेम्स का मंच मिलकर यह तय करेंगे कि अगले दो वर्षों में भारतीय हॉकी किस दिशा में जाती है।

ओलंपिक 2028: असली दाँव

इस बार एशियन गेम्स की हॉकी स्पर्धा में एक अतिरिक्त प्रोत्साहन है — गोल्ड मेडल जीतने वाली दोनों टीमों को लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 का सीधा टिकट मिल जाएगा। इसलिए पुरुष और महिला दोनों टीमों के लिए यह टूर्नामेंट महज एक महाद्वीपीय खिताब नहीं, बल्कि ओलंपिक की राह का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ है। दोनों टीमें अपनी पूरी ताकत और तैयारी के साथ मैदान में उतरेंगी — अब देखना यह होगा कि दबाव में प्रदर्शन कैसा रहता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न केवल प्रतिभा की। कोच फुल्टन का 'सीख को काम में बदलने' का बयान सही दिशा में है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या टीम ने महज मानसिक बदलाव किया है या सामरिक ढाँचे में भी ठोस सुधार हुए हैं। महिला टीम के लिए स्थिति उलट है — वर्ल्ड कप की ऊर्जा को बनाए रखना और पेरिस की चूक को लॉस एंजिल्स में सुधारना, दोनों एक साथ करने होंगे। ओलंपिक टिकट सीधे एशियन गेम्स के गोल्ड से जुड़ा होने के कारण यह स्पर्धा भारतीय हॉकी के लिए दशक की सबसे निर्णायक बन गई है।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एशियन गेम्स 2026 में भारतीय हॉकी टीम का पहला मैच कब और किससे है?
भारतीय पुरुष टीम का पहला मैच 21 सितंबर 2026 को इंडोनेशिया के खिलाफ होगा, जबकि महिला टीम उसी दिन उज्बेकिस्तान से भिड़ेगी। दोनों मैच काकामिगाहारा के गिफू प्रीफेक्चुरल ग्रीन स्टेडियम में खेले जाएंगे।
एशियन गेम्स 2026 हॉकी गोल्ड से ओलंपिक टिकट कैसे मिलेगा?
एशियन गेम्स 2026 की हॉकी स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतने वाली पुरुष और महिला दोनों टीमों को लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 में सीधा प्रवेश मिल जाएगा। यही कारण है कि इस बार का टूर्नामेंट पदक से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने पिछले एशियन गेम्स में क्या किया था?
भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने 2022 के एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। टीम अब तक 1966, 1998, 2014 और 2022 में — कुल चार बार — एशियन गेम्स का गोल्ड जीत चुकी है।
भारतीय महिला हॉकी टीम का वर्ल्ड कप 2026 में प्रदर्शन कैसा रहा?
भारतीय महिला हॉकी टीम वर्ल्ड कप 2026 में पाँचवें स्थान पर रही — जो 52 वर्षों में टीम का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। हालाँकि टीम सेमीफाइनल में नहीं पहुँच पाई, लेकिन इस उपलब्धि को ऐतिहासिक माना जा रहा है।
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला हॉकी टीम के पूल में कौन-सी टीमें हैं?
भारतीय महिला टीम पूल बी में उज्बेकिस्तान, इंडोनेशिया, थाईलैंड, जापान और सिंगापुर के साथ है। सबसे कड़ी चुनौती चीन से अपेक्षित है, जो चार बार की गोल्ड मेडलिस्ट और मौजूदा एशियन गेम्स चैंपियन है।
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