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एशियन गेम्स 2026: वर्ल्ड कप में 8वें स्थान के बाद पुरुष हॉकी टीम पर दबाव, रास्किन्हा ने गिनाई कमियाँ

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एशियन गेम्स 2026: वर्ल्ड कप में 8वें स्थान के बाद पुरुष हॉकी टीम पर दबाव, रास्किन्हा ने गिनाई कमियाँ

सारांश

वर्ल्ड कप में 8वें स्थान की निराशा अभी ताज़ी है और भारतीय पुरुष हॉकी टीम को 19 सितंबर से आइची-नागोया में उतरना है — जहाँ गोल्ड मेडल का मतलब सीधे लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 का टिकट है। पूर्व कप्तान रास्किन्हा ने गोलकीपिंग से लेकर फॉरवर्ड तक हर विभाग में सुधार की माँग की।

मुख्य बातें

भारत की पुरुष हॉकी टीम हॉकी वर्ल्ड कप में आठवें स्थान पर रही, जो उम्मीद से काफी नीचे।
पूर्व कप्तान विरेन रास्किन्हा ने कहा — गोलकीपिंग, डिफेंस, मिडफील्ड और अटैक हर विभाग में सुधार ज़रूरी।
एशियन गेम्स 2026 का आगाज़ 19 सितंबर को आइची-नागोया, जापान में; गोल्ड जीतने पर लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए सीधा क्वालिफिकेशन।
रास्किन्हा ने कहा — टीम गोल के लिए हरमनप्रीत के ड्रैग फ्लिक पर बहुत अधिक निर्भर; पेनल्टी कॉर्नर वेरिएशन में सुधार ज़रूरी।
महिला टीम की गोलकीपर बिचू देवी खारीबम और युवा खिलाड़ी साक्षी राणा व सुनेलिता टोप्पो की विशेष सराहना।
पुरुष टीम के मुख्य कोच क्रेग फुल्टन के सामने वर्ल्ड कप की निराशा को एशियन गेम्स सफलता में बदलने की बड़ी चुनौती।

भारत के पूर्व हॉकी कप्तान विरेन रास्किन्हा ने 16 सितंबर 2026 को कहा कि पुरुष हॉकी टीम ने हाल के हॉकी वर्ल्ड कप में अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं दिखाया और 19 सितंबर से जापान के आइची-नागोया में शुरू हो रहे एशियन गेम्स 2026 में उस पर अपेक्षाओं का भारी बोझ रहेगा। नीदरलैंड और बेल्जियम में आयोजित वर्ल्ड कप में भारतीय पुरुष टीम आठवें स्थान पर रही, जो प्रशंसकों और विशेषज्ञों दोनों के लिए निराशाजनक रही।

एशियन गेम्स का दांव क्यों बड़ा है

एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली टीम को लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए सीधा क्वालिफिकेशन मिलेगा। यह दांव इतना ऊँचा है कि वर्ल्ड कप की निराशा को जल्द भुलाकर नई ऊर्जा के साथ उतरना टीम की सबसे बड़ी ज़रूरत है। रास्किन्हा ने कहा, 'जाहिर है कि दबाव तो होगा ही, क्योंकि पुरुष हॉकी के लिहाज से हमने उम्मीद से कमतर प्रदर्शन किया। हम दावेदार हैं और हमें अपने काम में मजबूत रहना होगा।'

पुरुष टीम की कमज़ोरियाँ

रास्किन्हा ने साफ कहा कि समस्या किसी एक विभाग तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार गोलकीपिंग, डिफेंस, मिडफील्ड और अटैक — हर पहलू में सुधार की गुंजाइश है। पूर्व कप्तान ने कहा, 'हम गोल करने के लिए हरमनप्रीत के ड्रैग फ्लिक्स पर बहुत अधिक निर्भर हैं। हमें पेनल्टी कॉर्नर के वेरिएशन में कहीं बेहतर करने की जरूरत है।'

उन्होंने यह भी कहा कि वर्ल्ड कप में टीम 'हैंडब्रेक' लगाकर खेलती दिखी और पूरे 60 मिनट तक तीव्रता, टेम्पो और निरंतरता बनाए रखने में कमी रही। उनके अनुसार फॉरवर्ड्स को अधिक फील्ड गोल करने होंगे और 'डी' के अंदर ज़्यादा तेज़ी दिखानी होगी।

गोलकीपरों पर संतुलित राय

पुरुष गोलकीपर मोहित और सूरज केर्केरा के प्रदर्शन पर रास्किन्हा ने कहा कि यह 'ठीक-ठाक' रहा — 'बहुत अच्छा नहीं, लेकिन बहुत बुरा भी नहीं।' उन्होंने स्वीकार किया कि पीआर श्रीजेश जैसे दिग्गज की जगह लेना और तुरंत शानदार प्रदर्शन करना आसान नहीं होता। वर्ल्ड कप में डेब्यू करने वाले राजिंदर सिंह के खेल को उन्होंने सराहा।

महिला टीम और नई प्रतिभाएँ

रास्किन्हा ने महिला हॉकी टीम के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उसने उम्मीद से बेहतर खेला और टीम स्पिरिट, एकता, जोश तथा तीव्रता साफ दिखी। उनके लिए सबसे प्रभावशाली गोलकीपर बिचू देवी खारीबम रहीं, जो लंबे समय से सविता पुनिया की छाया में रही थीं। युवा खिलाड़ियों में उन्होंने साक्षी राणा और सुनेलिता टोप्पो की विशेष तारीफ की।

आगे का लक्ष्य

रास्किन्हा ने स्पष्ट किया कि दोनों टीमों — पुरुष और महिला — के लिए आइची-नागोया में गोल्ड मेडल के अलावा कोई और लक्ष्य नहीं होना चाहिए। पुरुष टीम के मुख्य कोच क्रेग फुल्टन के सामने वर्ल्ड कप की निराशा को एशियन गेम्स की सफलता में बदलने की बड़ी चुनौती है। यह टूर्नामेंट भारत के लिए ओलंपिक का टिकट सुनिश्चित करने का निर्णायक मौका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके भीतर एक गहरा सवाल है — क्या भारतीय पुरुष हॉकी की संरचनात्मक निर्भरता, यानी हरमनप्रीत के ड्रैग फ्लिक पर अटैक का टिके रहना, केवल कोचिंग की विफलता है या चयन प्रक्रिया की? वर्ल्ड कप के बाद एशियन गेम्स का दबाव असल में एक शॉर्ट-टर्म फिक्स की माँग करता है, जबकि टीम को लॉन्ग-टर्म ओवरहॉल की ज़रूरत है। ओलंपिक क्वालिफिकेशन का दांव सारी बहस को एक टूर्नामेंट पर केंद्रित कर देता है — और यही सबसे बड़ा जोखिम है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पुरुष हॉकी टीम पर इतना दबाव क्यों है?
एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीतने वाली टीम को लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए सीधा क्वालिफिकेशन मिलेगा। इसके अलावा, भारत हाल ही में हॉकी वर्ल्ड कप में आठवें स्थान पर रहा, जिसके कारण प्रदर्शन में सुधार की माँग और तेज़ हो गई है।
विरेन रास्किन्हा ने पुरुष हॉकी टीम की कौन-सी कमज़ोरियाँ गिनाईं?
पूर्व कप्तान विरेन रास्किन्हा के अनुसार टीम की समस्याएँ गोलकीपिंग, डिफेंस, मिडफील्ड और अटैक — सभी विभागों में हैं। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि टीम गोल के लिए हरमनप्रीत के ड्रैग फ्लिक पर अत्यधिक निर्भर है और पेनल्टी कॉर्नर के वेरिएशन में सुधार की ज़रूरत है।
एशियन गेम्स 2026 कब और कहाँ होंगे?
एशियन गेम्स 2026 का आयोजन 19 सितंबर 2026 से जापान के आइची-नागोया में शुरू हो रहा है। हॉकी इस टूर्नामेंट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसमें ओलंपिक क्वालिफिकेशन का दांव जुड़ा हुआ है।
महिला हॉकी टीम के प्रदर्शन पर रास्किन्हा की क्या राय है?
रास्किन्हा ने महिला टीम की सराहना करते हुए कहा कि उसने वर्ल्ड कप में उम्मीद से बेहतर खेल दिखाया। उन्होंने गोलकीपर बिचू देवी खारीबम, साक्षी राणा और सुनेलिता टोप्पो को विशेष रूप से प्रभावशाली बताया।
पुरुष गोलकीपरों के प्रदर्शन पर रास्किन्हा क्या बोले?
रास्किन्हा ने कहा कि मोहित और सूरज केर्केरा का प्रदर्शन 'ठीक-ठाक' रहा — न बहुत अच्छा, न बहुत बुरा। उन्होंने यह भी माना कि पीआर श्रीजेश जैसे दिग्गज की विरासत से निकलकर तुरंत शानदार प्रदर्शन करना आसान नहीं होता। वर्ल्ड कप में डेब्यू करने वाले राजिंदर सिंह की उन्होंने तारीफ की।
राष्ट्र प्रेस
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