एशियन गेम्स 2026 से पहले पुरुष हॉकी टीम पर दबाव: रास्किन्हा बोले — वर्ल्ड कप में 'हैंडब्रेक' लगाकर खेली टीम
सारांश
मुख्य बातें
भारत के पूर्व हॉकी कप्तान विरेन रास्किन्हा ने बुधवार, 16 सितंबर को स्पष्ट कहा कि पुरुष हॉकी टीम ने हालिया पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप में अपनी पूरी क्षमता नहीं दिखाई, और अब 19 सितंबर से जापान के आइची-नागोया में शुरू हो रहे एशियन गेम्स 2026 में टीम पर दबाव और भी बढ़ गया है। उन्होंने चेताया कि इस टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतना न केवल प्रतिष्ठा का सवाल है, बल्कि यह लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए सीधे क्वालिफिकेशन की चाबी भी है।
वर्ल्ड कप में प्रदर्शन: क्या रहा हाल
नीदरलैंड और बेल्जियम में हुए हालिया पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप में भारत आठवें स्थान पर रहा — एक ऐसा नतीजा जिसने खेल प्रेमियों को निराश किया। रास्किन्हा ने 'सोनी स्पोर्ट्स' नेटवर्क द्वारा आयोजित एक वर्चुअल बातचीत में कहा, "जाहिर है कि दबाव तो होगा ही, क्योंकि पुरुष हॉकी के लिहाज से हमने उम्मीद से कमतर प्रदर्शन किया। हम दावेदार हैं और हमें अपने काम में मजबूत रहना होगा।" उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वर्ल्ड कप में टीम जैसे 'हैंडब्रेक' लगाकर खेल रही थी और 100 प्रतिशत नहीं दे रही थी।
कमज़ोरियाँ: किस विभाग में चाहिए सुधार
रास्किन्हा ने टीम की समस्याओं को किसी एक खिलाड़ी या विभाग तक सीमित नहीं किया। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें हम सुधार कर सकते हैं — चाहे वह गोलकीपिंग हो, टीम के तौर पर कुल मिलाकर डिफेंस हो, मिडफील्ड हो, अटैक में मदद करना हो, डिफेंस में वापस लौटना हो, या फिर फॉरवर्ड्स की तेजी हो।" उन्होंने यह भी कहा कि हर मैच में 60 मिनट तक तीव्रता, टेम्पो और निरंतरता बनाए रखने में कमी नज़र आई।
पूर्व कप्तान ने हरमनप्रीत सिंह के ड्रैग फ्लिक पर अत्यधिक निर्भरता को भी चिंता का विषय बताया। उनके अनुसार, "हमें पेनल्टी कॉर्नर के वेरिएशन में कहीं बेहतर करने की जरूरत है। हमें सच में अपने फॉरवर्ड्स से बेहतर प्रदर्शन की जरूरत है, ताकि वे या तो अधिक फील्ड गोल करें या फिर 'डी' के अंदर ज्यादा तेजी दिखाएं।"
गोलकीपरों पर नपी-तुली राय
पुरुष टीम के गोलकीपरों — मोहित और सूरज केर्केरा — के प्रदर्शन पर रास्किन्हा ने संयमित रुख अपनाया। उनके अनुसार दोनों गोलकीपरों का प्रदर्शन 'ठीक-ठाक' रहा — न बहुत अच्छा, न बहुत बुरा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पीआर श्रीजेश जैसे दिग्गज की विरासत संभालना आसान नहीं है। हालाँकि, उन्होंने वर्ल्ड कप में डेब्यू करने वाले राजिंदर सिंह के प्रदर्शन की सराहना की।
महिला टीम और नई प्रतिभाएँ
रास्किन्हा ने महिला हॉकी टीम के प्रदर्शन की भरपूर तारीफ की और कहा कि उन्होंने उम्मीद से कहीं बेहतर खेल दिखाया। उन्होंने गोलकीपर बिचू देवी खारीबम को विशेष रूप से सराहा, जो अब तक सविता पुनिया की छाया में रही हैं। उन्होंने कहा कि बिचू का वर्ल्ड कप शानदार रहा। इसके साथ ही साक्षी राणा और सुनेलिता टोप्पो जैसी युवा खिलाड़ियों के उभरने को उन्होंने भारतीय हॉकी के लिए सकारात्मक संकेत बताया।
एशियन गेम्स 2026 का लक्ष्य: स्वर्ण से कम कुछ नहीं
रास्किन्हा ने दोनों टीमों के लिए एक ही लक्ष्य तय किया — स्वर्ण पदक। उन्होंने कहा, "पहली बात, दोनों टीमों का लक्ष्य गोल्ड जीतना होना चाहिए क्योंकि गोल्ड मेडल के साथ ओलंपिक क्वालिफिकेशन जुड़ा है, और यह बहुत जरूरी है।" उन्होंने पुरुष टीम के मुख्य कोच क्रेग फुल्टन पर भी जिम्मेदारी डाली और कहा कि उनके पास करने के लिए बहुत कुछ है। आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स भारतीय हॉकी के लिए एक निर्णायक परीक्षा साबित होंगे — यह न केवल खोई प्रतिष्ठा वापस पाने का मौका है, बल्कि ओलंपिक टिकट का सबसे सीधा रास्ता भी।