हांगकांग सिक्सेस: यूएई ने भारत को 6 विकेट से रौंदा, लगातार दूसरी हार में नटराजन का बल्ला-गेंद दोनों फेल
सारांश
मुख्य बातें
हांगकांग सिक्सेस टूर्नामेंट में भारतीय टीम को 31 अक्टूबर 2026 को कॉव्लून के टिन क्वॉंग रोड रिक्रिएशन ग्राउंड पर यूएई के हाथों 6 विकेट की करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। यह टूर्नामेंट में भारत की लगातार दूसरी हार है, इससे पहले पहले मैच में पाकिस्तान ने भारत को 4 विकेट से पराजित किया था।
भारत की बल्लेबाज़ी: निचले क्रम ने की मेहनत
यूएई ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी चुनी और भारतीय बल्लेबाज़ों को शुरू से ही दबाव में रखा। शीर्ष क्रम में राहुल त्रिपाठी ने 7 गेंदों पर 3 छक्कों और 1 चौके की मदद से 24 रन बनाए। कप्तान क्रुणाल पंड्या 8 गेंदों पर 15 रन ही जोड़ सके। नितीश राणा ने 6, राहुल तेवतिया ने 1 और शशांक सिंह ने भी महज 1 रन का योगदान दिया।
पारी का उजला पहलू निचले क्रम से आया — टी. नटराजन सबसे आखिरी नंबर पर उतरे और 14 गेंदों पर 4 छक्कों व 3 चौकों की बदौलत 38 रन ठोके। इसी के दम पर भारत ने 6 ओवर में सभी 6 विकेट गंवाकर 94 रन का स्कोर खड़ा किया।
यूएई की धमाकेदार जीत: खालिद शाह का तूफ़ान
95 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए यूएई ने महज 4.2 ओवर में बिना कोई विकेट खोए 97 रन बनाकर मैच अपने नाम कर लिया। कप्तान एवं विकेटकीपर खालिद शाह ने 14 गेंदों पर 6 छक्कों और 3 चौकों की सहायता से नाबाद 52 रन की विस्फोटक पारी खेली। उनके साथी अंश टंडन ने 12 गेंदों पर 5 छक्कों और 2 चौकों की मदद से नाबाद 39 रन बनाए।
गौरतलब है कि यूएई की यह जीत मात्र बल्लेबाज़ी से नहीं, बल्कि गेंदबाज़ी में भी वर्चस्व से हासिल हुई। जाहिद अली ने 2 ओवर में 32 रन देकर 2 विकेट लिए और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।
भारतीय गेंदबाज़ी: महंगे रहे सभी
बल्ले के बाद गेंद से भी भारत का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। सर्वाधिक रन बनाने वाले टी. नटराजन ने गेंदबाज़ी में 2 ओवर में 43 रन लुटाए। नितीश राणा ने 1 ओवर में 24, शशांक सिंह ने 1 ओवर में 17 और कप्तान क्रुणाल पंड्या ने 2 गेंदों पर ही 12 रन दे दिए।
टूर्नामेंट में भारत का हाल
यह ऐसे समय में आया है जब हांगकांग सिक्सेस में भारत का अभियान दोहरी पराजय के साथ शुरू हुआ है। पाकिस्तान से 4 विकेट की पहली हार के बाद अब यूएई से 6 विकेट की यह दूसरी शिकस्त टीम के लिए गंभीर चेतावनी है। टूर्नामेंट का अनूठा 6-ओवर प्रारूप प्रायः ऐसे परिणाम देता है जहाँ आक्रामक शुरुआत ही मैच का फैसला कर देती है — और इस मामले में भारत का शीर्ष क्रम दोनों बार विफल रहा। आगे के मैचों में टीम को शुरुआती ओवरों में बड़े शॉट खेलने की अपनी रणनीति सुधारनी होगी।