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धर्मशाला में 12 घंटे की बारिश के बाद भी 20 मिनट में तैयार हुआ मैदान, HPCA के सबएयर ड्रेनेज सिस्टम ने जीता दिल

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धर्मशाला में 12 घंटे की बारिश के बाद भी 20 मिनट में तैयार हुआ मैदान, HPCA के सबएयर ड्रेनेज सिस्टम ने जीता दिल

सारांश

12 घंटे की मूसलाधार बारिश, फिर भी मैदान 20 मिनट में तैयार — धर्मशाला के HPCA स्टेडियम के सबएयर ड्रेनेज सिस्टम ने भारत-अफगानिस्तान वनडे से पहले वह कर दिखाया जो पारंपरिक तकनीक घंटों में भी नहीं कर पाती। पहाड़ी क्रिकेट का नया बेंचमार्क।

मुख्य बातें

धर्मशाला में 13 जून को भारत-अफगानिस्तान वनडे सीरीज के पहले मैच से पहले 12 घंटे से अधिक लगातार बारिश हुई।
HPCA के सबएयर ड्रेनेज सिस्टम ने बारिश रुकने के मात्र 20 मिनट के भीतर मैदान को खेलने योग्य बना दिया।
बारिश के कारण मैच को 25-25 ओवर का कर दिया गया; शाम 5:15 बजे टॉस हुआ।
भारत ने टॉस जीतकर अफगानिस्तान को पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया।
यह तकनीक बेंगलुरु के एम.
चिन्नास्वामी स्टेडियम में भी उपयोग में है और इसे आधुनिक वेन्यू प्रबंधन का बेंचमार्क माना जाता है।

हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (HPCA) के धर्मशाला स्टेडियम में लगाए गए अत्याधुनिक सबएयर ड्रेनेज सिस्टम ने 13 जून को भारत-अफगानिस्तान वनडे सीरीज के पहले मुकाबले से पहले अपनी असाधारण क्षमता का प्रदर्शन किया। शहर में 12 घंटे से अधिक लगातार बारिश होने के बावजूद ग्राउंड स्टाफ ने मैदान को मात्र 20 मिनट में खेलने योग्य बना दिया, जिससे दर्शकों और क्रिकेट प्रेमियों ने खुलकर तारीफ की। शाम 5 बजकर 15 मिनट पर टॉस संपन्न हुआ और मुकाबला निर्धारित समय के करीब शुरू हो सका।

मुख्य घटनाक्रम

भारत-अफगानिस्तान वनडे सीरीज के पहले मैच से एक दिन पहले से ही धर्मशाला में मूसलाधार बारिश जारी थी। सामान्य परिस्थितियों में इतनी लंबी और भारी बारिश के बाद मैदान को खेलने लायक बनाने में घंटों लग जाते हैं, लेकिन HPCA के आधुनिक ड्रेनेज ढाँचे ने यह काम कुछ ही मिनटों में कर दिखाया। बारिश थमते ही ग्राउंड स्टाफ ने तेज़ी और दक्षता के साथ मैदान को तैयार किया। बारिश के कारण मैच को 25-25 ओवर का कर दिया गया और भारत ने टॉस जीतकर अफगानिस्तान को पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया।

सबएयर ड्रेनेज सिस्टम क्या है

सबएयर ड्रेनेज सिस्टम एक उन्नत तकनीक है जिसे खेल की सतह के नीचे से तेज़ी से पानी और नमी को बाहर निकालने के लिए विकसित किया गया है। पारंपरिक ड्रेनेज सिस्टम केवल गुरुत्वाकर्षण पर निर्भर रहते हैं, जबकि सबएयर सिस्टम जमीन के नीचे बिछाए गए पाइपों के जाल के ज़रिए टर्फ से पानी और नमी को सक्रिय रूप से खींचता है। इससे मैदान सूखने की प्रक्रिया कई गुना तेज़ हो जाती है।

यह तकनीक आउटफील्ड की गुणवत्ता बनाए रखने, खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और खराब मौसम के बाद मैदान को शीघ्र खेलने योग्य बनाने में विशेष रूप से कारगर मानी जाती है। इसे आधुनिक स्पोर्ट्स वेन्यू प्रबंधन में एक मानक बेंचमार्क माना जाता है।

देश के अन्य स्टेडियमों से तुलना

यह तकनीक बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में भी उपयोग में है, जो बारिश के बाद तेज़ी से खेल पुनः शुरू करने की अपनी क्षमता के लिए पहले से ही प्रसिद्ध है। धर्मशाला स्टेडियम में इस प्रणाली के सफल प्रदर्शन ने यह साबित किया कि पहाड़ी क्षेत्रों में भी विश्वस्तरीय क्रिकेट बुनियादी ढाँचा स्थापित किया जा सकता है।

आम जनता और फैंस पर असर

धर्मशाला जैसे पहाड़ी शहर में, जहाँ मानसून के दौरान बारिश आम बात है, इस तकनीक के होने से दर्शकों को मैच रद्द होने या लंबे विलंब का सामना नहीं करना पड़ा। स्टेडियम में मौजूद फैंस ने ग्राउंड स्टाफ की तत्परता और सिस्टम की दक्षता की भरपूर सराहना की। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि सही तकनीकी निवेश से मौसम की अनिश्चितता के बावजूद क्रिकेट अनुभव को बेहतर बनाया जा सकता है।

आगे की राह

गौरतलब है कि भारत में कई स्टेडियम अभी भी पारंपरिक ड्रेनेज सिस्टम पर निर्भर हैं, जिससे बारिश के बाद मैच में लंबी देरी होती है। HPCA का यह अनुभव अन्य राज्य क्रिकेट संघों के लिए एक मिसाल बन सकता है। आने वाले मानसून सत्र में इस तकनीक की और परीक्षाएँ होंगी, जो यह तय करेंगी कि भारतीय क्रिकेट का बुनियादी ढाँचा किस दिशा में आगे बढ़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय क्रिकेट बुनियादी ढाँचे की असमानता को भी उजागर करता है — जहाँ कुछ स्टेडियम विश्वस्तरीय तकनीक से लैस हैं, वहीं कई मैदान आज भी मामूली बारिश में घंटों बर्बाद कर देते हैं। HPCA और चिन्नास्वामी का अनुभव BCCI के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि सबएयर जैसी तकनीक को राष्ट्रीय स्तर पर अनिवार्य मानक बनाया जाए। पहाड़ी और वर्षा-प्रवण क्षेत्रों में क्रिकेट की बढ़ती उपस्थिति को देखते हुए यह निवेश विलासिता नहीं, आवश्यकता है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

HPCA का सबएयर ड्रेनेज सिस्टम क्या है?
सबएयर ड्रेनेज सिस्टम एक अत्याधुनिक तकनीक है जो खेल की सतह के नीचे बिछाए गए पाइपों के नेटवर्क के ज़रिए टर्फ से पानी और नमी को सक्रिय रूप से खींचती है। यह पारंपरिक गुरुत्वाकर्षण-आधारित ड्रेनेज से कहीं तेज़ है और मैदान को बारिश के बाद बहुत कम समय में खेलने योग्य बना देती है।
धर्मशाला में 13 जून को मैदान कितने समय में तैयार हुआ?
12 घंटे से अधिक लगातार बारिश के बावजूद HPCA के ग्राउंड स्टाफ ने सबएयर सिस्टम की मदद से मात्र 20 मिनट में मैदान को खेलने योग्य बना दिया। शाम 5 बजकर 15 मिनट पर टॉस संपन्न हुआ।
भारत-अफगानिस्तान मैच पर बारिश का क्या असर पड़ा?
बारिश के कारण मैच को 50 ओवर से घटाकर 25-25 ओवर का कर दिया गया। भारत ने टॉस जीतकर अफगानिस्तान को पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया।
भारत में और कहाँ सबएयर ड्रेनेज सिस्टम का उपयोग होता है?
बेंगलुरु का एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम भी इसी तकनीक का उपयोग करता है और बारिश के बाद तेज़ी से खेल पुनः शुरू करने के लिए जाना जाता है। धर्मशाला स्टेडियम अब इस सूची में शामिल हो गया है।
इस तकनीक से खिलाड़ियों और दर्शकों को क्या फायदा होता है?
सबएयर सिस्टम आउटफील्ड की गुणवत्ता बनाए रखता है, जिससे खिलाड़ियों को फिसलन या चोट का खतरा कम होता है। दर्शकों को मैच रद्द होने या लंबी देरी का सामना नहीं करना पड़ता, जिससे उनका क्रिकेट अनुभव बेहतर होता है।
राष्ट्र प्रेस
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