भारतीय फुटबॉल टीम खेलेगी पनामा, ब्राजील, उरुग्वे से; सुनील छेत्री बोले — 'थोड़ी जलन हो रही है'
सारांश
मुख्य बातें
भारत की सीनियर पुरुष फुटबॉल टीम इस वर्ष फीफा मेंस इंटरनेशनल मैच विंडो के तहत पनामा, ब्राजील, उरुग्वे और न्यूजीलैंड जैसी दिग्गज टीमों से भिड़ेगी — ये चारों देश 2026 फीफा विश्व कप में हिस्सा ले रहे हैं। कोलकाता में शनिवार को पूर्व कप्तान सुनील छेत्री ने इस कार्यक्रम पर खुशी जताते हुए कहा कि अपने 20 वर्षों के राष्ट्रीय टीम करियर में उन्हें कभी ऐसा अवसर नहीं मिला।
मैच कार्यक्रम
भारत का पहला मुकाबला सितंबर में पनामा के विरुद्ध एक दोस्ताना मैच के रूप में होगा, जिसकी मेजबानी भारत करेगा। इसके बाद 3 अक्टूबर को ब्राजील से टक्कर होगी। फिर 6 अक्टूबर को साल्ट लेक स्टेडियम, कोलकाता में उरुग्वे का सामना किया जाएगा। वर्ष के अंत में 12 और 15 नवंबर को न्यूजीलैंड के खिलाफ दो मुकाबले खेले जाएंगे। ये चार मैच विश्व कप खेलने वाली टीमों के विरुद्ध भारत के अब तक के सबसे महत्वाकांक्षी फिक्स्चर माने जा रहे हैं।
सुनील छेत्री की प्रतिक्रिया
पूर्व कप्तान सुनील छेत्री ने शनिवार को पत्रकारों से कहा, 'मैं सच में बहुत खुश हूं और थोड़ी जलन भी हो रही है कि ये हमारे लड़के ब्राजील, उरुग्वे और पनामा के खिलाफ खेलने जा रहे हैं।' उन्होंने जोड़ा, 'अपने 24-26 साल के प्रोफेशनल करियर और नेशनल टीम के साथ 20 वर्षों में मुझे कभी ऐसा मौका नहीं मिला, इसलिए मुझे थोड़ी जलन महसूस हो रही है।'
छेत्री ने खिलाड़ियों की तैयारी को लेकर उम्मीद जताई: 'मुझे पूरा यकीन है कि सभी लड़के इस गेम में शामिल होने के लिए बहुत मेहनत करेंगे। मैं बस यही उम्मीद करता हूं कि वे इन गेम्स से सबसे अच्छा अनुभव हासिल कर पाएं; यह एक शानदार अनुभव होगा।'
नेपाल बाढ़ पर छेत्री की संवेदना
इसी अवसर पर नेपाल में आई भयंकर बाढ़ पर भी छेत्री ने अपनी भावनाएं साझा कीं। उन्होंने कहा, 'यह बहुत भयावह है। मेरे कई जानने वाले नेपाल में रहते हैं। अच्छी बात यह है कि मेरा परिवार वहां नहीं था, लेकिन मैं बता नहीं सकता कि यह कितना बड़ा नुकसान है।' उन्होंने लोगों से अपील की कि इस क्षेत्र के प्रभावित लोगों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद की जाए।
भारतीय फुटबॉल के लिए क्या मायने रखता है
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय फुटबॉल अपनी फीफा रैंकिंग सुधारने और एशियाई स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की कोशिश में है। गौरतलब है कि ब्राजील और उरुग्वे जैसी टीमों के विरुद्ध मैच खेलने का अनुभव युवा खिलाड़ियों के विकास में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे उच्च-स्तरीय मुकाबले भारतीय टीम की तकनीकी और मानसिक परिपक्वता को परखने का सबसे बेहतर मंच हैं।