आईओसी का नया नियम: ट्रांसजेंडर महिलाएं ओलंपिक में महिला इवेंट्स में नहीं ले सकेंगी भाग
सारांश
Key Takeaways
- आईओसी का नया निर्णय ट्रांसजेंडर महिलाओं के लिए है।
- महिला कैटेगरी में केवल बायोलॉजिकल महिलाएं भाग ले सकेंगी।
- लिंग की पुष्टि के लिए जीन टेस्ट अनिवार्य होगा।
- महिलाओं के खेलों में निष्पक्षता और सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।
- खेल संघों के लिए एक समान नियम लागू होंगे।
नई दिल्ली, 27 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (आईओसी) ने ट्रांसजेंडर महिलाओं से संबंधित एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। आईओसी ने बताया है कि 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक और आने वाले खेलों में ट्रांसजेंडर महिलाएं अब महिला कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकेंगी।
आईओसी की नई नीति के अनुसार, केवल जन्म से महिला एथलीटों को ही महिला कैटेगरी में भाग लेने की अनुमति होगी। खिलाड़ियों को लिंग की पुष्टि के लिए एक बार जीन टेस्ट से गुजरना होगा, जिसे थूक, रक्त या गाल के नमूने से किया जाएगा। हालांकि, जो एथलीट जन्म से महिला थे और अब खुद को ट्रांसजेंडर मानते हैं, वे महिला स्पर्धाओं में भाग ले सकेंगे।
आईओसी की अध्यक्ष क्रिस्टी कोवेंट्री ने कहा कि यह निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि बायोलॉजिकल पुरुषों का महिला कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय महिलाओं के खेलों में निष्पक्षता और उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
उन्होंने आगे कहा, "हमने जो नीति लागू की है, वह वैज्ञानिक आधार पर है और इसे मेडिकल सलाहकारों द्वारा तैयार किया गया है। ओलंपिक खेलों में जीत और हार के बीच का अंतर भी महत्वपूर्ण होता है। इसलिए, बायोलॉजिकल पुरुषों का महिलाओं की कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा करना उचित नहीं है। कुछ खेलों में यह बिल्कुल सुरक्षित भी नहीं होगा। हर एथलीट का सम्मान होना चाहिए और उन्हें अपनी जिंदगी में केवल एक बार स्क्रीनिंग करवानी होगी।"
अब तक के नियमों के अनुसार, आईओसी ट्रांसजेंडर महिलाओं को टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम करने की शर्त पर खेलने की अनुमति देता था या यह निर्णय व्यक्तिगत खेल संघों के ऊपर छोड़ देता था। लेकिन आईओसी अब सभी खेलों में एक समान नीति के पक्ष में है, ताकि विभिन्न खेल संगठनों के पास अलग-अलग नियम न हों। हालांकि, कई खेल संघ पहले ही ट्रांसजेंडर एथलीटों पर प्रतिबंध लगा चुके हैं।