उत्तराखंड CM पुष्कर सिंह धामी ने 30,000 नवनियुक्त कार्मिकों को लिखा पत्र, जनसेवा में निष्ठा की अपील
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 18 मई 2025 को राज्य सरकार के बीते चार वर्षों में चयनित नवनियुक्त कार्मिकों को डिजिटल माध्यम से व्यक्तिगत पत्र लिखकर उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और उनसे ईमानदारी व निष्पक्षता के साथ जनसेवा में योगदान देने की अपील की। वर्ष 2022 में दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से धामी सरकार ने 30,000 से अधिक युवाओं को राजकीय सेवक के रूप में नियुक्त किया है।
चार वर्षों में 30,000 से अधिक नियुक्तियाँ
मुख्यमंत्री धामी ने पत्र में उल्लेख किया कि 2022 में जनादेश मिलने के पहले दिन से ही प्रदेश में बेरोज़गारी उन्मूलन को प्राथमिकता दी गई और सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर व्यापक भर्ती अभियान चलाया गया। इस अभियान के परिणामस्वरूप बीते चार वर्षों में लगभग 30 हज़ार से अधिक युवाओं को राजकीय सेवा में स्थान मिला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भर्ती प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
पारदर्शी चयन प्रक्रिया और नकल-विरोधी कानून
धामी ने पत्र में रेखांकित किया कि नवनियुक्त कार्मिक अपनी प्रतिभा और कठोर परिश्रम के बल पर राजकीय सेवा में चयनित हुए हैं। राज्य सरकार के कठोर नकल-विरोधी कानून और पारदर्शी व निष्पक्ष चयन प्रक्रिया ने सुनिश्चित किया कि योग्य युवाओं को उचित सम्मान मिले। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देश के कई राज्यों में भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोप सामने आते रहे हैं।
कार्मिकों से जनसेवा की अपील
मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त कार्मिकों से आग्रह किया कि वे राजकीय सेवक के रूप में मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि रखते हुए आमजन की सेवा में सदैव तत्पर रहें। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य में राजकीय सेवक के रूप में चयन न केवल कार्मिक के परिवार, बल्कि राज्य सरकार के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। धामी ने इस अवसर पर कई चयनित युवाओं से दूरभाष पर सीधी बात कर उन्हें उत्साहित भी किया।
आगे क्या
मुख्यमंत्री धामी के अनुसार राजकीय सेवाओं में भर्ती का यह अभियान आने वाले समय में भी जारी रहेगा। गौरतलब है कि उत्तराखंड में युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर बढ़ाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है, और नवनियुक्त कार्मिकों की यह पीढ़ी राज्य के प्रशासनिक ढाँचे को नई ऊर्जा देने में सक्षम होगी।